Hindu Nav Varsh 2026 : हिंदू नववर्ष क्यों मनाया जाता है? क्या है इसका वैज्ञानिक और धार्मिक महत्व..आईए जानें

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Hindu Nav Varsh 2026: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू नववर्ष का विशेष महत्व है. इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत के कई राज्यों में उगादी का त्योहार मनाया जाता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि हिंदू नववर्ष क्यों मनाया जाता है? साथ ही जानते हैं इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण.

Hindu Nav Varsh 2026: हर साल चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होती है. इस साल हिंदू नववर्ष कल यानी 19 मार्च से शुरू हो रहा है. कल गुरुवार का दिन है, इसलिए इस नववर्ष के राजा देवताओं के गुरु बृहस्पति होंगे. वहीं मंत्री का पद ग्रहों के सेनापति मंगल के पास होगा. ये ‘रौद्र संवत्सर’ होगा और विक्रम संवत 2083 होगा. ये नववर्ष कल से शुरू होकर 07 अप्रैल 2027 तक चलेगा.

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, हिंदू नववर्ष का विशेष महत्व है. इसी दिन महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा और दक्षिण भारत के कई राज्यों में उगादी का त्योहार मनाया जाता है. इस दौरान लोग गुड़, मिश्री व कच्चे आम के साथ नीम की पत्तियां खाते हैं. महाराष्ट्र में गुड़ी पड़वा से नववर्ष शुरू होता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि हिंदू नववर्ष क्यों मनाया जाता है? साथ ही जानते हैं इसका धार्मिक और वैज्ञानिक कारण.

नववर्ष मनाने का धार्मिक कारण

पौराणिक कथाओं के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन से ही ब्रह्मा जी ने संसार की रचना प्रारंभ की थी. इसी दिन देवी दुर्गा का अवतरण हुआ था. इसी माह में चैत्र नवरात्रि भी मनाई जाती है. इस दौरान देवी के नौ स्वरूपों का पूजन और व्रत किया जाता है. चैत्र माह बहुत विशेष है. माना जाता है कि उज्जैन के राजा विक्रमादित्य ने इसी दिन राष्ट्र को शकों से मुक्त कराकर विक्रम संवत शुरू किया था. इन्हीं सब कारणों की वजह से चैत्र शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि के दिन हिंदू नववर्ष मनाया जाता है.

नववर्ष मनाने का वैज्ञानिक कारण

चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि का दिन वैज्ञानिक और खगोलीय रूप से नवसृजन का समय माना जाता है. हिंदू नववर्ष वंसत ऋतु में शुरू होता है. यह सर्दी के अंत और गर्मी की शुरुआत का समय है, जो शरीर को ये संदेश देता है कि को मौसम में बदलाव जरूरी है. पृथ्वी के झुकाव के कारण हिंदू नववर्ष से शुरू होने वाली 21 दिवसीय अवधि के दौरान उत्तरी गोलार्ध को सूर्य की अधिकांश ऊर्जा प्राप्त होती है.

नववर्ष का स्वागत रात में नहीं किया जाता. इसका स्वागत सूर्य की पहली किरण के अंग्रेजी कैलेंडर में नववर्ष की शुरुआत रात 12 बजे मानी जाती है, जो वैज्ञानिक नहीं है. दिन दिन और रात को मिलाकर ही एक दिन पूरा होता है. चैत्र अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च और अप्रैल के बीच होता है. 21 मार्च को पृथ्वी सूर्य के चारों ओर एक चक्कर पूरा करती है, और दिन और रात की लंबाई बराबर होती है.

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