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बरेली। जिस तरह नौ साल पहले रजनी हत्याकांड दफन हुआ, उसी तरह 13 माह पहले किशोरी की हत्या भी राज बनकर रह गई थी। इनका आरोपित सलीम और अमित उर्फ आलिम इतने शातिर थे कि एक भी सुराग नहीं छोड़ा। शवों को ठिकाने लगाने के बाद वे दोनों बेफिक्र थे मगर, अपराधी एक-न-एक दिन फंसता जरूर है।
जानकारी के मुताबिक, किशोरी हत्याकांड के राजफाश में जुटी पुलिस को उसकी चोटी से सुराग मिले। इसके बाद पालीग्राफ टेस्ट का डर सताया तो दोनों आरोपित खुद अपने जाल में फंस गए। गुरुवार को दोनों को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। क्योलड़िया के सतवन पट्टी गांव निवासी किशोरी सात जनवरी 2025 की रात को लापता हुई थी।
हालांकि, उसकी काल डिटेल से पता चला कि सलीम से बात हुई, इसलिए उससे कई चरणों में पूछताछ की गई। वह हर बार कहता रहा कि किशोरी से प्रेम संबंध थे मगर, कहां चली गई यह नहीं पता। पुलिस ने जांच आगे बढ़ाई तो काल रिकार्ड के आधार पर भुता के सलमान पर भी शक हुआ मगर, पूछताछ में कुछ नहीं मिला। मई 2025 में सलमान ने आत्महत्या कर ली।
वहीं, उनके स्वजन का कहना था कि झूठे आरोप और पुलिस की प्रताड़ना के कारण सलमान ने फंदा लगा लिया। आरोप-प्रत्यारोप में फंसी पुलिस सुस्त पड़ गई। सितंबर में कुछ ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि किशोरी का प्रेमी सलीम बार-बार गन्ने के खेत की ओर जाता है। टीम ने खेत खंगाला तो उसमें कटी हुई चोटी, कुछ हड्डियां व गले हुए कपड़े मिले।
हालांकि, इसकी डीएनए जांच से स्पष्ट हो गया कि किशोरी की हत्या कर शव गन्ने के खेत में फेंका गया जोकि आठ महीने में गल गया। उस खेत के मालिक ने गन्ने की थोड़ी फसल बीज के छोड़ दी थी, इसलिए शव वहीं गलता रहा। पुलिस के अनुसार, नये सिरे से जांच शुरू की, जिसमें कोर्ट से सलीम के पालीग्राफ की अनुमति ली।
वहीं, उसने टेस्ट कराने पर हामी तो भर दी मगर, घबराकर बंगाली झोलाछाप अमित उर्फ आलिम के पास पहुंचा। अमित ने उससे कह दिया कि इस टेस्ट में तो नशीली दवा दी जाती है, जिससे व्यक्ति सच बोल देता है। इससे बचने के लिए गांव से भाग जाओ। इसके बाद पहले सलीम फिर अमित उर्फ आलिम गांव से फरार हुआ।
ज्ञात हो कि, पांच फरवरी को पुलिसकर्मी सलीम को लेने घर पहुंचे तो नहीं मिला। सलीम के स्वजन ने बता दिया कि पालीग्राफ टेस्ट में अमित की पत्नी की हत्या का राज खुल जाता, इसलिए दोनों भागे हैं। सर्विलांस टीम की मदद से दोनों का पीछा कर पकड़ा जा सका।
आरोपितों का कुबूलनामा
वहीं, सलीम ने स्वीकारा कि सात जनवरी की रात को वीडियो काल के बाद किशोरी खेत में मिलने आई। उसने शादी का दबाव डाला तो पीछा छुड़ाने के लिए गला घोटकर हत्या कर दी। इसके बाद पालीग्राफ टेस्ट की बारी आने पर अमित उर्फ आलिम को बताया तो वह डर गया कि पुराना राज खुल जाएगा। टेस्ट के डर से दोनों भागे थे।
दरअसल पुलिस के अनुसार, बंगाल निवासी अमित कुछ वर्ष पहले दिल्ली में रहकर दवाएं बेचता था। वहां उसने उन्नाव के बीघापुर निवासी रजनी से प्रेम विवाह कर लिया। बाद में भुता के भौआपुर बाजार दवा की दुकान खोली और अपना नाम आलिम रख लिया। सलीम उसकी दुकान पर सहायक था।
फिलहाल, वर्ष 2017 में चरित्र पर शक जताते हुए अमित ने रजनी की गला घोटकर हत्या कर दी, जिसमें सलीम ने भी साथ दिया था। दोनों ने रजनी का शव कैलाश नदी कि आदिनाथ घाट पर दफना दिया, जिसकी किसी को भनक नहीं लगी।
“किशोरी का हत्यारे पकड़ने में जुटी पुलिस ने नौ वर्ष पुराने हत्याकांड का राजफाश भी किया है। अमित उर्फ आलिम के विरुद्ध उसकी पत्नी की हत्या की भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।”
– मुकेश मिश्र, एसपी नार्थ।


















