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CJP Protest: CJP प्रोटेस्ट में आंसू गैस के इस्तेमाल के बाद जानिए यह कैसे काम करती है, इसमें कौन-से रसायन होते हैं, पुलिस कब इसका इस्तेमाल कर सकती है और इससे कैसे बचें.
CJP प्रोटेस्ट में क्यों हुआ आंसू गैस का इस्तेमाल?
ज्ञात हो कि बीते सोमवार (20 जुलाई 2026) को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संसद चलो मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह टकराव हुआ. हालात को काबू में करने और भीड़ को पीछे हटाने के लिए पुलिस ने लाठीचार्ज के साथ आंसू गैस के गोले भी छोड़े. इस दौरान कई प्रदर्शनकारी और पुलिसकर्मी घायल होने की बात सामने आई. इसके बाद से आंसू गैस को लेकर चर्चा तेज है. लोग जानना चाहते हैं कि यह क्या होती है और पुलिस इसका इस्तेमाल कब करती है.

आंसू गैस के गोले क्या होते हैं?
आंसू गैस के गोले में कई केमिकल मिले होते हैं. इसके संपर्क में आने पर आंखों में तेज जलन, पानी आना, खांसी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है. इसका मकसद आमतौर पर भीड़ को कुछ समय के लिए परेशान करके वहां से हटाना होता है. इसे अक्सर भीड़ को तितर-बितर करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है.
आंसू गैस में कौन-से रसायन होते हैं?
आंसू गैस को आम बोलचाल में गैस कहा जाता है, लेकिन इसमें इस्तेमाल होने वाला पदार्थ हमेशा गैस के रूप में नहीं होता. यह ठोस या तरल रसायन हो सकता है, जो हवा में कण या बूंदों के रूप में फैलता है. इसमें सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाले रसायनों में CS (क्लोरोबेंज़िलिडीन मैलोनोनिट्राइल) शामिल है. इसके अलावा CN (क्लोरोएसीटोफेनोन) और OC (ओलियोरेसिन कैप्सिकम) जैसे पदार्थ भी कुछ मामलों में इस्तेमाल किए जाते हैं.
आंसू गैस शरीर पर कैसे असर करती है?
आंसू गैस के संपर्क में आने के कुछ ही समय बाद इसका असर दिख सकता है. आंखों में तेज जलन और पानी आना, आंखें बंद होने जैसी स्थिति, खांसी और गले में जलन इसके आम असर हैं. कुछ लोगों को सांस लेने में भी परेशानी हो सकती है. ज्यादातर मामलों में इसके प्रभाव कुछ समय बाद कम हो जाते हैं. हालांकि, ज्यादा मात्रा में संपर्क या बंद जगह में इस्तेमाल होने पर असर गंभीर हो सकता है, खासकर सांस की बीमारी वाले लोगों पर.
पुलिस कब कर सकती है आंसू गैस का इस्तेमाल?
आंसू गैस का इस्तेमाल आमतौर पर तब किया जाता है, जब किसी प्रदर्शन या भीड़ के कारण कानून-व्यवस्था बिगड़ने का खतरा हो और भीड़ को हटाना जरूरी हो. पुलिस की कोशिश रहती है कि पहले लोगों को वहां से हटने या तितर-बितर होने की चेतावनी दी जाए. अगर चेतावनी के बाद भी भीड़ नहीं हटती और हालात बिगड़ने का खतरा बना रहता है, तो पुलिस भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आंसू गैस जैसे तरीकों का इस्तेमाल कर सकती है.
युद्ध में प्रतिबंधित, लेकिन प्रदर्शन में इस्तेमाल क्यों?
आंसू गैस को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगर इसका इस्तेमाल युद्ध में प्रतिबंधित है, तो पुलिस इसे प्रदर्शनों में कैसे इस्तेमाल करती है. अंतरराष्ट्रीय रासायनिक हथियार सम्मेलन के तहत युद्ध में आंसू गैस जैसे दंगा नियंत्रण एजेंटों के इस्तेमाल पर रोक है. वहीं, कानून-व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस के इस्तेमाल पर ऐसी ही रोक नहीं है. इसी वजह से पुलिस इसे भीड़ नियंत्रण के एक तरीके के तौर पर इस्तेमाल करती है, हालांकि इसके गलत इस्तेमाल को लेकर बहस होती रही है.
आंसू गैस से बचने के लिए क्या करें?
अगर किसी जगह आंसू गैस छोड़ी गई है, तो सबसे बेहतर तरीका है कि वहां से दूर हटकर खुली और साफ हवा वाली जगह पर जाएं. आंखों में जलन होने पर उन्हें साफ पानी से धोना मददगार हो सकता है. आंखों को रगड़ने से बचना चाहिए. अगर सांस लेने में ज्यादा परेशानी हो या लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए. अस्थमा या सांस से जुड़ी बीमारी वाले लोगों पर इसका असर ज्यादा गंभीर हो सकता है, इसलिए उन्हें खास सावधानी बरतनी चाहिए.


















