Surya Grahan 2026: सूर्य ग्रहण और सावन अमावस्या का दुर्लभ संयोग..फिर कैसे होगा स्नान-दान? जानें सही समय और नियम

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Surya Grahan 2026 Sawan Amavasya: सावन अमावस्या पर सूर्य ग्रहण का दुर्लभ संयोग! जानिए भारत में ग्रहण दिखेगा या नहीं, साथ ही स्नान-दान और तर्पण के सही नियम.

Surya Grahan 2026: हिंदू पंचांग और खगोलीय दृष्टि से इस साल सावन महीने की अमावस्या तिथि पर एक बेहद दुर्लभ और अद्भुत संयोग बनने जा रहा है. इसी दिन साल का दूसरा सूर्य ग्रहण भी लगने वाला है. सनातन धर्म में सावन अमावस्या का विशेष महत्व. इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, पितरों के लिए तर्पण और भगवान शिव की पूजा का विधान है लेकिन जब इसी पावन तिथि पर सूर्य ग्रहण का साया पड़ रहा हो, तो लोगों के मन में यह सवाल उठना जरूरी है कि क्या ग्रहण के कारण स्नान-दान पर कोई रोक लगेगी? सूतक काल का क्या होगा? आइए जानते हैं ग्रहण का सटीक समय और स्नान-दान के सही नियम.

सूर्य ग्रहण 2026: तारीख और सटीक समय
ज्योतिषीय और खगोलीय गणनाओं के अनुसार, साल का यह महत्वपूर्ण सूर्य ग्रहण 12 अगस्त 2026 (बुधवार) को लगेगा. इसी दिन सावन मास की अमावस्या भी है.

ग्रहण शुरू होने का समय: भारतीय समयानुसार (IST) 12 अगस्त की रात लगभग 08 बजकर 48 मिनट से यह ग्रहण आरंभ होगा.

ग्रहण समाप्त होने का समय: मध्यरात्रि के बाद (13 अगस्त की सुबह) लगभग 01 बजकर 52 मिनट पर ग्रहण समाप्त होगा.

क्या भारत में दिखेगा ग्रहण और लगेगा सूतक?

सनातन धर्म के नियमों के अनुसार, किसी भी ग्रहण का सूतक काल और उसके धार्मिक नियम उसी स्थान पर मान्य होते हैं, जहां वह ग्रहण दिखाई देता है. चूंकि यह सूर्य ग्रहण भारतीय समयानुसार रात के वक्त लग रहा है, इसलिए यह भारत में दृश्यमान नहीं होगा. यह ग्रहण मुख्य रूप से ग्रीनलैंड, आइसलैंड, स्पेन और रूस के कुछ हिस्सों में नजर आएगा. भारत में दृश्यता न होने के कारण यहाँ सूतक काल मान्य नहीं होगा और मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ पर रोक जैसे कोई भी नियम लागू नहीं होंगे.

सावन अमावस्या पर कैसे और कब करें स्नान-दान?
भारत में ग्रहण और सूतक का कोई प्रभाव नहीं होने के कारण, श्रद्धालु बिना किसी संशय के सावन अमावस्या के अपने सभी पारंपरिक कार्य कर सकते हैं. स्नान, दान और तर्पण के नियम इस प्रकार रहेंगे.

स्नान का सही समय: 12 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त से ही स्नान-दान शुरू किया जा सकता है. आप अपनी सुविधानुसार सुबह के समय गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान कर सकते हैं. घर पर नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ रहेगा.

पितृ तर्पण के नियम: अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित है. स्नान के बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जल में काले तिल और कुशा मिलाकर पितरों का तर्पण करें. सूतक न होने से इस कार्य में कोई बाधा नहीं है.

शिव पूजा और जलाभिषेक: सावन का महीना होने के कारण शिव पूजा का खास महत्व है. दिन के समय किसी भी शुभ मुहूर्त में शिव मंदिर जाकर शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और भांग अर्पित करें.

दान-दक्षिणा: सावन अमावस्या पर स्नान और पूजा के बाद सामर्थ्य अनुसार गरीबों को अन्न, वस्त्र या फल का दान करना बेहद पुण्यकारी माना जाता है.

12 अगस्त 2026 को पड़ने वाले इस दुर्लभ संयोग से भ्रमित होने की आवश्यकता नहीं है. ग्रहण भारत में रात के समय लगेगा, इसलिए आप दिनभर सावन अमावस्या के स्नान-दान और पूजा-पाठ पूरे विधि-विधान से संपन्न कर सकते हैं.

दुर्लभ संयोग: इस बार सावन अमावस्या और सूर्य ग्रहण एक ही दिन पड़ रहे हैं, जिससे इस तिथि का धार्मिक महत्व काफी बढ़ गया है.

भारत में दृश्यता: साल 2026 का यह सूर्य ग्रहण भारत में नजर नहीं आएगा, इसलिए देश में इसका कोई खगोलीय प्रभाव नहीं होगा.

सूतक काल: ग्रहण भारत में न दिखने के कारण यहां सूतक काल और उससे जुड़े धार्मिक निषेध नियम मान्य नहीं होंगे.

स्नान-दान और तर्पण: श्रद्धालु बिना किसी संशय के सावन अमावस्या पर पवित्र स्नान, पितृ तर्पण और भगवान शिव का जलाभिषेक कर सकेंगे.

डिस्क्लेमर:
यहां दी गई सभी जानकारियां सामाजिक और धार्मिक आस्थाओं पर आधारित हैं. janjantaksandesh.com इसकी पुष्टि नहीं करता. इसके लिए किसी एक्सपर्ट की सलाह अवश्य लें.

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