बिहार में अमित शाह के दौरे के बाद बढ़ी सियासी सरगर्मी..क्या भारत में एक और केंद्रशासित प्रदेश बनेगा?

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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के तीन दिवसीय सीमांचल दौरे ने बिहार की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सीमावर्ती जिलों में हुई हाईलेवल बैठकों को लेकर सियासी गलियारों में कयासों का दौर तेज है। खासकर नेपाल और बंगाल सीमा से सटे इलाकों में सुरक्षा, घुसपैठ और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर चर्चाएं फिर से केंद्र में आ गई हैं।

बता दें, दौरे के दौरान गृह मंत्री ने पूर्णिया, अररिया और किशनगंज में प्रशासनिक अधिकारियों, अर्धसैनिक बलों के वरिष्ठ पदाधिकारियों तथा खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के साथ लंबी समीक्षा बैठकें कीं। सीमाई इलाकों की सुरक्षा व्यवस्था, अंतरराष्ट्रीय सीमा पर निगरानी और आंतरिक सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने पर विशेष चर्चा होने की बात सामने आई है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दौरे को केवल नियमित समीक्षा बैठक के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसके दूरगामी राजनीतिक और प्रशासनिक संकेत भी निकाले जा रहे हैं।

यूनियन टेरिटरी की चर्चा ने पकड़ा जोर

वहीं, सीमांचल को लेकर सबसे अधिक चर्चा इस बात की है कि क्या केंद्र सरकार इस क्षेत्र को यूनियन टेरिटरी (केंद्र शासित प्रदेश) बनाने पर विचार कर रही है। सीमावर्ती जिलों—किशनगंज, अररिया, पूर्णिया और कटिहार—को मिलाकर एक अलग प्रशासनिक इकाई बनाए जाने की अटकलें फिर तेज हो गई हैं। कुछ राजनीतिक हलकों में यह भी कहा जा रहा है कि पश्चिम बंगाल के सीमावर्ती उत्तरी जिलों के हिस्सों को भी इसमें शामिल करने पर विचार हो सकता है। हालांकि, इस संबंध में केंद्र या राज्य सरकार की ओर से कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

हालांकि, सत्ताधारी दल के नेताओं का तर्क है कि नेपाल और बांग्लादेश सीमा से सटे इन क्षेत्रों में सुरक्षा की दृष्टि से विशेष प्रशासनिक व्यवस्था की आवश्यकता लंबे समय से महसूस की जा रही है। उनका कहना है कि यदि केंद्र का सीधा नियंत्रण होगा तो सीमा प्रबंधन, घुसपैठ पर रोक और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी लाई जा सकेगी।

वहीं, विपक्षी दल इस मुद्दे को राजनीतिक नजरिये से देख रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल ने इसे भाजपा का राजनीतिक एजेंडा बताया है। राजद नेताओं का कहना है कि मुस्लिम बहुल सीमांचल क्षेत्र में राजनीतिक समीकरण बदलने के उद्देश्य से इस तरह की चर्चाओं को हवा दी जा रही है। भाजपा नेताओं का कहना है कि सीमा सुरक्षा और राष्ट्रीय हित सर्वोपरि है। उनका तर्क है कि यदि यूनियन टेरिटरी का गठन होता है तो इससे प्रशासनिक दक्षता बढ़ेगी और संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में कानून-व्यवस्था मजबूत होगी।

सुरक्षा बनाम राजनीति की बहस तेज

दरअसल, सीमांचल क्षेत्र लंबे समय से घुसपैठ, तस्करी और सीमा पार आपराधिक गतिविधियों को लेकर संवेदनशील माना जाता रहा है। ऐसे में गृह मंत्री का लगातार सीमावर्ती जिलों का दौरा और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समीक्षा बैठकें कई संकेत दे रही हैं।

फिलहाल, यूनियन टेरिटरी को लेकर चल रही अटकलों ने बिहार की राजनीति में नया मुद्दा खड़ा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस पर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच बयानबाजी और तेज होने की संभावना है। गृह मंत्री का यह दौरा प्रशासनिक समीक्षा से आगे बढ़कर अब एक बड़े राजनीतिक विमर्श का रूप लेता दिख रहा है।

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