Hindi Paheliyan : ऐसा कौन सा है शब्द जिसे हम लिख सकते हैं लेकिन पढ़ नहीं सकते?

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Hindi Paheliyan; दुनिया में कई ऐसी दिमागी पहेलियां (Brain Riddles) होती हैं जो हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। अक्सर ऐसी पहेलियां इंटरनेट, सोशल मीडिया और बच्चों की किताबों में देखने को मिलती हैं जो न केवल मनोरंजन करती हैं बल्कि हमारे आईक्यू लेवल (IQ Level) को भी बढ़ाती हैं। इन्हीं में से एक सवाल आज कल बहुत वायरल हो रहा है कि “ऐसा कौन सा शब्द है जिसे हम लिख सकते हैं लेकिन पढ़ नहीं सकते?”।

यह सवाल सुनने में जितना अजीब लगता है, इसका जवाब उतना ही सरल और लॉजिकल (Logical) है। लोग अक्सर इसका उत्तर खोजने के लिए शब्दों के मायाजाल में फंस जाते हैं, लेकिन असल में इसका उत्तर हमारे सामान्य बोलचाल में ही छिपा है। इस लेख में हम इस रोचक पहेली का गहराई से विश्लेषण करेंगे और जानेंगे कि वह रहस्यमयी शब्द (Mysterious Word) कौन सा है।

न्यूज़ और पहेलियों की इस सीरीज में आज हम इसी खास विषय पर चर्चा करने जा रहे हैं। यदि आप भी अपनी दिमागी कसरत करना चाहते हैं और इस पहेली का सही जवाब जानना चाहते हैं, तो इस आर्टिकल को अंत तक जरूर पढ़ें। हम आपको न केवल इसका जवाब देंगे बल्कि इसके पीछे के रोचक तथ्य (Interesting Facts) भी साझा करेंगे।

वह जादुई शब्द जिसे पढ़ना नामुमकिन है

जब हम इस सवाल को गौर से देखते हैं कि “ऐसा कौन सा शब्द है जिसे हम लिख तो सकते हैं लेकिन पढ़ नहीं सकते?”, तो दिमाग में कई तरह के ख्याल आते हैं। कुछ लोग सोचते हैं कि शायद यह किसी ऐसी भाषा का शब्द है जो अब विलुप्त हो चुकी है, या फिर यह कोई डॉक्टर की लिखावट (Doctor’s Handwriting) है जिसे सिर्फ केमिस्ट ही समझ सकता है। लेकिन पहेली की दुनिया में जवाब इतना पेचीदा नहीं होता।

इस पहेली का असली और सटीक जवाब है— “नहीं”। अब आप सोच रहे होंगे कि “नहीं” शब्द को तो हम पढ़ सकते हैं, तो फिर यह उत्तर कैसे हुआ? दरअसल, जब आपसे कोई यह सवाल पूछता है, तो वह आपसे पूछ रहा होता है कि “क्या आप ऐसा शब्द जानते हैं जिसे हम लिख सकते हैं पर पढ़ नहीं सकते?”। और जब आप जवाब देते हैं “नहीं”, तो आप उस शब्द का नाम भी ले रहे होते हैं और अपनी असमर्थता भी जता रहे होते हैं।

यह एक शब्दों का खेल (Wordplay) है। व्याकरण की दृष्टि से देखें तो “नहीं” एक ऐसा शब्द है जो इस पहेली के संदर्भ में खुद को ही परिभाषित कर देता है। कई लोग इसका उत्तर “काला अक्षर” या “अंधेरे में लिखा शब्द” भी देते हैं, लेकिन लॉजिक के हिसाब से “नहीं” सबसे बेहतरीन उत्तर माना जाता है।

पहेलियों का महत्व और दिमागी विकास

आजकल के डिजिटल युग में पहेलियाँ (Riddles) केवल बच्चों का खेल नहीं रह गई हैं। बड़े-बड़े प्रतियोगी परीक्षाओं (Competitive Exams) में भी इस तरह के लॉजिकल सवाल पूछे जाते हैं ताकि कैंडिडेट की क्रिटिकल थिंकिंग (Critical Thinking) जांची जा सके। ऐसे सवाल हमारे दिमाग के न्यूरॉन्स को सक्रिय करते हैं और हमें लीक से हटकर सोचने (Out of the box thinking) के लिए प्रेरित करते हैं।

पहेलियों का इतिहास बहुत पुराना है। प्राचीन काल में राजा-महाराजा भी अपनी बुद्धिमानी दिखाने के लिए एक-दूसरे को पेचीदा सवाल भेजा करते थे। यह बौद्धिक मनोरंजन (Intellectual Entertainment) का एक बेहतरीन साधन है। जब हम “नहीं” जैसे शब्दों के पीछे का लॉजिक समझते हैं, तो हमारी समझने की क्षमता में सुधार होता है।

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इसके अलावा, कुछ लोग इस पहेली का उत्तर “हवा” या “परछाई” भी मानते हैं, क्योंकि इन्हें महसूस किया जा सकता है, लिखा जा सकता है पर भौतिक रूप से पढ़ा नहीं जा सकता। हालांकि, पहेली के शौकीन हमेशा “नहीं” को ही प्राथमिकता देते हैं क्योंकि यह सवाल के साथ एक सटीक विरोधाभास पैदा करता है।

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