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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान ने अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद अमेरिका और इजरायल के खिलाफ बड़ा सैन्य हमला किया है। ईरान ने कहा है कि उसने मिडिल ईस्ट में मौजूद अमेरिकी ठिकानों और जहाजों को निशाना बनाया है और दुश्मनों के लिए नरक के दरवाजे खुले रखे जाएंगे। इस हमले के बाद पूरे इलाके में तनाव और बढ़ गया है।
ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक दुबई और कतर की राजधानी दोहा में तेज धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यूएई और कतर अमेरिका के सहयोगी देश हैं और ईरान का कहना है कि यह हमला पड़ोसी देशों को चेतावनी देने के लिए किया गया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि ‘ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4’ की पांचवीं लहर में जेबेल अली बंदरगाह पर अमेरिकी जहाजों के लिए गोला-बारूद ले जा रहे एक जहाज को चार ड्रोन से निशाना बनाया गया, जिससे उसे भारी नुकसान हुआ।
अमेरिकी ठिकानों पर हमले का दावा
वहीं, आईआरजीसी के अनुसार कुवैत के अब्दुल्ला मुबारक इलाके में स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे पर 4 बैलिस्टिक मिसाइल और 12 ड्रोन दागे गए, जिससे ढांचा पूरी तरह नष्ट हो गया और कई अमेरिकी सैनिक मारे गए या घायल हुए।
साथ ही, भारतीय महासागर में अमेरिकी जहाजों के लिए ईंधन ले जा रहे एमएसटी क्लास सपोर्ट शिप को ईरान की कद्र-380 मिसाइलों से निशाना बनाया गया। आईआरजीसी ने कहा कि उसकी नौसेना और वायुसेना दुश्मनों के खिलाफ कार्रवाई जारी रखेंगी।
मिली जानकारी के मुताबिक, ईरान ने दुबई एयरपोर्ट पर भी हमला करने का दावा किया है। दुबई एयरपोर्ट, जो दुनिया के सबसे व्यस्त हवाईअड्डों में गिना जाता है, को संघर्ष शुरू होने के बाद बंद कर दिया गया है। इससे पहले पाम जुमेराह और बुर्ज अल अरब होटल को भी निशाना बनाए जाने की बात कही गई है।
ऑपरेशन एपिक फ्यूरी
वहीं, इससे पहले अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर बड़े हवाई हमले किए थे। इस मिशन को ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ नाम दिया गया था। हमलों में राजधानी तेहरान समेत कई बड़े शहरों को निशाना बनाया गया।
दरअसल, इन हमलों में 1989 से ईरान के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद आईआरजीसी ने अमेरिका और इजरायल को कड़ी सजा देने की कसम खाई और इसे इतिहास का सबसे बड़ा और कठोर हमला बताया।
फिलहाल, संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने तुरंत संघर्ष रोकने की अपील की है और कहा है कि इससे वैश्विक सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। यूरोपीय संघ और रूस ने भी हालात को शांत करने की मांग की है।










