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नई दिल्ली। नेपाल ग्लेशियर से जुड़ी अचानक बाढ़ ने हिमालयी खतरे की चिंता बढ़ाई है. फिलहाल, एक ग्लेशियल झील के फटने के बाद भी तिब्बत के पोइक्यू बेसिन की अब भी 7 ऐसी झीलें मौजूद हैं जो कभी भी फट सकती हैं.
नेपाल के रसुवा में 26 अगस्त को ग्लेशियर कॉलैप्स के चलते आई अचानक बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है. हजारों लोग लापता है. इसमें करीबन 300 से ज्यादा संख्या में भारतीय भी हैं. इस घटना नेहिमालय में ग्लेशियल झीलों और ग्लेशियरों से जुड़े खतरे को फिर दुनिया के सामने ला दिया है.
नेपाली अधिकारियों के मुताबिक, चीन की तरफ से मिली शुरुआती सैटेलाइट तस्वीरों में यह संकेत मिला है. ग्लेशियल के पिघलने से बने अस्थायी झील के टूटने के संकेत मिले हैं. साथ ही यह भी कहा जा रहा है कि संभावना यह भी हो सकता है एक बड़े ग्लेशियर का हिस्सा करीबन 5,200 मीटर की ऊंचाई से टूटकर लगभग 1,200 मीटर नीचे घाटी में जा गिरा.
यही दो वजह हो सकती है जिसके चलते नदी में अचानक पानी, मलबे और बोल्डर का जबरदस्त बहाव पैदा हुआ और नेपाल के रसुवा इलाके में विनाशकारी फ्लैश फ्लड आ गई. फिलहाल, जब तक घटना की असल और अधिकारिक वजह नहीं सामने आ जाती है तब तक सीधे तौर पर GLOF यानी ग्लेशियल लेक ऑउटबर्स्ट कहना जल्दबाजी होगी.
नेपाल में ग्लेशियल झीलों के फटने का खतरा क्यों बढ़ा?
इस घटना ने तिब्बत के उस पूरे इलाके में मौजूद ग्लेशियल झीलों के खतरे पर बड़ा सवाल जरूर खड़ा कर दिया है. खासकर पोइक्यू नदी बेसिन को लेकर वैज्ञानिक पहले से चेतावनी देते रहे हैं. कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रेस में प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक 1964 से 2017 के बीच इस बेसिन में ग्लेशियल झीलों का कुल क्षेत्रफल करीब 110 फीसदी बढ़ गया. इसी अध्ययन में तेजी से बढ़ रही 8 झीलों को संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झील माना गया था.
पोइक्यू नदी बेसिन तिब्बत (चीन) के स्वायत्त क्षेत्र में स्थित एक उच्च पर्वतीय नदी द्रोणी है, जिसे नेपाल में नीचे की ओर आने पर भोते कोशी और सुन कोशी के नाम से जाना जाता है. इसका साफ अर्थ कि नेपाल और उससे सटे हिमालयी इलाकों वाले भारत जैसे देशों में अब भी रसूवा जैसी घटनाओं की आशंका बनी हुई है.
ग्लेशियल झील क्या होती है?
▪️जब कोई ग्लेशियर पीछे हटता है तो उसके सामने या किनारे ऐसी जगह बन सकती है जहां पिघला हुआ पानी जमा होने लगता है.
▪️कई बार ग्लेशियर के पीछे हटने से बनी झील के सामने बर्फ, चट्टानों और मिट्टी का प्राकृतिक बांध होता है.
▪️यही झील धीरे-धीरे बड़ी होती जाती है.समस्या तब शुरू होती है जब झील में पानी का दबाव बढ़ता जाता है.
फिर कोई बाहरी घटना इस प्राकृतिक बांध को कमजोर कर देती है.
▪️ग्लेशियर का बड़ा हिस्सा झील में गिरना, हिमस्खलन, भूस्खलन, भूकंप या तेजी से बढ़ता जलस्तर ऐसे ट्रिगर हो सकते हैं.
▪️बांध टूटते ही झील का पानी कुछ ही समय में नीचे की ओर बेहद तेज रफ्तार से बह सकता है. ▪️इसे ग्लेशियल लेक ऑउटबर्स्ट फ्लड यानी GLOF कहा जाता है.
GLOF से आने वाली बाढ़ क्यों ज्यादा तबाही वाली मानी जाती है?
GLOF को सामान्य बाढ़ से ज्यादा खतरनाक इसलिए माना जाता है क्योंकि इसमें सिर्फ पानी नहीं बहता.पानी अपने साथ बर्फ, चट्टान, मिट्टी और भारी मलबा भी लेकर आता है, जो बेहद विनाशकारी साबित होता है. इसके बहने की रफ्तार इतनी तेज होती है कि रास्ते में आने वाले पुल, सड़क, गांव और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट तबाह हो सकते हैं.2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया गया है कि हिमालय और तिब्बती पठार के कई इलाकों में ग्लेशियल झीलों का विस्तार हो रहा है. इनके प्राकृतिक बांध धीरे-धीरे कमजोर हो रहे हैं.
