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लाइफस्टाइल डेस्क ; डॉ. भसीन के अनुसार आंखें मलने से वेगस नर्व उत्तेजित होती है। यह नस हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम का मुख्य हिस्सा है। इसकी उत्तेजना से दिल की धड़कन धीमी हो सकती है और तनाव कंट्रोल होता है।
अक्सर आंखों में थकान, खुजली या एलर्जी होने पर हमारा हाथ अनजाने में आंखों को रगड़ने लगता है। हमें लगता है कि इससे आराम मिल रहा है, लेकिन क्या यह आदत आपकी आंखों की रोशनी के लिए सुरक्षित है? ग्वालियर स्थित रतन ज्योति नेत्रालय के संस्थापक और वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. पुरेंद्र भसीन के अनुसार आंखों को जोर से रगड़ना कॉर्निया को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं कि आंखें मलने के पीछे का यांत्रिक (Mechanical) और तंत्रिका संबंधी (Neurological) विज्ञान क्या है।
आंखें मलने पर शरीर में क्या प्रक्रिया होती है?
डॉ. पुरेंद्र भसीन बताते हैं कि जब हम अपनी आंखें मलते हैं, तो हम आईबॉल (Eyeball) के पीछे मौजूद संवेदनशील तंत्रिका सिरों (Nerve endings) को उत्तेजित करते हैं। यह दबाव मस्तिष्क को संकेत भेजता है, जिससे थकान या सूखेपन में अस्थायी राहत महसूस होती है। इसके अलावा, मलने से आंसुओं का प्रवाह बेहतर होता है, जो आंखों में फंसे धूल के कणों को साफ करने में मदद करता है। पलकों पर पड़ने वाला यह हल्का दबाव एक मसाज जैसा सुकून देता है। खासकर जब आंखें थकी या सूखी हों तो ये एहसास काफी सुकून देने वाला लगता है।
क्या इसका संबंध वेगस नर्व (Vagus Nerve) से है?
डॉ. भसीन के अनुसार आंखें मलने से वेगस नर्व उत्तेजित होती है। यह नस हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम का मुख्य हिस्सा है। इसकी उत्तेजना से दिल की धड़कन धीमी हो सकती है, जिससे व्यक्ति को तनाव से राहत और मानसिक शांति (Relaxation) का अनुभव होता है। यही कारण है कि थकान या स्ट्रेस में आंखें मलना भावनात्मक रूप से भी अच्छा लगता है।
बार-बार आंखें मलने के गंभीर खतरे:
ब्लर हो सकता है विजन
डॉ. भसीन के अनुसार आंखें मलने की आदत कुछ देर के लिए राहत देती है लेकिन इस आदत के हमेशा फॉलो करना आंखों के लिए खतरा पैदा कर सकता है। एक्सपर्ट ने बताया लगातार आंखें रगड़ने से कॉर्निया यानी आंख की बाहरी परत पतली होकर बाहर की ओर उभर सकती है, जिससे दृष्टि धुंधली हो जाती है।
संक्रमण का बढ़ सकता है खतरा
आंखों को बार-बार हाथों से रगड़ने से हाथों के बैक्टीरिया आंखों में पहुंचकर कंजंक्टिवाइटिस का कारण बन सकते हैं। आंखें लाल हो सकती है और आंखों में दर्द हो सकता है।
ब्लड वैसल्स टूट सकती है
आंखों को बार-बार रगड़ने से ब्लड वैसल्स टूट सकती है। जब आंखों को हाथों से रगड़ा जाता है तो आंखों की बारीक नसें टूट सकती हैं, जिससे आंखें लाल हो जाती हैं या उन पर नील (Bruising) पड़ सकता है।
एलर्जी का बढ़ सकता है खतरा
आंखों को हाथों से मलने से आंखों में एलर्जी का खतरा बढ़ सकता है। एलर्जी में आंखें मलने से हिस्टामाइन अधिक रिलीज होता है, जिससे खुजली कम होने के बजाय और बढ़ जाती है।
क्या करें और क्या न करें?
एक्सपर्ट ने बताया कभी-कभी हल्के हाथों से आंखों का मलना कुछ देर के लिए राहत दे सकता है लेकिन इसे आदत बनाना गलत है। अगर आंखों में लगातार जलन या सूखापन महसूस हो रहा है, तो आंखें मलने के बजाय लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स का उपयोग करें और आंखों को पानी से धोएं। परेशानी ज्यादा हो तो तुरंत नेत्र विशेषज्ञ को दिखाएं। आंखें मलना भले ही उस पल सुकून दे, लेकिन लंबे समय में यह आंखों की सेहत के लिए हानिकारक साबित हो सकती है।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। आंखों से जुड़ी किसी भी समस्या के लिए आप नेत्र रोग विशेषज्ञ से सलाह लें।










