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National Flag Change: नेशनल फ्लैग किसी देश की पहचान और इतिहास की सबसे मजबूत निशानियों में से एक है. यह ग्लोबल स्टेज पर देश की वैल्यू, स्ट्रगल और एकता को दर्शाता है. आपको बता दें कि हर देश को अपना नेशनल फ्लैग बदलने का पूरा हक है. बशर्ते उसकी सरकार और कानून इसकी इजाजत दे. ऐसे बदलाव आमतौर पर बड़े पॉलिटिकल बदलाव, आजादी के आंदोलन या मॉडर्न नेशनल पहचान को दिखाने की कोशिशें के दौरान होते हैं.
सरकार या पार्लियामेंट प्रपोजल को शुरू करती है
नेशनल फ्लैग को बदलने का प्रोसेस आमतौर पर सरकार या फिर लेजिसलेटिव बॉडी के प्रपोजल से शुरू होता है. यह प्रपोजल पॉलिटिकल बदलाव, आजादी, सरकार बदलने या पब्लिक डिमांड की वजह से आ सकता है. सरकार पहले यह देखती है कि बदलाव जरूरी है या फिर नहीं. इसके बाद फॉर्मल प्रक्रिया को शुरू कर दिया जाता है. जैसे कॉलोनियल शासन से उभर रहे देश अक्सर कॉलोनियल सिंबल हटाने और अपनी पहचान को बनाने के लिए अपने फ्लैग बदलते हैं.
कौन तय करता है नए झंडे का डिजाइन?
एक बार प्रपोजल मंजूर हो जाने के बाद अगला कदम नए डिजाइन को बनाना होता है. इसके लिए कई देश कॉम्पिटीशन के जरिए झंडे के डिजाइन जमा करने के लिए आर्टिस्ट, डिजाइनर और आम जनता को भी बुलाते हैं. इसमें लोगों की भागीदारी बढ़ती है और यह पक्का होता है कि नया झंडा देश की संस्कृति और मूल्यों को दिखाए. कुछ मामलों में इतिहासकार, डिजाइनर और सरकारी अधिकारियों वाली एक्सपर्ट कमेटियां डिजाइन को रिव्यू करती हैं और सबसे सही ऑप्शन चुनती हैं.
कैसे ली जाती है जनता की राय?
लोकतांत्रिक देशों में जनता की राय काफी जरूरी होती है. सरकारें रेफरेंडम करा सकती हैं. इससे नागरिक यह वोट कर सकते हैं कि नया झंडा अपनाया जाए या मौजूदा झंडा ही रखा जाए. जैसे न्यूजीलैंड ने 2015-16 में अपना झंडा बदलने के लिए एक नेशनल रेफरेंडम कराया था. इसमें ज्यादातर नागरिकों ने असली झंडा ही रखने का फैसला किया था.
कानूनी मंजूरी कितनी जरूरी?
फाइनल डिजाइन चुनने के बाद नए झंडे को कानूनी तरीकों से ऑफीशियली मंजूरी मिलनी चाहिए. पार्लियामेंट या फिर संबंधित सरकारी अथॉरिटी नए झंडे को नेशनल सिंबल घोषित करने वाला एक कानून पास करती है.
नया झंडा कब पेश किया जाता है?
मंजूरी मिलने के बाद नए झंडे को ऑफिशियल सेरेमनी के जरिए पेश किया जाता है. इसमें अक्सर सरकारी नेता और पब्लिक सेलिब्रेशन शामिल होते हैं. पुराने झंडे को सम्मान के साथ हटा दिया जाता है और नए झंडे को सरकारी बिल्डिंग, मिलिट्री बेस और इंटरनेशनल मिशन में फहराया जाता है.
क्यों बदलते हैं देश अपना झंडा?
देशों के अपने झंडे को बदलने का फैसला कई वजहों से आता है. 1994 में साउथ अफ्रीका में रंगभेद का अंत और एकता की निशानी के तौर पर एक नया झंडा अपनाने की वजह बना. इसी तरह कनाडा जैसे देशों ने 1965 में कॉलोनियल असर से अलग एक खास नेशनल पहचान बनाने के लिए अपने झंडे को बदला.










