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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रसोई को सिर्फ खाना पकाने की एक जगह माना जाता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारी हेल्थ को ठीक रखने की शुरुआत यही से होती है. जानें उन गलतियों के बारे में जो हमें बीमार बनाती है. फूड सेफ्टी पर एक्सपर्ट की राय भी जानें.
सुबह की चाय, नाश्ता या खाना हो, बच्चों के लिए टिफिन तैयार करना हो या रात के खाने की तैयारी, हमारी जिंदगी का एक बड़ा समय रसोई के इर्द-गिर्द ही घूमता है. हम सभी ताजा, स्वच्छ सब्जियां खरीदने पर ध्यान देते हैं, मसालों की गुणवत्ता पर ध्यान देते हैं और कोशिश करते हैं कि खाना साफ-सुथरा बने. लेकिन क्या कभी आपने यह सोचा है कि जिस बर्तन में खाना पक रहा है या जिस डिब्बे में उसे सुरक्षित रखा जा रहा है, वह कितना सुरक्षित है? वह आपकी सेहत पर क्या असर डाल सकता है?
सुनने में यह बात थोड़ी अजीब लग सकती है, लेकिन वर्तमान समय में दुनिया भर के स्वास्थ्य विशेषज्ञ इसी मुद्दे पर गंभीरता से बात और विमर्श कर रहे हैं. इसका असर सिर्फ स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता बल्कि अर्थव्यवस्था पर भी पड़ता है.
इलाज का खर्च, कामकाज में नुकसान और उत्पादकता में कमी की वजह से दुनिया को हर साल करीब 310 अरब अमेरिकी डॉलर का आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है. यही कारण है कि अब सरकारें और स्वास्थ्य एजेंसियां सिर्फ इस बात पर ध्यान नहीं दे रहीं कि खाना खराब क्यों हुआ, बल्कि इस पर भी ध्यान दे रही हैं कि उसे खराब होने से पहले कैसे बचाया जाए.
भारत में यह चर्चा और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि यहां फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री बहुत तेजी से बढ़ रही है. ऑनलाइन फूड डिलीवरी, पैकेज्ड फूड और रेस्टोरेंट कारोबार का विस्तार लगातार हो रहा है. ऐसे में भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने भी खाद्य सुरक्षा के नियमों को मजबूत किया है और स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाई है. लेकिन एक पहलू ऐसा भी है, जिस पर बहुत कम बात होती है. वह है हमारी रसोई और उसमें इस्तेमाल होने वाले बर्तन!
ये गलतियां बना रही बीमार
रसोई की सुरक्षा सिर्फ बर्तनों तक सीमित नहीं है. हमारी रोजमर्रा की कुछ छोटी-छोटी आदतें भी भोजन को दूषित कर सकती हैं. जिस चॉपिंग बोर्ड पर कच्ची सब्जियां या मांस काटा जाता है, यदि उसे अच्छी तरह साफ किए बिना दूसरी चीजें काटी जाएं तो उस पर मौजूद बैक्टीरिया भोजन में पहुंच सकते हैं.
इसी तरह, बर्तन साफ करने वाला स्पंज या डिशवॉश ब्रश भी नमी के कारण कीटाणुओं का घर बन सकता है, यदि उसे समय-समय पर बदला या ठीक से साफ न किया जाए.
एक ही तेल को बार-बार गर्म करके इस्तेमाल करना या फल और सब्जियों को बिना अच्छी तरह धोए पकाना भी खाद्य सुरक्षा से जुड़ी ऐसी गलतियां हैं, जिन पर अक्सर हमारा ध्यान नहीं जाता.
क्या कहते हैं एक्सपर्ट
जयपुर के अपोलो स्पेक्ट्रा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. रोहित शर्मा कहते हैं कि आज असुरक्षित भोजन का मतलब सिर्फ खराब सामग्री या गंदगी नहीं रह गयी है. यह उस पूरे वातावरण से जुड़ा मामला है, जहां खाना बनाया, रखा और परोसा जाता है. उनके मुताबिक भारत जैसे देश में, जहां तेज आंच पर मसालों के साथ खाना पकाया जाता है, वहां रसोई के बर्तनों की गुणवत्ता और उनकी सफाई बहुत महत्वपूर्ण हो जाती है.
वहीं, भारतीय रसोई की अपनी चुनौतियां हैं. यहां बर्तन लगातार गर्मी, नमी, तेल, नमक और इमली, टमाटर, दही या नींबू जैसे अम्लीय पदार्थों के संपर्क में रहते हैं. लंबे समय तक इस्तेमाल होने पर कमजोर या खराब गुणवत्ता वाली सामग्री खराब हो सकती है और उसकी सतह पर बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ सकता है.
स्टेनलेस स्टील है बेस्ट ऑप्शन
दरअसल, दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल कहते हैं कि अब दुनिया भर में फूड सेफ्टी को विज्ञान के नजरिए से देखा जा रहा है. इसलिए भोजन के संपर्क में आने वाली सतहों और बर्तनों की गुणवत्ता पर भी ध्यान दिया जा रहा है. उनका मानना है कि स्टेनलेस स्टील इस मामले में बेहतर विकल्प है, क्योंकि यह मजबूत होता है, जल्दी खराब नहीं होता और इसकी सफाई भी आसान होती है.
घर से करनी होगी शुरुआत
फिलहाल, खाना को सिर्फ ये समझकर नहीं खाना चाहिए कि ये सिर्फ पेट भरने का जरिया है. ये हमारे परिवार की सेहत की बुनियाद भी है. इसलिए फूड सेफ्टी को केवल सरकारी नियमों या फैक्ट्रियों तक सीमित नहीं माना जा सकता. इसकी शुरुआत हमारे अपने घर से होती है.


















