🇮🇳
Janmashtami 2026 Today: 4 सितंबर 2026 यानी आज के दिन जन्माष्टमी का पावन पर्व मनाया जा रहा है। आइए इस दिन से जुड़ी प्रमुख बातों को जानते हैं।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का महापर्व आज देश भर में अपार श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जा रहा है। ऐसी मान्यता है कि जन्माष्टमी के दिन मध्यरात्रि में लड्डू गोपाल की विधि विधान से पूजन करने से साधक के जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं और घर में सुख, समृद्धि व आरोग्यता का वास होता है। अगर आप भी आज बाल गोपाल की पूजा करने जा रहे हैं, तो आइए यहां जानते हैं जन्माष्टमी का शुभ मुहूर्त, पूजन विधि, कान्हा के प्रिय भोग, मंत्र और आरती।
जन्माष्टमी 2026 पूजा मुहूर्त (Janmashtami 2026 Puja Muhurat)
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल कृष्ण जन्माष्टमी 04 सितंबर 2026 यानी आज के दिन मनाई जा रही है। वहीं, इस साल रोहिणी नक्षत्र की शुरुआत 03 सितंबर की रात 12 बजकर 31 पर हो चुकी है। इसके साथ ही इसका समापन 04 सितंबर को रात 11 बजकर 05 पर होगा।
निशिता काल पूजा का समय: मध्यरात्रि 12:45 से 01:30 तक (सितंबर 05)।
पूजन विधि (Janmashtami 2026 Puja Rituals)
शाम को स्नान करके लाल, पीले या हरे रंग के कपड़े पहनें और पूजा स्थान को गंगाजल छिड़क कर पवित्र करें।
मध्यरात्रि में कान्हा के जन्म के समय लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें।
कान्हा को पीतांबर पहनाएं। माथे पर गोपी चंदन लगाएं, मुकुट, मोरपंख, वैजयंती माला, बांसुरी और कंगन से उनका भव्य शृंगार करें।
बाल गोपाल को रोली अक्षत लगाएं और तुलसी पत्र, ताजे पीले अर्पित करें।
माखन मिश्री और धनिया पंजीरी का भोग लगाकर धूप दीप से आरती करें।
इसके बाद कान्हा के प्रसाद से व्रत का पारण करें और रात्रि जागरण करें।
अंत में पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।
भगवान श्रीकृष्ण के प्रिय भोग (Janmashtami 2026 Bhog List)
माखन और मिश्री: कान्हा को ताजा माखन और मिश्री बेहद प्रिय है। इसलिए कान्हा को माखन मिश्री का भोग जरूर लगाएं।
धनिया पंजीरी: जन्माष्टमी पर भुने धनिया, शक्कर और मेवे से बनी पंजीरी का भोग लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
मखाने की खीर व पंचामृत: इस दिन मखाने की खीर और तुलसी दल से बना पंचामृत कान्हा को अर्पित करने का भी खास विधान है।
श्रीकृष्ण पूजन मंत्र (Janmashtami 2026 Puja Mantra)
ॐ क्लीं कृष्णाय नमः
ॐ नमो भगवते वासुदेवाय
हे कृष्ण द्वारकावासिन् क्वांसि यादवनन्दन।
आपद्भिः परिभूतां मां त्रायस्वाशु जनार्दन॥
॥श्रीकृष्ण जी की आरती॥ (Aarti Kunj Bihari Ki Lyrics in Hindi)
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
गले में बैजंती माला,
बजावै मुरली मधुर बाला ।
श्रवण में कुण्डल झलकाला,
नंद के आनंद नंदलाला ।
गगन सम अंग कांति काली,
राधिका चमक रही आली ।
लतन में ठाढ़े बनमाली
भ्रमर सी अलक,
कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक,
ललित छवि श्यामा प्यारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
कनकमय मोर मुकुट बिलसै,
देवता दरसन को तरसैं ।
गगन सों सुमन रासि बरसै ।
बजे मुरचंग,
मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग,
अतुल रति गोप कुमारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
जहां ते प्रकट भई गंगा,
सकल मन हारिणि श्री गंगा ।
स्मरन ते होत मोह भंगा
बसी शिव सीस,
जटा के बीच,
हरै अघ कीच,
चरन छवि श्रीबनवारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
चमकती उज्ज्वल तट रेनू,
बज रही वृंदावन बेनू ।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू
हंसत मृदु मंद,
चांदनी चंद,
कटत भव फंद,
टेर सुन दीन दुखारी की,
श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥
आरती कुंजबिहारी की,
श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की ॥


















