Hindi Paheliyan : सुबह को – हरी होती है, दोपहर को – काली होती है, शाम को – नीली होती है, रात को – सफेद होती है

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Hindi-paheliyan/सोशल मीडिया और इंटरनेट की दुनिया में इन दिनों एक अजीबोगरीब पहेली तेजी से वायरल हो रही है। इस पहेली ने न केवल आम जनता बल्कि बड़े-बड़े विद्वानों को भी सोच में डाल दिया है।

अक्सर व्हाट्सएप ग्रुप्स और फेसबुक पर लोग एक-दूसरे से यह सवाल पूछते नजर आते हैं कि आखिर वह क्या है जो सुबह को हरी, दोपहर को काली, शाम को नीली और रात को सफेद होती है? इस पहेली को लेकर कई तरह की अफवाहें और भ्रामक जानकारियां भी फैलाई जा रही हैं।

कुछ लोग इसे किसी रहस्यमयी सरकारी योजना या वैज्ञानिक खोज से जोड़कर देख रहे हैं। आज के इस विशेष लेख में हम इस वायरल दावे की सच्चाई और इसके पीछे के वैज्ञानिक व तार्किक कारणों का विश्लेषण करेंगे।

Paheliya: आखिर क्या है इस पहेली का असली जवाब?


जब हम इस पहेली “सुबह को हरी, दोपहर को काली, शाम को नीली और रात को सफेद” की बात करते हैं, तो इसका उत्तर किसी सरकारी योजना में नहीं बल्कि प्रकृति और जीव विज्ञान में छिपा है। इंटरनेट पर मौजूद विशेषज्ञों और सामान्य ज्ञान के जानकारों के अनुसार, इसके मुख्य रूप से दो जवाब सामने आते हैं: शैवाल (Algae) और बिल्ली की आंखें।

शैवाल या काई जिसे हम अक्सर पानी के पास देखते हैं, वह सूर्य के प्रकाश के परावर्तन और फोटोसिंथेसिस की प्रक्रिया के कारण अलग-अलग समय पर अलग रंगों में दिखाई दे सकती है। वहीं कुछ पहेलियों के शौकीन इसका उत्तर बिल्ली की आंखों को मानते हैं, क्योंकि प्रकाश की तीव्रता के हिसाब से उनकी पुतलियों का रंग और आकार बदलता रहता है।

पहेली के पीछे का वैज्ञानिक तर्क और तथ्य

इस पहेली के जवाब के पीछे प्रकाश का प्रकीर्णन (Scattering of Light) एक बड़ा कारण माना जाता है। जब सूर्य की किरणें सुबह के समय वायुमंडल में प्रवेश करती हैं, तो प्रकाश के अलग-अलग रंगों का बिखराव होता है।

वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो शैवाल (Algae) में मौजूद क्लोरोफिल सुबह के समय उसे चमकदार हरा दिखाता है। जैसे-जैसे सूरज सिर पर आता है (दोपहर में), प्रकाश की तीव्रता बढ़ जाती है जिससे वह गहरा या काला प्रतीत हो सकता है।

शाम के वक्त जब सूरज ढल रहा होता है, तो नीले रंग की तरंगदैर्ध्य (wavelength) के कारण वातावरण और पानी में मौजूद चीजें नीली झलक देती हैं। रात के अंधेरे में या चांदनी रात में यही चीजें सफेद या चांदी जैसी चमकती दिखाई देती हैं।


पहेली की मुख्य विशेषताएं

यह पहेली दिमागी कसरत (Brain Exercise) के लिए बहुत लोकप्रिय है।
इसके उत्तर अलग-अलग संदर्भों में अलग हो सकते हैं।
इंटरनेट वायरल न्यूज़ के अनुसार, इसे अक्सर परीक्षाओं के ट्रिकी सवालों के तौर पर पेश किया जाता है।
इसका किसी भी सरकारी सब्सिडी या सरकारी कल्याणकारी योजना से कोई संबंध नहीं है।
यह लोगों की अवलोकन क्षमता (Observation Skill) को परखने का एक तरीका है।
पहेली का सामाजिक प्रभाव
सोशल मीडिया पर इस तरह के सवाल लोगों के बीच संवाद बढ़ाने का काम करते हैं। जब कोई व्यक्ति ऐसी पहेली पूछता है, तो अन्य लोग उस पर अपनी प्रतिक्रिया देते हैं, जिससे एक डिजिटल कम्युनिटी इंगेजमेंट पैदा होता है।

हालांकि, हमें यह समझना होगा कि हर वायरल होने वाली चीज सच नहीं होती। इस पहेली का उद्देश्य केवल मनोरंजन और थोड़ा बहुत वैज्ञानिक ज्ञान साझा करना है।

भविष्य में अगर आप कहीं भी “सुबह को हरी, दोपहर को काली” जैसा संदेश देखें, तो समझ जाएं कि यह आपकी बुद्धिमत्ता को परखने का एक पुराना और मजेदार तरीका मात्र है।

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