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Heat Wave Death in India: मौसम विभाग ने हीटवेव का अलर्ट जारी किया है. देश के कई शहर गर्मी से तप रहे हैं. राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. चढ़ता पारा मौत की वजह भी बनता है. आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 से 2022 के बीच सिर्फ गर्मी से 3798 मौते हुईं. जानिए, गर्मी से कहां-कितनी मौतें हुईं, हीटवेव क्यों और कैसे बन जाती है काल.
देश के कई शहरों में हीटवेव का कहर जारी है.
दिल्ली समेत देश के कई राज्यों में हीटवेव का कहर जारी है. दिल्ली में तापमान 43 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है. मौसम विभाग (IMD) ने यलो अलर्ट जारी किया है. चढ़ता पारा मौत की वजह भी बनता है. आंकड़े इसकी पुष्टि करते हैं. आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 से 2022 के बीच सिर्फ गर्मी से 3798 मौते हुईं. सबसे ज्यादा मौतों का रिकॉर्ड बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में बना. जानिए, कहां-कितनी मौतें हुईं.
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गृह मंत्रालय (MHA) के नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़े बताते हैं कि साल 2018 से 2022 के दौरान सबसे ज्यादा 470 मौतें महाराष्ट्र में हुईं. साल 2019 में सबसे ज्यादा 159 मौतें हुई थीं. वहीं, दूसरे नम्बर पर बिहार है. यहां 5 सालों में 467 मौतें हुईं. गर्मी में सबसे ज्यादा 215 लोगों ने साल 2019 में दम तोड़ा.
किस राज्य में कितनी मौतें?
राज्य/केंद्र शासित प्रदेश 2018- 2019- 2020- 2021- 2022
1 आंध्र प्रदेश 97 128 50 22 47
2 अरुणाचल प्रदेश 0 0 0 0 0
3 असम 0 3 0 0 1
4 बिहार 64 215 53 57 78
5 छत्तीसगढ 1 16 3 2 11
6 गोवा 0 0 0 0 0
7 गुजरात 31 27 12 8 5
8 हरियाणा 56 46 23 14 27
9 हिमाचल प्रदेश 0 0 0 1 0
10 झारखंड 42 88 23 33 47
11 कर्नाटक 0 4 1 0 2
12 केरल 1 3 0 0 0
13 मध्य प्रदेश 15 33 7 2 27
14 महाराष्ट्र 128 159 56 37 90
15 मणिपुर 0 0 0 0 0
16 मेघालय 4 0 0 0 0
17 मिजोरम 0 0 0 0 0
18 नगालैंड 0 0 0 0 0
19 ओडिशा 40 84 13 15 38
20 पंजाब 38 90 110 91 130
21 राजस्थान 43 54 23 1 12
22 सिक्किम 0 1 0 0 0
23 तमिलनाडु 0 0 0 2 2
24 तेलंगाना 107 156 98 43 62
25 त्रिपुरा 1 1 2 0 2
26 उतार प्रदेश 176 117 50 35 130
27 उत्तराखंड 0 0 0 0 0
28 पश्चिम बंगाल 46 49 6 11 18
कुल राज्य 890 1274 530 374 729
29 अंडमान और निकोबार द्वीप समूह 0 0 0 0 0
30 चंडीगढ़ 0 0 0 0 0
31 डी एंड एन हवेली और दमन एवं दीव 0 0 0 0 0
32 दिल्ली केंद्र शासित प्रदेश 0 0 0 0 1
33 जम्मू और कश्मीर 0 0 0 0 0
34 लद्दाख – – 0 0 0
35 लक्षद्वीप 0 0 0 0 0
36 पुडुचेरी 0 0 0 0 0
कुल केंद्र शासित प्रदेश(ओं) 0 0 0 0 1
कुल (पूरे भारत में) 890 1274 530 374 730
कैसे पता चलता है कि हीटवेव चल रही?
वहीं, भारत में अलग-अलग हिस्सों के लिए हीटवेव के मानक भी अलग हैं. मौसम विभाग कहता है मैदानी और पहाड़ी इलाकों में अलग-अलग तापमान पर हीटवेव की घोषणा की जाती है. मैदानी में इलाकों में अधिक तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर हीटवेव की घोषणा होती है. इस तापमान में 6.5° सेल्सियस या उससे ज्यादा की बढ़ोतरी होती है तो इसे गंभीर हीटवेव कहते हैं.
वहीं, पहाड़ी इलाकों में अगर अधिकतम तापमान 30°C या उससे अधिक हो जाए और और यह सामान्य तापमान से 4.5°C से 6.4°C ज्यादा हो तो हीटवेव की घोषणा होती है. वहीं, अगर तापमान सामान्य से 6.5°C या उससे ज्यादा ऊपर हो तो इसे गंभीर हीटवेव माना जाता है.
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हीटवेव कैसे बन जाती है काल?
दरअसल, हीटवेव के दौरान सूरज की किरणें सीधी पड़ती हैं. बारिश नहीं होती. जमीन और हवा दोनों गर्म रहते हैं. आसान भाषा में समझें तो ज्यादा गर्मी शरीर के तापमान को कंट्रोल करने की क्षमता बिगाड़ देती है. यही हालात जानलेवा बनते हैं. तापमान बढ़ने के साथ जब शरीर ओवरहीट होने लगता है तो जानलेवा स्थिति बनती है. हालांकि, इसमें कई और फैक्टर्स का भी योगदान होता है. जैसे- शरीर में पानी की कमी.शरीर खुद को ठंडा रखने के लिए ज्यादा पसीना निकालता है. अगर पानी और नमक (इलेक्ट्रोलाइट्स) की भरपाई नहीं होती, तो डिहाइड्रेशन हो जाता है, जिससे चक्कर, बेहोशी और मौत तक हो सकती है.
फिलहाल, बहुत ज्यादा गर्मी दिल, दिमाग और किडनी पर दबाव को बढ़ाने का काम करती है. जब यह दबाव अधिक बढ़ जाता है तो शरीर के कई अंग फेल हो सकते हैं. हीटवेव के दौरान दिल तेजी से काम करता है और ब्लड प्रेशर बिगड़ सकता है. इससे हार्ट अटैक या ब्रेन स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता हैखासकर बुजुर्गों में.


















