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Chhatisgarh News/रायपुर। ग्राम नकटी के प्रभावित गरीब परिवारों के सिर से छत पहले ही छीन ली गई है, आज उन्हीं परिवारों को बिजली बिल थमाकर प्रशासन उनके जख्मों पर नमक छिड़कने का काम कर रहा है। यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं, बल्कि गरीबों के साथ अमानवीय और असंवेदनशील व्यवहार का उदाहरण है।
हालांकि, प्रदेश कांग्रेस कमेटी (ओबीसी विभाग) के कार्यकारी प्रदेश अध्यक्ष भावेश बघेल ने कहा कि जून माह में प्रशासन ने नकटी के अनेक गरीब परिवारों के मकानों को ध्वस्त कर दिया। कई परिवार आज भी खुले आसमान के नीचे या अस्थायी व्यवस्था में रहने को मजबूर हैं। ऐसे में जुलाई माह का बिजली बिल उन्हीं टूटे और उजड़े मकानों के नाम जारी कर देना यह साबित करता है कि प्रशासन को न तो गरीबों की पीड़ा का एहसास है और न ही उनकी वर्तमान स्थिति की कोई चिंता है।
वहीं, उन्होंने कहा कि जब किसी परिवार का घर ही नहीं बचा, बिजली कनेक्शन का उपयोग ही नहीं हो रहा, तब आखिर किस आधार पर बिजली बिल भेजा गया? यदि यह तकनीकी त्रुटि है तो इसे तत्काल सुधारा जाना चाहिए और यदि जानबूझकर किया गया है तो यह प्रभावित परिवारों को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का प्रयास है।

दरअसल, भावेश बघेल ने कहा कि नकटी के गरीब परिवार पहले ही अपने आशियाने, आजीविका और सम्मान की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें लगातार नए-नए तरीकों से परेशान किया जाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। सरकार और प्रशासन का दायित्व पीड़ितों को राहत और न्याय देना है, न कि उन्हें लगातार भय और उत्पीड़न के माहौल में जीने के लिए मजबूर करना।
फिलहाल, भावेश बघेल ने राज्य सरकार और प्रशासन से मांग की है कि नकटी के प्रभावित परिवारों को जारी किए गए बिजली बिलों को तत्काल निरस्त किया जाए। महिलाओं की निजता से जुड़े मामले की निष्पक्ष एवं समयबद्ध जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए तथा प्रभावित परिवारों का हर प्रकार का उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए।


















