Health Tips: कुछ लोगों को देखकर पहली ही मुलाकात में क्यों होने लगती है चिढ़? ये है बड़ी वजह

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Japanese Research: कई बार पहली बार मिलने पर किसी इंसान को देखकर ही चिढ़ होने लगती है, आज आपको जापानी रिसर्च में आई बड़ी वजह के बारे में बताते हैं.

Japanese Research: कई बार हम सभी लोगों के साथ ऐसा होता है कि किसी व्यक्ति से पहली बार हम मिल रहे हैं और फिर उनको देखकर ही अजीब-सी चिढ़ या असहजता महसूस होना शुरू हो जाती है, लेकिन इसकी वजह भी हमें समझ में नहीं आती है आखिर ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे का क्या कारण है. सामने वाले ने हमारे साथ कुछ गलत भी नहीं किया होता है फिर भी हमें उस इंसान को देखकर एक अजीब सी चिड़ होने लग जाती है. नकारात्मक चीजें उसके लिए हमारे मन में चलती रहती है. लोगों को यही समझ में नहीं आता है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? आपको बता दें हाल ही में जापानी वैज्ञानिकों की एक रिसर्च में इस सवाल का जवाब दिया है. अगर आप भी जानना चाहते हैं, कि आखिर आपके साथ ऐसा क्यों होता है, तो आइए आपको बताते हैं. आइए जान लीजिए.



पहली मुलाकात में ही होने लगती है चिढ़

वहीं, हम सभी लोगों के साथ में कभी न कभी ऐसा होता ही है कि किसी इंसान को पहली बार देखकर ही काफी ज्यादा चिड़चिड़ापन महसूस होता है. विशेषज्ञों का इस पर कहना है कि इंसान का दिमाग कुछ ही सेकंड में ये पता लगा लेता है कि उस इंसान का नेचर कैसे हो सकता है.हाव-भाव, आवाज, चलने के तरीके से हमारा दिमाग सब पता लगा लेता है.

japantimes के अनुसार, टोक्यो विश्वविद्यालय (University of Tokyo) के शोधकर्ताओं ने शुक्रवार को खुलासा किया कि उन्होंने एक तंत्रिका तंत्र की पहचान की है, जिससे मस्तिष्क को किसी भी चीज के बारे में पहले से ही पता लग जाता है. यह रिसर्च चूहों में किया गया, और ये देखा कि जब कोई जानवर अचानक चूहों के प्रति आक्रामक हो जाता है, तो दूसरे चूहे उससे दूर रहने लगते हैं. प्रोफेसर तेरुहिरो ओकुयामा और उनकी टीम ने सबसे पहले परीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले चूहों को और चूहों के संपर्क में लाया गया है और फिर इसके बाद शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक तकनीकों का उपयोग करके एक चूहे को आक्रामकता वाला बना दिया. जिसके कारण वह बार-बार परीक्षण के लिए इस्तेमाल होने वाले जानवरों पर हमला भी काफी ज्यादा करने लगा था. चूहों की एक-दूसरे के साथ लड़ाई के बाद दोनों चूहों को अलग-अलग कर दिया और वो सभी बाद में सबके साथ अच्छे से रहने लगे. वेंट्रल CA1 हिप्पोकैम्पस का एक खास क्षेत्र है, जहां सामाजिक स्मृति को बनाया जाता है. ये दिमाग को ये बताता है कि किस इंसान से कैसे आपको रहना है.



दरअसल, शोधकर्ताओं ने ऑप्टोजेनेटिक्स नामक तकनीक का उपयोग किया है, उसमें हमारे दिमाग को नियंत्रित किया जाता है. एक और उपयोग किया है एक खास चूहे की स्मृति से जुड़ी कोशिकाओं और डर वाली कोशिकाओं से जोड़ दिया और उसमें से 1 चूहे को इनके साथ में रख दिया और ये देखा कि वो चूहा उसे अब नापसंद करने लगा है. इस अध्ययन में न्यूक्लियस एक्यूम्बेन्स भी है. हिप्पोकैम्पस-एमीग्डाला सर्किट ये इंसान की स्मृति में नकारात्मक चीजें जोड़ता है और वहीं एमीग्डाला से न्यूक्लियस एक्यूम्बेन्स तक जाने वाली चीजों से बचाव भी करता है.

फिलहाल, वैज्ञानिकों ने इस रिसर्च में ये पाया है कि दिमाग के न्यूक्लियस एक्यूम्बेन्स में होने वाले बदलाव एक इंसान के लिए नहीं बल्कि लोगों से मिलने-जुलने की इच्छा से भी जुड़ा हो सकता है. एक बुरा अनुभव धीरे-धीरे सामाजिक दूरी को भी काफी हद तक बढ़ा देता है. वैज्ञानिकों ने यह जानवरों पर किया गया था, इसलिए ये पूरी तरह से माना नहीं जा सकता है कि इंसान भी ऐसा महसूस कर सकता है या उसका दिमाग भी इस तरह से सोच सकता है या पता ये केवल चूहे पर ही होता हो इंसान पर नहीं या ये भी हो सकता है कि ये इंसान भी कर सकता है.

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