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Chhattisgarh News/बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने विदेशी नागरिक को देश से निर्वासित (डिपोर्ट) करने के आदेश के खिलाफ दायर याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है।
वहीं, याचिकाकर्ता सुब्रिति शर्मा की ओर से आरोप लगाया गया है कि उन्हें डिपोर्ट करने का आदेश 12 जुलाई 2025 को बिना किसी आवश्यक जांच के जारी कर दिया गया, जबकि विदेशी अधिनियम, 1946 की धारा 3 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी था।
बता दें कि, मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की युगल पीठ ने की। कोर्ट ने मामले को एडमिट करते हुए राज्य के अधिवक्ता को याचिकाकर्ता की इस आपत्ति की जांच करने और अगली सुनवाई से पहले इस संबंध में शपथपत्र प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
ज्ञात हो कि, याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अदिति सिंघवी ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि 12 जुलाई 2025 को पारित आदेश के जरिए याचिकाकर्ता को भारत से डिपोर्ट करने का निर्देश दिया गया है। इस आदेश को याचिका के साथ एक्जिबिट पी/1 के रूप में पेश किया गया है। याचिकाकर्ता का मुख्य तर्क है कि डिपोर्टेशन जैसा गंभीर आदेश पारित करने से पहले संबंधित प्राधिकारी द्वारा विदेशी अधिनियम की धारा 3 में अपेक्षित जांच की जानी चाहिए थी।
आरोप है कि ऐसी कोई जांच किए बिना ही डिपोर्टेशन का आदेश जारी कर दिया गया। सुनवाई के दौरान राज्य की ओर से महाधिवक्ता कार्यालय के शासकीय अधिवक्ता राहुल तमास्कर उपस्थित हुए, जबकि केंद्र सरकार की ओर से डिप्टी सालिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने पक्ष रखा।
वहीं, हाई कोर्ट ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को याचिकाकर्ता की ओर से उठाए गए इस विशेष आधार की सत्यता और रिकार्ड के आधार पर जांच करने का निर्देश दिया है कि क्या 12 जुलाई 2025 का डिपोर्टेशन आदेश विदेशी अधिनियम की धारा 3 के तहत अपेक्षित जांच के बिना पारित किया गया था। कोर्ट ने राज्य को इस संबंध में अगली सुनवाई से पहले शपथपत्र दाखिल करने का आदेश दिया है।
आठ सितंबर को होगी अगली सुनवाई
दरअसल, हाई कोर्ट ने याचिका को प्रवेश स्तर पर स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई के लिए मंगलवार, आठ सितंबर 2026 की तारीख तय की है। फिलहाल कोर्ट ने डिपोर्टेशन आदेश की वैधता पर कोई अंतिम निष्कर्ष नहीं दिया है।
फिलहाल, अगली सुनवाई में राज्य के शपथपत्र के बाद यह स्पष्ट होगा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ कार्रवाई के पहले निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया था या नहीं।

















