Navratri Day 5 Maa Skandamata : आज नवरात्रि का 5वां दिन मां स्कंदमाता को समर्पित..जानें शुभ मुहूर्त एवं पूजा विधि

👇

Navratri Day 5 Maa Skandamata: नवरात्रि का 5वां दिन यानी कि मां स्कंदमाता का दिन और नवरात्रि की पंचमी तिथि। तो आइए जानते हैं कि इस चैत्र नवरात्रि की पंचमी तिथि को कौन से शुभ मुहूर्त बन रहे हैं।

Navratri Day 5 Maa Skandamata: चैत्र नवरात्रि के 5वें दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। स्कंदमाता भगवान कार्तिकेय (जिन्हें स्कंद भी कहा जाता है) की माता हैं और विधि-विधान से उनकी पूजा करने पर उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। जो भक्त उनकी पूजा करते हैं, उन्हें उन्नति, सुख और समृद्धि प्राप्त होती है, और साथ ही संतान सुख का आशीर्वाद भी मिलता है। इस लेख में जानेंगे कि नवरात्रि के 5वें दिन कौन से शुभ संयोग बन रहे हैं और इस दिन की पूजा का क्या महत्व है।

स्कंदमाता की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त (Navratri Day 5 Maa Skandamata)

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:47 बजे से 05:35 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:03 बजे से 12:52 बजे तक
विजय मुहूर्त: दोपहर 02:30 बजे से 03:19 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: शाम 06:33 बजे से 06:56 बजे तक
अमृत काल: शाम 06:37 बजे से 08:05 बजे तक
निशिता मुहूर्त: 24 मार्च को रात 12:04 बजे से 12:51 बजे तक
रवि योग: रात 08:49 बजे से 24 मार्च को सुबह 06:21 बजे तक
सर्वार्थ सिद्धि योग : रात 08:49 बजे से 24 मार्च को सुबह 06:21 बजे तक


स्कंदमाता की पूजा विधि (Skandmata Puja Vidhi)

इस दिन सुबह जल्दी उठें, स्नान करें और सफेद रंग के वस्त्र धारण करें; क्योंकि यह पवित्रता और शांति का प्रतीक है, और सफेद रंग के वस्त्र धारण करने से मन में शांति और पवित्रता आती है।
इसके बाद, मंदिर की सफाई करें, गंगाजल छिड़कें और स्कंदमाता की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें। देवी के सामने घी का दीपक जलाएँ और सिंदूर, अक्षत (चावल) और फूल अर्पित करें।
इलायची, लौंग, सुपारी, पान के पत्ते और लाल रंग के फूल अर्पित करना अत्यंत शुभ माना जाता है। देवी को भोग के रूप में केले अर्पित करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह समृद्धि और शक्ति का प्रतीक है।
पूजा के दौरान, दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। इसके बाद, आरती करके और प्रसाद वितरित करके पूजा विधि को संपन्न करें।

स्कंदमाता मंत्र (Skandmata Mantra)

ॐ देवी स्कंदमात्रे नमः।


स्कंदमाता स्तुति
या देवी सर्वभूतेषु माँ स्कन्दमाता रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥

मां दुर्गा आरती  (Maa Durga Aarti Lyrics Hindi)

ओम जय अंबे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी।
तुमको निशिदिन ध्यावत, हरि ब्रह्मा शिवरी॥
ओम जय अंबे गौरी

मांग सिन्दूर विराजत, टीको मृगमद को।
उज्जवल से दोउ नैना, चन्द्रवदन नीको॥
ओम जय अंबे गौरी

कनक समान कलेवर, रक्ताम्बर राजै।
रक्तपुष्प गल माला, कण्ठन पर साजै॥
ओम जय अंबे गौरी

केहरि वाहन राजत, खड्ग खप्परधारी।
सुर-नर-मुनि-जन सेवत, तिनके दुखहारी॥
ओम जय अंबे गौरी

कानन कुण्डल शोभित, नासाग्रे मोती।
कोटिक चन्द्र दिवाकर,सम राजत ज्योति॥
ओम जय अंबे गौरी

शुम्भ-निशुम्भ बिदारे, महिषासुर घाती।
धूम्र विलोचन नैना, निशिदिन मदमाती॥
ओम जय अंबे गौरी

चण्ड-मुण्ड संहारे, शोणित बीज हरे।
मधु-कैटभ दोउ मारे, सुर भयहीन करे॥
ओम जय अंबे गौरी

ब्रहमाणी रुद्राणी तुम कमला रानी।
आगम-निगम-बखानी, तुम शिव पटरानी॥
ओम जय अंबे गौरी

चौंसठ योगिनी मंगल गावत, नृत्य करत भैरूं।
बाजत ताल मृदंगा, अरु बाजत डमरु॥
ओम जय अंबे गौरी

तुम ही जग की माता, तुम ही हो भरता।
भक्तन की दु:ख हरता, सुख सम्पत्ति करता॥
ओम जय अंबे गौरी

भुजा चार अति शोभित, वर-मुद्रा धारी।
मनवान्छित फल पावत, सेवत नर-नारी॥
ओम जय अंबे गौरी

कंचन थाल विराजत, अगर कपूर बाती।
श्रीमालकेतु में राजत, कोटि रतन ज्योति॥
ओम जय अंबे गौरी

श्री अम्बेजी की आरती, जो कोई नर गावै।
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख सम्पत्ति पावै॥
ओम जय अंबे गौरी, ओम जय अंबे गौरी

Disclaimer:
यह जानकारी मान्यताओं, धारणाओं और अलग-अलग स्रोतों पर उपलब्ध सामग्री पर आधारित है और सामान्य जानकारी के उद्देश्य से है। इस जानकारी के आधार पर कोई भी निजी निर्णय लेने से पहले विशेषज्ञ से परामर्श लेने की सलाह दी जाती है ।

Please Share With Your Friends Also

‘जन-जन तक संदेश’ ( Jan Jan Tak Sandesh) यह छत्तीसगढ़ का एक तेजी से बढ़ता हुआ हिंदी न्यूज़ पोर्टल है। हमारा उद्देश्य सिर्फ खबरें पहुँचाना नहीं, बल्कि समाज की आवाज़ बनना है।

Leave a Comment