सैलाब के बाद नेपाल की 6 सुरंगों में फंसे हैं करीब 1000 लोग, अब तक क्यों नहीं निकाले जा सके? पढ़ें पूरी ख़बर

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Nepal Floods; नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई बाढ़ से हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में करीब 1000 लोगों के फंसे होने की आशंका है. मलबा और पानी भरने से बचाव मुश्किल हो गया है.

नेपाल में ग्लेशियर टूटने के बाद आई भीषण बाढ़ को एक हफ्ता बीत चुका है, लेकिन राहत और बचाव का काम अभी जारी है. सबसे बड़ी परेशानी उन लोगों को बचाने की है, जिनके हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों में फंसे होने की आशंका है.

बाढ़ और भूस्खलन से नदियों के किनारे बने कई बिजली प्रोजेक्ट बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं.सुरंगों के रास्ते मलबे, मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थरों से बंद हो गए हैं. कई जगह सड़कें और पुल भी टूट गए हैं.ऐसे में बचाव दल के लिए भारी मशीनों को मौके तक पहुंचाना भी मुश्किल हो रहा है.

सुरंगों में कितने लोग फंसे हो सकते हैं?

नेपाल के प्रभावित इलाकों में करीब 12 हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बाढ़ की चपेट में आए हैं.
इनमें काम करने वाले करीब 900 लोग लापता बताए जा रहे हैं .सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका है.
नेपाल के अधिकारियों के हवाले से कुछ रिपोर्टों में भी करीब 933 कर्मचारियों के प्रभावित या लापता होने की बात
हालांकि, संख्या इससे भी ज्यादा हो सकती है. ऐसे में कह सकते हैं कि तकरीबन हजार लोग सुरंगों के अंदर फंसे हैं.
किन-किन सुरंगों में फंसे हुए हैं लोग?
सबसे ज्यादा ध्यान ऊपरी त्रिशूली, ऊपरी त्रिशूली-3ए, ऊपरी त्रिशूली-3बी, चिलिमे, लंगटांग खोला और दूसरे हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट पर है.
रिपोर्टों के मुताबिक ऊपरी त्रिशूली-3ए में करीब 42 लोग लापता बताए गए हैं.
ऊपरी त्रिशूली-3बी में करीब 122 लोगों के लापता होने की आशंका है.
चिलिमे में 8, लंगटांग खोला में 41 और मैलुंग खोला में 7 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है.
इसके अलावा रसुवागढ़ी में करीब 93 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट है.
Nepal Flood (3)
फिर इन्हें तुरंत बाहर क्यों नहीं निकाला जा सका?
सबसे बड़ी समस्या सुरंग के अंदर जमा मलबा और पानी है. बाढ़ के साथ मिट्टी, पत्थर, बड़े-बड़े बोल्डर और मलबा सुरंग के अंदर भर गए हैं. कई जगहों पर सुरंग का हिस्सा भी टूटकर गिर गया है.ऐसे में बचाव दल के लिए सीधे अंदर जाना खतरनाक है. अगर बिना जांच किए मशीन से खुदाई शुरू की गई तो आसपास की कमजोर चट्टानें खिसक सकती हैं और सुरंग का बाकी हिस्सा भी गिर सकता है.यानी लोगों तक पहुंचने का रास्ता बनाने में ही बचावकर्मियों और सुरंग में फंसे लोगों के लिए जान को खतरा है.

जानकारी के अनुसार ऊपरी त्रिशूली-3ए में बचाव दल सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंचने में कामयाब हुआ और वहां हवा पहुंचाने की कोशिश की गई. इसके बाद ड्रिलिंग और खुदाई के जरिए नीचे पहुंचने की कोशिश की गई. लेकिन अंदर से कोई जवाब नहीं मिला और मलबा हटाने का काम जारी रहा.

बालेन शाह को किस बात की चिंता है?

वहीं नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में बताया कि सुरंगों में फंसे लोगों को निकालना आसान नहीं है. इसके लिए खास तरह की मशीनों और सुरंग बचाव के विशेषज्ञों की जरूरत है. इसी वजह से नेपाल ने भारत, चीन और दूसरे देशों से भी मदद मांगी है. भारतीय और नेपाली टीमें चिलिमे और लंगटांग इलाके में बचाव अभियान चला रही हैं. लंगटांग में टीम सुरंग के अंदर करीब 185 मीटर तक पहुंच चुकी है, लेकिन वहां भी सुरंग का कुछ हिस्सा कमजोर और अस्थिर है

बचाव कार्य में किन मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है?

ज्ञात हो कि बचाव अभियान में कई तरह की मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जैसे एक्सकेवेटर, पानी निकालने वाले पंप और ड्रिलिंग मशीन.लेकिन हर सुरंग में एक जैसी मशीन काम नहीं कर सकती.जहां ज्यादा मलबा भरा है, वहां एक्सकेवेटर की जरूरत होती है. चट्टानें हटाने के लिए ड्रिलिंग मशीन और सुरंग में पानी भरने पर उसे बाहर निकालने के लिए पंप की जरूरत पड़ती है.

वहीं पहाड़ी इलाका होने के कारण इन भारी मशीनों को मौके तक पहुंचाना आसान नहीं है. बाढ़ में कई सड़कें और पुल टूट चुके हैं. ऊपर से सड़कें और पुल बाढ़ में टूट चुके हैं. ऐसे में जो मशीनें उपलब्ध हैं, उनका इस्तेमाल भी हालात के हिसाब से ही किया जा रहा है.

जमीन सूखने का इंतजार क्यों किया जा रहा है?

दरअसल, बाढ़ के तुरंत बाद सुरंगों के अंदर पानी, कीचड़ और गीली मिट्टी भर गई थी. ऐसे में भारी मशीन चलाने से मलबा खिसक सकता है और सुरंग के और धंसने का खतरा रहता है.इसलिए सबसे पहले पानी निकालना जरूरी है. पानी कम होने के बाद ही बचावकर्मी अंदर की स्थिति को ठीक से देख और समझ सकते हैं और मशीनों को सुरक्षित तरीके से चला सकते हैं. हालांकि, बचाव दल सिर्फ इंतजार नहीं कर रहा है, कई जगह एक साथ पानी निकालने, मलबा हटाने, सुरंग में हवा पहुंचाने और अंदर जाने के दूसरे रास्ते बनाने का काम चल रहा है.

क्या सुरंग में फंसे लोग अभी भी जिंदा हैं?

फिलहाल, सुरंगों में फंसे लोग अभी जिंदा हैं या नहीं यह भी एक बड़ा सवाल है. कुछ सुरंगों में लोगों के बचने की उम्मीद इसलिए है क्योंकि वहां हवा पहुंच सकती है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ हाइड्रोपावर सुरंगों में हवा के खाली हिस्से और खाना मौजूद होने की वजह से लोगों के जिंदा होने की उम्मीद बनी हुई है. खास तौर पर ऊपरी त्रिशूली-3ए में हवा के आने-जाने की संभावना को लेकर ज्यादा लोगों के बचे होने की उम्मीद है.

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