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After Death How Long Does Brain Remains Alive: क्या कभी आपने सोचा है कि मरने के बाद भी दिमाग कुछ समय तक जीवित रहता है? जी हां ये सुनने में आपको थोड़ा अटपटा लगेगा, लेकिन ये बात सच है. आइए जानते हैं कितनी देर जीवित रहता है दिमाग.
क्या मरने के बाद भी दिमाग करता है काम?
कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो लगभग हम सभी के जहन में अक्सर घूमते रहते हैं, जैसे व्यक्ति के मरने के बाद की बातें अक्सर लोग पूछते हैं. लोग समझ नहीं पाते हैं कि आखिर अचानक व्यक्ति कैसे बोलना-देखना सब बंद कर देता है, ऐसे ही कुछ और सवाल लोगों के जहन में घूमते रहते हैं जैसे मरने के बाद व्यक्ति का दिमाग कितनी देर तक जिंदा रहता है? क्या ये मरने के बाद भी काम करता है? या ये हमारी बातें सुन पाता है? यह सवाल इंसान को सदियों से परेशान करते आ रहे हैं

कुछ समय तक सक्रिय रहता है दिमाग
इतना ही नहीं कई फिल्मों और कहानियों में दिखाया जाता है कि मौत के बाद भी इंसान अपनी जिंदगी के पल देखता या सुनता है, लेकिन क्या ऐसा होता है? आपको जानकर हैरानी होगी कि हाल के अध्ययनों से पता चलता है कि दिल की धड़कन रुकने (क्लिनिकल डेथ) के बाद भी दिमाग कुछ समय तक सक्रिय रह सकता है
क्लिनिकल डेथ और ब्रेन की स्थिति
दरअसल में जब हमारा दिल रुक जाता है तो दिमाग को ऑक्सीजन और ब्लड सप्लाई होन बंद हो जाती है, खासकर 4 से 6 मिनट के अंदर ब्रेन सेल्स (न्यूरॉन्स) मरना शुरू हो जाती हैं. 10-15 मिनट बाद ज्यादातर ब्रेन डैमेज अपरिवर्तनीय (irreversible) हो जाता है, लेकिन ये समझना जरूरी है कि मौत एक पल की घटना नहीं, बल्कि एक प्रक्रिया है. वैज्ञानिक बताते हैं कि मरने के बाद दिमाग पूरी तरह मर नहीं जाता, बल्कि कुछ गतिविधियां बाकी रह सकती हैं
दिमाग में क्या होता है मौत के समय?
हाल के कुछ अध्ययनों में EEG से दिमाग की तरंगों को मॉनिटर किया गया, 2013 में चूहों पर किए गए अध्ययन में दिल रुकने के बाद 30 सेकंड तक चेतना के संकेत मिले. कुछ न्यूरल एक्टिविटी 40 सेकंड तक बाकी रहीं. 2022 में एक 87 वर्षीय मरीज की मौत के दौरान EEG चल रहा था, दिल रुकने से 30 सेकंड पहले और 30 सेकंड बाद गामा वेव्स (30-150 Hz) में उछाल देखा गया. ये तरंगें सपने देखने, यादें ताजा करने और ध्यान (meditation) के समय होती हैं, इससे लगता है कि दिमाग जीवन की यादों को रीप्ले करता होगा
देखी गईं गतिविधियां
कुछ मामलों में CPR के दौरान 30-60 मिनट तक ब्रेन वेव्स स्पाइक देखे गए. Dr. Sam Parnia जैसे वैज्ञानिक कहते हैं कि दिमाग घंटों तक कुछ हद तक सक्रिय रह सकता है, खासकर अगर बॉडी ठंडी हो या CPR चल रहा हो. ये उछाल Wave of Death या Life Review से जुड़े माने जाते हैं, जहां दिमाग यादों को प्रोसेस करता है, लेकिन यह हर मरीज में नहीं होता और अभी और रिसर्च की जरूरत है
क्या मरा व्यक्ति बातें सुन सकता है?
अब सवाल उठता है कि क्या मरा हुआ व्यक्ति बातें सुन सकता है? कई रिसर्च बताते हैं कि हां, कई अध्ययन बताते हैं कि सुनना आखिरी सेंस होता है जो सबसे बाद में जाता है, UBC (University of British Columbia) 2020 की एक स्टडी में होस्पिस के मरीजों में जब वे अनरिस्पॉन्सिव हो गए थे तब भी दिमाग की कुछ हिस्से आवाज पर रिएक्ट कर रहे थे, मौत से कुछ घंटे पहले तक. ब्रेन EEG से पुष्टि हुई कि ध्वनि प्रोसेसिंग सिस्टम आखिर तक काम करता रहता है. भले ही मरीज आंखें न खोल पाएं या हिल न सकें, वे परिवार की बातें, संगीत या प्रार्थना सुन सकता है, इससे उन्हें शांति मिलती है
30-60 मिनट तक जीवित रह सकता है दिमाग
ये अध्ययन बताते हैं कि मौत के बाद भी दिमाग कुछ समय सक्रिय रह सकता है, इसलिए ऑर्गन डोनेशन ब्रेन डेथ की पुष्टि के बाद किया जाता है, दिमाग दिल रुकने के कुछ सेकंड से लेकर 30-60 मिनट तक जीवित रह सकता है. हालांकि मौत के बाद दिमाग घंटों या दिनों तक पूरी तरह जिंदा नहीं रहत सकता है, कोशिकाएं धीरे-धीरे मरती जाती हैं.विज्ञान अभी भी मौत की प्रक्रिया को पूरी तरह समझ नहीं पाया है. ये अध्ययन हमें बताते हैं कि मौत अचानक नहीं, बल्कि धीमी प्रक्रिया है


















