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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। कई लोगों के साथ ऐसा होता है कि जैसे ही वह बैठे या लेटे रहने के बाद अचानक खड़े होते हैं, उन्हें चक्कर आने लगता है। कुछ सेकंड के लिए आंखों के सामने अंधेरा छा जाता है, शरीर कमजोर लगता है और कभी-कभी गिरने का डर भी रहता है।
अक्सर लोग इसे आम बात समझकर टाल देते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि यह आम समस्या नहीं, बल्कि मेडिकल भाषा में इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है? जी हां, आइए जानते हैं ऐसा क्यों होता है और इसके पीछे के लक्षणों के बारे में।
ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन क्या होता है?
जब कोई व्यक्ति लेटे या बैठे रहने के बाद खड़ा होता है, तो अचानक उसका ब्लड प्रेशर कम हो जाता है, जिसके कारण चक्कर या कमजोरी महसूस होती है। अगर खड़े होने के 2-3 मिनट के अंदर ब्लड प्रेशर काफी गिर जाए और चक्कर आने लगे, तो इसे ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन कहा जाता है।
किन लोगों में ज्यादा दिखती है यह दिक्कत?
▪️बुजुर्ग लोगों में
शरीर में खून की कमी या विटामिन B12 की कमी होने पर
▪️दिल की बीमारी या अनियमित धड़कन वाले लोगों में
▪️प्रेग्नेंसी के शुरुआती महीनों में
▪️पानी की कमी और उल्टी या दस्त वाले लोगों में
▪️हाई ब्लड प्रेशर या डिप्रेशन की दवाएं लेने वालों में
▪️डायबिटीज या थायराइड जैसी बीमारियों में
पार्किंसन जैसी नसों से जुड़ी बीमारी में
▪️बीमारी के कारण लंबे समय तक बिस्तर पर आराम करने वालों में
आखिर ऐसा क्यों होता है?
बैठे या लेटे रहने से पैरों से दिल तक खून आसानी पहुंचता है, लेकिन जैसे ही हम अचानक खड़े होते हैं, तो खून को तुरंत दिल तक पहुंचने में परेशानी होती है। अगर दिल और नसों का सिस्टम तुरंत काम न करे, तो ब्लड प्रेशर गिर जाता है, जिसके कारण हमें चक्कर आने लगता है।
ऑर्थोस्टेटिक हाइपोटेंशन के लक्षण
यह परेशानी अक्सर सुबह के समय ज्यादा होती है, क्योंकि उस समय ब्लड प्रेशर पहले से ही थोड़ा कम रहता है। गर्म मौसम या गरम पानी से नहाने के बाद भी लक्षण बढ़ सकते हैं।
आइए जानते हैं इसके मुख्य लक्षणों के बारे में।
▪️सिर, सीने, कंधे और गर्दन में दर्द
▪️सांस लेने में दिक्कत
धुंधला दिखाई देना
▪️खड़े होते ही चक्कर आना
▪️दिल की धड़कन तेज होना
▪️पसीना आना या मिचली
▪️फोकस करने में परेशानी
▪️ज्यादा कमजोरी या थकान लगना










