अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के दाम.! US-ईरान डील के बाद कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, भारत के लिए ‘गुड न्यूज’ क्यों?

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इंटरनेशनल डेस्क, नई दिल्ली। महंगाई की मार झेल रही जनता के लिए एक बहुत बड़ी और सुखद खबर सामने आई है। पश्चिम एशिया में महीनों से जारी तनाव के बीच अब पेट्रोल-डीजल और एलपीजी (LPG) के दाम कम होने की उम्मीद जगी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच एक ऐतिहासिक शांति समझौता हो गया है, जिसके तहत सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग ‘होर्मुज स्ट्रेट’ को फिर से आवाजाही के लिए खोलने पर सहमति बनी है।



भारत के लिए क्यों है यह ‘गुड न्यूज’?

वहीं, भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है और इसका एक बड़ा हिस्सा होर्मुज स्ट्रेट के रास्ते ही आता है। इस समझौते के सफल होने से न केवल तेल की सप्लाई सामान्य होगी, बल्कि महंगाई पर लगाम लगाने में भी मदद मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे घरेलू बाजार में तेल और गैस की कीमतों पर दबाव काफी कम हो जाएगा।

कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट

दरअसल, शांति समझौते की खबर आते ही ग्लोबल ऑयल मार्केट में हड़कंप मच गया है। ब्रेंट क्रूड 3% से ज्यादा टूटकर 84 डॉलर प्रति बैरल के नीचे पहुंच गया है। वहीं अमेरिकी WTI क्रूड भी गिरकर 81.99 डॉलर पर आ गया है। तेल सस्ता होने के साथ-साथ दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी रौनक लौट आई है।

जानिए अभी क्या हैं दाम और कितनी बढ़ी कीमतें

युद्ध के दौरान जनता की जेब पर भारी बोझ पड़ा था:

▪️पेट्रोल-डीजल: दिल्ली में पेट्रोल करीब ₹102 और डीजल ₹95 प्रति लीटर के आसपास बिक रहा है। युद्ध के दौरान ये 7.50-7.50 रुपये तक महंगे हुए थे।
▪️LPG सिलेंडर: घरेलू गैस सिलेंडर (14.2 किलो) की कीमत फिलहाल ₹942 है, जो युद्ध के दौरान ₹89 महंगा हुआ था। वहीं कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में ₹1373 तक की भारी बढ़ोतरी देखी गई थी।



समझौते की 5 बड़ी बातें:

▪️19 जून को स्विट्जरलैंड में इस समझौते पर आधिकारिक हस्ताक्षर होने की संभावना है।
▪️अमेरिका और ईरान अब एक-दूसरे पर सैन्य हमले नहीं करेंगे।
▪️होर्मुज स्ट्रेट से नौसैनिक नाकाबंदी पूरी तरह खत्म होगी।
▪️लेबनान में चल रही सैन्य गतिविधियों को रोकने पर भी सहमति बनी है।
▪️ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर फिर से नई बातचीत शुरू की जाएगी।

फिलहाल, इस समझौते से न केवल युद्ध की आशंकाएं खत्म हुई हैं, बल्कि वैश्विक आर्थिक गतिविधियों को भी नई संजीवनी मिलने की उम्मीद है।

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