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दिल्ली। केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच ने भारत–अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में गुरुवार, 12 फरवरी को देशव्यापी ‘भारत बंद’ का आह्वान किया है। दूसरी ओर देशभर के बैंक कर्मचारी संगठनों ने भी आज ही 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी हड़ताल बुलाई है। ऑल इंडिया बैंक एंप्लॉइज एसोसिएशन (AIBEA), ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन (AIBOA) और बैंक एंप्लॉइज फेडरेशन ऑफ इंडिया (BEFI) ने अपने सदस्यों से इस हड़ताल में शामिल होने का आह्वान किया है। इन संगठनों के साथ 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनें (CTUs) भी हड़ताल में भाग लेंगी।
वहीं, सबसे पहले बात भारत बंद की करें तो यह बंद इंटक, एटक, एचएमएस, सीटू, एआईयूटीयूसी, टीयूसीसी, सेवा, एआईसीसीटीयू, एलपीएफ और यूटीयूसी सहित 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों ने बुलाया है। इन संगठनों का दावा है कि देश के 600 से अधिक जिलों में इस बंद का असर देखने को मिलेगा। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े करीब 30 करोड़ श्रमिक इस हड़ताल में हिस्सा लेने की तैयारी में हैं। यूनियनों के अनुसार, बैंकिंग सेवाओं, परिवहन और अन्य प्रमुख सार्वजनिक सेवाओं में व्यापक व्यवधान हो सकता है।
दरअसल, 12 फरवरी को होने वाले भारत बंद को लेकर बेंगलुरु में आम जनता में भ्रम की स्थिति है। लोग जानना चाहते हैं कि बैंक, स्कूल, सरकारी दफ्तर और सार्वजनिक परिवहन जैसी दैनिक सेवाएं बंद रहेंगी या नहीं। ट्रेड यूनियनों का कहना है कि नई नीतियां मजदूरों की कीमत पर सिर्फ उद्योगपतियों को फायदा पहुंचा रही हैं। यूनियन नेताओं ने चेतावनी दी है कि नए श्रम कानूनों से नौकरियों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी, हायरिंग और फायरिंग के नियम आसान होंगे, सामाजिक सुरक्षा घटेगी और अनौपचारिक क्षेत्र के लाखों मजदूर कानूनी दायरे से बाहर हो जाएंगे।
फिलहाल, यूनियनें सरकार द्वारा नवंबर में लागू किए गए चार नए लेबर लॉ के खिलाफ प्रदर्शन कर रही हैं, जिन्होंने 29 मौजूदा श्रम कानूनों की जगह ली है। इन संगठनों ने ‘मजदूर वर्ग पर बढ़ते हमलों’ को लेकर चिंता जताई है। एक पत्र में यूनियनों ने कहा, “प्रस्तावित श्रम संहिताएं पूरी तरह से मजदूरों के खिलाफ हैं और ट्रेड यूनियन रजिस्ट्रेशन के लिए सख्त शर्तें रखी गई हैं।” लंबे समय से ये संघ वर्क लाइफ बैलेंस और 5 डे वर्किंग की मांग भी करते आ रहे हैं।










