Health Tips : क्या ब्रेन ट्यूमर का इलाज ऑपरेशन ही है? इससे जुड़े मिथक और फैक्ट्स एक्सपर्ट से जानें

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हेल्थ डेस्क, नई दिल्ली। ब्रेन ट्यूमर को लेकर लोगों में कई मिथक बने हुए हैं. ज्यादातर मानते हैं कि अगर किसी को ये दिमागी दिक्कत हुई है तो इसका इलाज ऑपरेशन ही है. एक्सपर्ट के जरिए इससे जुड़े मिथक और फैक्ट्स जानें.

ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही अधिकांश लोगों के मन में सबसे पहला सवाल आता है, क्या अब ऑपरेशन कराना ही पड़ेगा? हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हर ब्रेन ट्यूमर के इलाज के लिए सर्जरी जरूरी नहीं होती. ट्यूमर का प्रकार, आकार, स्थान, मरीज की उम्र और लक्षणों की गंभीरता जैसे कई कारकों को ध्यान में रखकर ट्रीटमेंट का प्लान बनाया जाता है. डॉक्टर के अनुसार, आज के आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में ब्रेन ट्यूमर के इलाज के बहुत सारे ऑप्शन हैं जिनमें सर्जरी के अलावा रेडियोथेरेपी और स्टिरियोटैक्टिक रेडियोसर्जरी और केमोथेरेपी तथा टार्गेट्ड थेरेपी और एक्टिव सर्विलिएंस शामिल हैं.




फिलहाल, लोगों के मन में मिथक है कि अगर दिमाग में ट्यूमर हो गया है तो इसका एकमात्र इलाज सिर्फ ऑपरेशन है. वर्ल्ड ब्रेन ट्यूमर डे हर साल 8 जून को मनाया जाता है. इसका उद्देश्य लोगों को इस गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम के प्रति जागरूक करना है.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

न्यूरो सर्जन डॉक्टर प्रवीण गुप्ता कहते हैं, ये एक बहुत बड़ा गलत सोच है. लोग सोचते हैं कि एक बार जब किसी के शरीर में ब्रेन ट्यूमर पाया जाता है तो उसे ऑपरेशन ही कराना पड़ता है. असल में, इलाज का रास्ता हर मरीज के लिए अलग होता है. कुछ छोटे और धीरे-धीरे बढ़ने वाले ट्यूमर सालों तक बिना किसी अधिक गंभीर परेशानी के स्थिर रह सकते हैं और उन रोगियों के लिए, नियमित एमआरआई जांच और निगरानी पर्याप्त हो सकती है.”


विशेषज्ञ कहते हैं कि कई बिनाइन (गैर-कैंसर) ट्यूमर, विशेष रूप से यदि वे दिमाग के संवेदनशील हिस्सों से दूर हों और कोई लक्षण न पैदा कर रहे हों, तो डॉक्टर तुरंत ऑपरेशन की सलाह नहीं देते. इसके बजाय समय-समय पर स्कैन कर ट्यूमर की वृद्धि पर नजर रखी जाती है.

नजर आते हैं ये लक्षण

वहीं, डॉक्टर कहते हैं कि ट्यूमर का निरन्तर बढ़ना, सिरदर्द, दौरों (सीजर्स), दृष्टि संबंधी समस्याएं, शरीर के किसी हिस्से में कमजोरी या बोलने में कठिनाई जैसे लक्षण नजर आते हैं. उनके मुताबिक ऐसे लक्षण दिखने पर सर्जरी आवश्यक हो सकती है. डॉ. के अनुसार, “सिर्फ ट्यूमर को निकालना हमारा उद्देश्य नहीं है, बल्कि मरीज की न्यूरोलॉजिकल कार्यक्षमता और जीवन की गुणवत्ता को भी हम सुरक्षित रखने का प्रयास करते हैं. अतः कई बार सर्जरी के बजाय रेडियोथेरेपी या अन्य उपचार विकल्प चुनते हैं, खास तौर पर तब जब ट्यूमर ऐसे स्थान पर हो जहां ऑपरेशन से अधिक जोखिम हो जाये.”

ज्ञात हो कि, पिछले कुछ वर्षों में तकनीकी स्तर पर डेवलपमेंट ने ब्रेन ट्यूमर के उपचार को अधिक सुरक्षित और प्रभावी बनाने में मदद की है. हाई-रिज़ॉल्यूशन एमआरआई, न्यूरो-नेविगेशन, फंक्शनल ब्रेन मैपिंग और अवेक क्रेनियोटोमी जैसी आधुनिक तकनीकों ने जटिल सर्जरी को भी सुरक्षित बनाकर पहले से कहीं अधिक कुशल कर दिया है. “विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ मामलों में सर्जरी का उद्देश्य ट्यूमर को पूरी तरह हटाना नहीं, बल्कि उसका एक छोटा हिस्सा निकालकर बायोप्सी करना होता है. इससे ट्यूमर के प्रकार की सही पहचान की जा सकती है और उसके आधार पर आगे के उपचार की उपयुक्त योजना बनाई जाती है.

सोशल मीडिया पर मौजूद गलतफहमियां

वहीं, डॉक्टरों का मानना है कि इंटरनेट और सोशल-नेटवर्किंग साइट्स पर पाई जाने वाली अधूरी जानकारी के आधार पर अपने शारीरिक एवं चिकित्सा सम्बंधित फैसला न लें. ब्रेन ट्यूमर एक जटिल रोग है और हर रोगी की स्थिति अलग होती है, इसलिए उनके इलाज के निर्णय केवल न्यूरोसर्जनों, न्यूरो-ऑन्कोलॉजिस्ट और रेडिएशन ऑन्कोलॉजिस्ट की टीम द्वारा जांच के बाद ही लेने चाहिए. डॉ. के अनुसार, “यह आज ब्रेन ट्यूमर के निदान के साथ जीवन का अंत नहीं है.



दरअसल, कई मरीज बिना सर्जरी के ही लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं और जिन मरीजों को ऑपरेशन की जरूरत होती है, उन पर नई तकनीकों से सफलता मिलने की आशा काफी बढ़ गई है. सबसे जरूरी चीज है समय पर जांच और सही विशेषज्ञ से सलाह.”

फिलहाल, ब्रेन ट्यूमर का नाम सुनते ही आज भी लोगों में डर और चिंता पैदा हो जाती है, पर भरोसा मानिये, सब ट्यूमर के लिए सर्जरी जरूरी नहीं होती. वास्तव में जागरूकता के लिये बहुत कुछ किया जाता है पर यकीन मानिये, आवश्यक समय पर सही निदान तथा मेडिकलटीम की सलाह पर कई लोग बिनासर्जरी के भी अपनी जिंदगी सफल बनाते हैं.

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