Prerak Kahani In Hindi : कर्म फल सबको मिलता है – बेटा बनकर, बेटी बनकर, दामाद बनकर और बहू बनकर

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Prerak Kahani In Hindi : जीवन में हम जो भी करते हैं उसका फल हमें जरूर मिलता है। कभी बेटा बनकर, कभी बेटी बनकर, कभी दामाद बनकर तो कभी बहू बनकर। आज हम आपको एक ऐसी प्रेरक कहानी सुना रहे हैं जो आपको जीवन की सच्चाई समझाएगी। यह कहानी बताती है कि हमारे कर्मों का फल कैसे हमारे पास वापस आता है। तो चलिए पढ़ते हैं यह शिक्षाप्रद कहानी।

कहानी: कर्म का फल

एक गांव में रामदास नाम का एक व्यापारी रहता था। उसके पास बहुत धन-दौलत थी। उसकी एक बूढ़ी मां थी जो बीमार रहती थी। रामदास को अपने व्यापार से फुर्सत नहीं थी। वो अपनी मां की देखभाल नहीं करता था। बूढ़ी मां पूरे दिन अकेली बैठी रहती।

एक दिन रामदास ने सोचा कि मां की देखभाल करना बहुत झंझट है। उसने अपनी मां को एक छोटे से कमरे में रहने के लिए भेज दिया। उसे खाना भी ठीक से नहीं देता था। मां रोती रहती लेकिन रामदास का दिल नहीं पिघलता।

रामदास का एक छोटा बेटा था जो अपनी दादी से बहुत प्यार करता था। वो रोज दादी के पास जाता और उनका हाल-चाल पूछता। एक दिन बेटे ने देखा कि पिता दादी को टूटी हुई प्लेट में खाना दे रहे हैं। यह देखकर बेटे को बहुत बुरा लगा।

कुछ दिनों बाद बेटे ने घर में एक टूटी हुई प्लेट संभालकर रख ली। रामदास ने पूछा, “बेटा, तुम यह टूटी प्लेट क्यों रख रहे हो?”

बेटे ने मासूमियत से कहा, “पिताजी, मैं इसे इसलिए रख रहा हूं ताकि जब आप बूढ़े हो जाओ तो मैं इसी प्लेट में आपको खाना दूं। आप तो दादी को टूटी प्लेट में खाना देते हो ना?”

यह सुनकर रामदास का दिल दहल गया। उसे अपनी गलती का एहसास हो गया। उसे समझ आ गया कि बच्चे वही सीखते हैं जो बड़े करते हैं। जैसा वो अपनी मां के साथ करेगा, उसका बेटा भी वैसा ही उसके साथ करेगा।

उसी दिन से रामदास ने अपनी मां की खूब सेवा की। उन्हें अच्छे कमरे में रखा, अच्छा खाना दिया और पूरा सम्मान दिया। उसका बेटा भी यह सब देखकर खुश हुआ और उसने भी बड़ों का सम्मान करना सीखा।

कहानी की सीख

यह कहानी हमें बताती है कि कर्म का फल सबको मिलता है। जो व्यक्ति अपने माता-पिता का सम्मान नहीं करता, उसके बच्चे भी उसका सम्मान नहीं करेंगे। जो व्यक्ति अपनी पत्नी के साथ बुरा व्यवहार करता है, उसकी बेटी को भी ससुराल में बुरा व्यवहार मिलता है।

बेटा बनकर: अगर आप बेटे के रूप में अपने माता-पिता का ध्यान नहीं रखेंगे तो आपके बच्चे भी आपका ध्यान नहीं रखेंगे।

बेटी बनकर: अगर आप बेटी के रूप में अपने माता-पिता को भूल जाएंगी तो आपकी बेटी भी आपको भूल जाएगी।

दामाद बनकर: अगर आप ससुराल वालों का अपमान करेंगे तो आपकी बेटी का दामाद भी आपका अपमान करेगा।

बहू बनकर: अगर आप अपनी बहू के साथ बुरा व्यवहार करेंगे तो आपकी बेटी को भी ससुराल में बुरा व्यवहार मिलेगा।

जीवन का सच

प्रकृति का नियम है कि हम जो भी बोते हैं वही काटते हैं। अगर हम दूसरों के साथ अच्छा करेंगे तो हमारे साथ भी अच्छा होगा। अगर हम बुरा करेंगे तो बुरा ही वापस मिलेगा। हमारे कर्म हमारे जीवन को बनाते या बिगाड़ते हैं।

इसलिए हमेशा अच्छे कर्म करें। माता-पिता का सम्मान करें। बड़ों की सेवा करें। अपने रिश्तों को प्यार और सम्मान दें। याद रखें कि आप जो भी करते हैं, वह आपके पास किसी न किसी रूप में जरूर लौटकर आएगा।

Disclaimer:
यह कहानी नैतिक शिक्षा देने के उद्देश्य से लिखी गई है। यह हमें सिखाती है कि हमारे कर्मों का फल हमें जरूर मिलता है। इस कहानी का उद्देश्य लोगों को अच्छे कर्म करने के लिए प्रेरित करना है।

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