फिर 8 झीलों के खतरनाक स्तर पर पहुंचने वाली बात कहां से आई?
▪️2019 में जर्नल ऑफ ग्लेशियोलॉजी में में प्रकाशित शोध ने केंद्रीय हिमालय के पोइक्यू नदी बेसिन का 1964 से 2017 तक अध्ययन किया. वैज्ञानिकों ने पाया कि इस दौरान झीलों का कुल क्षेत्रफल लगभग 110 फीसदी बढ़ा.
▪️शोधकर्ताओं ने उन झीलों को ज्यादा गंभीर माना जिनका क्षेत्रफल इस अवधि में 150 फीसदी से ज्यादा बढ़ा था.
▪️इस आधार पर 8 झीलों को संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झील की श्रेणी में रखा गया.
इन झीलों के नाम गालोंगको, गांग्शिको, जियालोंगको, सिरेनमाको, ताराको, बेइहू, कावुकुदेंको और यूमोजान थे
▪️खतरे का आंकलन झील के आकार, उसके बढ़ने की रफ्तार, ग्लेशियर की स्थिति, प्राकृतिक बांध और नीचे मौजूद आबादी के तहत किया गया था.
हालांकि, बाद की की रिसर्च में इसी पोइक्यू नदी बेसिन की 7 झीलों को संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियल झील श्रेणी में रखा गया. 2021 के एक अध्ययन के मुताबिक गालोंगको, गांग्शिको, जियालोंगको, सिरेनमाको, ताराको, बेइहू, कावुकुदेंको ऐसी झीलें थीं, जिनके ग्लेशियल लेक ऑउटबर्स्ट फ्लड में तब्दील होने का खतरा ज्यादा था.
साल 2023 में नेचर कम्यूनिकेशन जर्नल में भी में प्रकाशित एक बड़े अध्ययन ने पूरे थर्ड पोल क्षेत्र में 1,499 ऐसी ग्लेशियल झीलों का आकलन किया, जिनके जिनके ग्लेशियल लेक ऑउटबर्स्ट फ्लड में तब्दील होने का खतरा ज्यादा था.. इनमें 85 को बहुत उच्च जोखिम और 113 को उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया. इसी अध्ययन में पोइक्यू नदी बेसिन की 7 झीलों को बहुत ज्यादा रिस्क वाला बताया गया.

ग्लेशियर पिघलने से खतरा कैसे बढ़ता है?
दरअसल,-जैसे तापमान बढ़ता है, ग्लेशियर का बर्फीला हिस्सा पिघलता और पीछे हटता है. पीछे हटते ग्लेशियर के सामने पानी जमा होकर झील का आकार बना सकता है. कैंब्रिज की स्टडी के मुताबिक1964 से 2017 के बीच पूरे पोइक्यू नदी बेसिन में ग्लेशियरों की औसत मोटाई में कमी आई. जिन 8 संभावित खतरनाक झीलों से जुड़े ग्लेशियर थे, वहां उसके पतले की दर पूरे क्षेत्र के औसत से ज्यादा थी. इन ग्लेशियरों की औसत पतले होने की दर लगभग 0.71 मीटर प्रति वर्ष दर्ज की गई. यानी ग्लेशियर जितना पीछे हटेगा, कई परिस्थितियों में उसके सामने झील के फैलने की जगह उतनी ही बढ़ सकती है. झील बड़ी होने का मतलब यह भी है कि भविष्य में अगर प्राकृतिक बांध टूटता है तो ज्यादा पानी नीचे की ओर जा सकता है.
कोई ग्लेशियल झील कब फटने वाली होती है?
किसी ग्लेशियल झील का बड़ा होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि वह तुरंत फटने वाली है. सबसे अहम तथ्य यह है कि झील के सामने किस तरीके का प्राकृतिक बांध है. वह कितना स्थिर है.आसपास की ढलान कितनी अस्थिर है, ग्लेशियर झील के कितने करीब है और वहां हिमस्खलन या भूस्खलन की कितनी संभावना है. कैंब्रिज की स्टडी में भी पाया गया कि 8 संभावित खतरनाक झीलों में से 4 झीलें अपने भौगोलिक रूप से संभव अधिकतम विस्तार के करीब पहुंच चुकी थीं और उनका विस्तार रुक गया था. दो और झीलों के जल्द अपने अधिकतम विस्तार तक पहुंचने का अनुमान था. वहीं, दो झीलों के लंबे समय तक बढ़ते रहने की संभावना जताई गई थी. यानी की 4 झील ऑउटबर्स्ट तो बहुत खतरनाक स्तर पर थी.


















