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Rivers Originate From Himalayas: हिमालय सिर्फ एक पर्वतमाला नहीं, यह एशिया का वाटर टॉवर कहलाता है जहां से दर्जनभर से अधिक नदियों का जन्म हुआ. इन नदियों ने आगे चलकर सैकड़ों सहयोगी नदियों को जन्म दिया, जो बिजली पैदा करने, खेती करने और लोगों की प्यास बुझाने का काम कर रही हैं. जानिए, हिमालय से कितनी नदियां निकलीं.
हिमालय से दर्जनभर से अधिक नदियां निकलती हैं जो आगे चलकर कई सहायक नदियों में बदलती हैं.
हिमालय की गिनती सिर्फ दुनिया की विशाल पर्वमालाओं में ही नहीं की जाती, इसे जीवनदायनी नदियों के उद्गम के लिए भी जाना जाता है. यहां से दर्जनभर से अधिक नदियां निकलती हैं और कई राज्यों में पहुंचकर लोगों की प्यास बुझाती हैं. खेती-किसानी के काम आती है. देश की अर्थव्यवस्था को बढ़ाने में अहम भूमिका निभाती है. यही वजह है कि हिमालय को एशिया का वाटर टॉवर भी कहते हैं.
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भूगोल विशेषज्ञाें के मुताबिक, हिमालय से कई नदियां निकलती हैं इन्हें तीन हिस्सों में बांटकर समझा जा सकता है. सिंधु नदी तंत्र (Indus River), गंगा नदी तंत्र और ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र . इन तीनों हिस्सों के तहत 19 प्रमुख नदियां निकलती हैंं. वहीं इनसे निकलने वाली सहायक नदियों की संख्या सैकड़ों में हैं.
हिमालय से कौन-कौन सी नदियां निकलती हैं?
सिंधु नदी पश्चिमी हिमालय से निकलती है. इसकी प्रमुख नदियों में झेलन, चिनाब, रावी, ब्यास और सतलज शामिल हैं. ये नदियां भारत और पाकिस्तान के बड़े हिस्से की प्यास बुझाती हैं और अनाज की पैदावार के लिए अमृत का काम करती हैं.
हिमालय को एशिया का वाटर टॉवर कहते हैं.
गंगा नदी तंत्र से गंगा, यमुना, गंडक, कोसी, रामगंगा, अलकनंदा, भागीरथी निकलती हैं. ये हिमलय के अलग-अलग हिस्सों से निकलती है. गंगा का मैदानी हिस्सा दुनिया में सबसे उपजाऊ क्षेत्रों में गिना जाता है. यह हिस्सा करोड़ों लोगों की कृषि और जल संसाधन की जरूरतों को पूरा करता है.
उत्तराखंड का देवप्रयाग जहां अलकनंदा और भागीरथी मिलती है.
असम वाटर रिसोर्सेज की वेबसाइट के मुताबिक, हिमालय से निकलने वाली ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत से होकर भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम में प्रवेश करती है. यह नदी अपने फ्लो के लिए जानी जाती है. इसकी कई सहायक नदियां पूर्वोत्तर भारत की लाइफलाइन कही जाती हैं.
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ब्रह्मपुत्र नदी.
इन्हें क्यों कहते हैं जीवनदायनी?
वहीं, हिमालय से निकलने वाली नदियां केवल पानी की कमी ही नहीं पूरी करतीं बल्कि ये बिजली उत्पादन, सिंचाई, मत्स्य पालन और परिवहन में भी बहुत बड़ी भूमिका निभाती हैं. संस्कृति और धार्मिक परंपराओं में इन्हें खास स्थान दिया गया है. गंगा और यमुना को बेहद पवित्र नदी में गिना गया है. इसके किनारे कई तीर्थस्थल बसे हैं.
हालांकि जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और ग्लेशियर के पिछले के कारण हिमालयी नदियां चुनौतियों का सामना कर रही हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर इन नदियों के बारे में नहीं सोचा गया है तो भविष्य में बहुत बड़ा जलसंकट गहरा सकता है.
दरअसल, गंगा, यमुना, ब्रह्मपुत्र जैसी हिमालयी नदियां पूरे साल पानी देने के लिए जानी जाती हैं. यही वजह है कि उत्तर भारत के विशाल मैदानों में खेती संभव हो पाती है. गेहूं, चावल, गन्ना और दालों की खेती इन्हीं नदियों पर निर्भर करती है.
फिलहाल, करोड़ों लोगों को पीने का पानी हिमालयी नदियों से मिलता है. शहरों और गांवों की जलापूर्ति का बड़ा हिस्सा इन्हीं पर आधारित है. ये अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लेकर आती हैं. और फसलों की पैदावार को बढ़ाने का काम करती हैं. यही नहीं, पहाड़ों से तेज गति से बहने वाली नदियां बिजली बनाने के लिए बेहद उपयोगी होती हैं. कई बड़े बांध और हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट इन नदियों पर बने हैं, जिससे ऊर्जा मिलती है.


















