🇮🇳
Chhattisgarh News/रायपुर। शिक्षक दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के शिक्षकों के नाम पत्र लिखकर उन्हें नमन किया। उन्होंने शिक्षकों से आग्रह किया कि अभाव, संकोच या किसी अन्य कारण से पीछे रह रहे बच्चों का हाथ जरूर थामें। मुख्यमंत्री ने कहा कि थोड़ा सा विश्वास किसी बच्चे के पूरे जीवन की दिशा बदल सकता है।
बगिया गांव से शुरू हुई शिक्षा यात्रा
ज्ञात हो कि, मुख्यमंत्री ने पत्र में अपनी शिक्षा से जुड़े अनुभव भी साझा किए। उन्होंने बताया कि जशपुर जिले के बगिया गांव के एक साधारण किसान परिवार से उनकी शिक्षा की शुरुआत हुई थी। करीब 10 वर्ष की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया। पांचवीं तक गांव में पढ़ाई करने के बाद आगे की शिक्षा के लिए उन्हें कुनकुरी जाना पड़ा।
वहीं, पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वह अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख सके। इसके बाद उन्होंने खेती के साथ छोटे भाइयों की जिम्मेदारी संभाली। अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से बच्चों की परिस्थितियों को समझते हुए उन्हें आगे बढ़ाने का आह्वान किया।
तकनीक बदली, शिक्षक की भूमिका नहीं
दरअसल मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पीढ़ी ने स्लेट, तख्ती और चाक से पढ़ाई शुरू की थी। आज के बच्चे स्मार्ट क्लास और डिजिटल माध्यमों के जरिए दुनिया भर के ज्ञान से जुड़ रहे हैं। संसाधन और तकनीक भले बदल गए हों, लेकिन शिक्षा में शिक्षक की भूमिका आज भी सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि तकनीक बच्चों को जानकारी दे सकती है, लेकिन शिक्षक उनमें आत्मविश्वास, संस्कार और प्रतिभा को दिशा देने का काम करते हैं।
मातृभाषा और कौशल विकास पर जोर
फिलहाल मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, सहज और व्यावहारिक बनाने की दिशा में काम कर रही है। इसके तहत मातृभाषा में शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल संसाधनों के विस्तार पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार ऐसा छत्तीसगढ़ बनाना चाहती है, जहां किसी बच्चे की परिस्थितियां उसके सपनों की सीमा तय न करें। मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से हर बच्चे की संभावना पहचानने और उसे आगे बढ़ाने का आह्वान किया।


















