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Raksha Bandhan 2026: आजकल बाजार में फैंसी राखियों, सोने-चांदी के ब्रेसलेट से लेकर पारंपरिक कलावा और सूत के धागों का चलन है. लेकिन जब बात धर्म शास्त्र और ज्योतिषशास्त्र की आती है, तो सवाल उठता है कि भाई की कलाई पर सोने-चांदी की महंगी राखी बांधना अधिक शुभ है या कलावा-रेशम का साधारण धागा?
Raksha Bandhan 2026: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्रेम, स्नेह और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इस दिन बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और भाई उसकी रक्षा का वचन देता है. आजकल बाजार में सोने-चांदी से लेकर रेशम, मोती और कई तरह की डिजाइनर राखियां उपलब्ध हैं. बहनें भी भाई के लिए सोने-चांदी की राखियां लेना पसंद करती हैं. लेकिन ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि क्या सोने या चांदी की राखी बांधना ज्यादा शुभ होता है या फिर साधारण पवित्र धागे की राखी का धार्मिक महत्व अधिक है?
ज्योतिष और धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण उसकी पवित्रता, भावना और विधि-विधान माने जाते हैं. ज्योतिषाचार्य और पंडित निरंजन जी से जानते हैं भाई की कलाई पर किस तरह की राखी बांधना शुभ माना जाता है?
क्या कहते हैं ज्योतिषाचार्य?
वहीं, पंडित निरंजन जी का कहना है कि रक्षाबंधन पर बांधा जाने वाला रक्षा सूत्र केवल सजावटी धागा नहीं माना जाता. धार्मिक परंपरा में इसे भाई की मंगलकामना और सुरक्षा की भावना से जोड़ा गया है. बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसके सुख, स्वास्थ्य, लंबी आयु और समृद्धि की कामना करती है. इसलिए राखी कितनी महंगी है, इससे अधिक मायने उसमें जुड़ी श्रद्धा और शुभ भावना का होता है.
क्या सोने की राखी बांधना शुभ है?
बता दें कि, सोना भारतीय परंपरा में शुभ और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. इसलिए सोने की राखी को भी शुभ भाव से देखा जा सकता है. यदि परिवार की परंपरा है या भाई-बहन अपनी खुशी से सोने की राखी बांधते हैं, तो इसे शुभ अवसर पर पहनाया जा सकता है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि केवल सोने की राखी बांधने से भाई के जीवन में धन या सौभाग्य बढ़ जाएगा. धार्मिक दृष्टि से राखी का महत्व उसकी कीमत से तय नहीं होता.
चांदी की राखी का क्या महत्व है?
ज्ञात हो कि, चांदी को भी भारतीय ज्योतिष और धार्मिक परंपराओं में शुभ धातु माना जाता है. इसे शीतलता और सकारात्मकता से जोड़ा जाता है. इसलिए चांदी की राखी भी भाई को बांधी जा सकती है. लेकिन यहां भी वही बात लागू होती है- चांदी की राखी को साधारण धागे की राखी से अनिवार्य रूप से अधिक शुभ मानने का कोई सार्वभौमिक धार्मिक नियम नहीं है.
साधारण धागे की राखी क्यों खास है?
वहीं, पारंपरिक रूप से रक्षा सूत्र या कलावा जैसे पवित्र धागे का धार्मिक महत्व काफी पुराना है. इसमें सादगी के साथ रक्षा और मंगलकामना की भावना जुड़ी होती है. इसलिए अगर कोई बहन अपने भाई की कलाई पर साधारण, स्वच्छ और पवित्र धागे से बनी राखी बांधती है, तो इसे कम शुभ नहीं माना जाना चाहिए. राखी की सादगी उसके धार्मिक महत्व को कम नहीं करती.
भाई की कलाई पर कौन-सी राखी बांधें?
दरअसल, ज्योतिषीय दृष्टिकोण से राखी चुनते समय केवल धातु या कीमत पर ध्यान देने के बजाय भाई की राशि, ग्रह स्थिति और शुभ रंग जैसी बातों को भी ध्यान में रखा जा सकता है. हालांकि, इसके लिए व्यक्तिगत कुंडली और ज्योतिषीय सलाह अलग-अलग हो सकती है. इसलिए सामान्य रूप से यह कहना बेहतर है कि सोने-चांदी की राखी शुभ हो सकती है, लेकिन साधारण पवित्र धागे की राखी भी पूरी श्रद्धा और विधि से बांधी जाए तो उसका महत्व कम नहीं होता.
राखी बांधते समय इन बातों का रखें ध्यान
फिलहाल, रक्षाबंधन के दिन बहन को राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर तिलक लगाना चाहिए और फिर शुभ मुहूर्त में राखी बांधनी चाहिए. राखी बांधते समय भाई की सुख-समृद्धि और मंगल की कामना करना शुभ माना जाता है. राखी बहुत ढीली या इतनी कसी हुई न बांधें कि कलाई पर परेशानी हो.


















