GK: नारियल के अंदर कहां से आता है इतना पानी? यह है पूरा साइंस

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Coconut Water: हर साल 2 सितम्बर को वर्ल्ड कोकोनट डे मनाया जाता है. जब नारियल के पेड़ को देखते हैं, न कोई नल, न कोई पाइप फिर भी उसके अंदर इतना साफ-मीठा पानी कैसे भर जाता है? जानें जवाब.

नारियल के फायदे तो जानते होंगे, लेकिन कभी सोचा है कि इसमें इतना पानी कैसे भर जाता है. जब नारियल के पेड़ को देखते हैं, न कोई नल, न कोई पाइप फिर भी उसके अंदर इतना साफ-मीठा पानी कैसे भर जाता है? यह सवाल सुनने में जितना मासूम लगता है, इसके पीछे भी उतना ही दिलचस्प विज्ञान है. हर साल 2 सितम्बर को वर्ल्ड कोकोनट डे मनाया जाता है. आइए, इसी बहाने जान लेते हैं कि नारियल के अंदर इतना पानी कहां से आता है.


नारियल के पेड़ की जड़ें जमीन से पानी और उसमें घुले खनिज तत्व यानी मिनरल्स सोखती हैं. यह पानी जड़ों से तने के अंदर मौजूद एक खास टिशू सिस्टम से होकर ऊपर की ओर बढ़ता है, जिसे विज्ञान की भाषा में जाइलम पेड़ के अंदर बनी बारीक नलियों जैसी संरचना होती है, जो जमीन से सोखे गए पानी को जड़ों से लेकर पेड़ की सबसे ऊंची शाखाओं और फलों तक पहुंचाती है. यही वजह है कि 60-80 फीट ऊंचे नारियल के पेड़ की चोटी पर लगे फल तक भी पानी आसानी से पहुंच जाता है.

फल के अंदर कैसे जमा होता है पानी?

अब सवाल यह है कि यह पानी सीधे नारियल के अंदर जमा क्यों और कैसे होता है. दरअसल, जब नारियल का फल बनना शुरू होता है, तो शुरुआत में वह एक छोटे बीज जैसा होता है. फल के अंदर एक तरल पदार्थ बनता है जिसे वैज्ञानिक भाषा में लिक्विड एंडोस्पर्म कहते हैं.

पेड़ अपनी पत्तियों में प्रकाश-संश्लेषण के जरिए शक्कर और पोषक तत्व बनाता है. यह पोषक तत्व फ्लोएम नाम की दूसरी नलियों के जरिए फल तक भेजे जाते हैं, जबकि पानी जाइलम के जरिए पहुंचता है. फल के अंदर ये दोनों चीजें पानी और पोषक तत्व आपस में मिलकर वह तरल बनाती हैं, जिसे हम पीते हैं. यानी नारियल पानी असल में सिर्फ “पानी” नहीं, बल्कि पानी, शक्कर, विटामिन, मिनरल्स और अमीनो एसिड का प्राकृतिक मिश्रण है.

आखिर पेड़ यह पानी फल में क्यों जमा करता है?

पौधों की दुनिया में हर चीज का कोई न कोई मकसद होती है. नारियल के अंदर मौजूद यह तरल असल में उस बीज के लिए भोजन का भंडार होता है, जो फल के अंदर विकसित हो रहा होता है. शुरुआती अवस्था में जब बीज कमजोर होता है और खुद पोषण नहीं बना पाता, तब यही तरल एंडोस्पर्म उसे जरूरी पोषण देता है.

जैसे-जैसे नारियल पकता है, यह तरल धीरे-धीरे गाढ़ा होकर ठोस सफेद गूदे (कोपरा) में बदलने लगता है. यही वजह है कि पुराने, पके नारियल में पानी कम और गूदा ज्यादा होता है, जबकि हरे-कच्चे नारियल में पानी भरपूर मिलता है.

नारियल का खोल पानी को कैसे सुरक्षित रखता है?

नारियल की बनावट भी इस पूरी प्रक्रिया में अहम भूमिका निभाती है. इसका सबसे बाहरी हिस्सा रेशेदार परत (हस्क) और उसके अंदर मौजूद सख्त खोल (शेल) पानी को बाहर की गर्मी, कीड़े-मकोड़ों और नमी के नुकसान से बचाते हैं. यही वजह है कि नारियल का पानी महीनों तक फल के अंदर सुरक्षित और ताज़ा बना रह सकता है, भले ही बाहर का मौसम कितना भी गर्म क्यों न हो.

कितना होता है पानी?

एक औसत हरे नारियल में करीब 200-800 मिलीलीटर तक पानी हो सकता है. यह मात्रा पेड़ की किस्म, मिट्टी और फल की उम्र पर निर्भर करती है. दिलचस्प बात यह है कि आपातकालीन चिकित्सा स्थितियों में इतिहास में कई बार नारियल पानी का इस्तेमाल शरीर में तरल पदार्थ के विकल्प के तौर पर भी किया गया है, क्योंकि इसकी संरचना कुछ हद तक मानव रक्त प्लाज्मा से मिलती-जुलती मानी जाती है.

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