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नई दिल्ली। चिराग पासवान ने साल 2020 का अपना एक पुराना संसदीय भाषण भी साझा किया है. उन्होंने बताया कि 10 फरवरी 2020 को उन्होंने संसद में आरक्षण के मुद्दे को मजबूती से उठाया था. उनका कहना है कि आरक्षण की व्यवस्था में किसी भी तरह का बदलाव उनकी पार्टी को मंजूर नहीं है.
‘आरक्षण कोई खैरात नहीं’
चिराग पासवान ने कहा कि आरक्षण किसी की दया, अनुकंपा या खैरात नहीं है. यह देश के संविधान से मिला अधिकार है. इसलिए आरक्षण को लेकर किसी भी तरह का बदलाव सोच-समझकर ही होना चाहिए.
उन्होंने अपने पुराने भाषण के जरिए यह संदेश देने की कोशिश की कि आरक्षण को लेकर उनकी पार्टी की सोच पहले भी स्पष्ट थी और आज भी वही है. उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय और संविधान में मिले अधिकारों की रक्षा उनकी पार्टी की प्राथमिकता है.
‘जब तक चिराग पासवान जिंदा है…’
चिराग पासवान ने चुनाव प्रचार के दौरान का एक वीडियो भी शेयर किया है. इस वीडियो में मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी मौजूद हैं. वीडियो के कैप्शन में चिराग पासवान ने लिखा, “जब तक चिराग पासवान जिंदा है, तब तक न संविधान को कोई खतरा है, न आरक्षण को कोई खतरा है.”
इस बयान के जरिए उन्होंने आरक्षण के मुद्दे पर अपना रुख और ज्यादा स्पष्ट किया है. उन्होंने कहा कि संविधान और आरक्षण दोनों की रक्षा को लेकर वह प्रतिबद्ध हैं.
आरक्षण की समीक्षा पर भी विरोध
चिराग पासवान ने सिर्फ आरक्षण खत्म करने का विरोध नहीं किया है. उन्होंने इसकी समीक्षा की किसी भी कोशिश का भी विरोध करने की बात कही है.
वहीं,ज्ञउन्होंने साफ कहा कि आरक्षण को खत्म करना तो दूर की बात है. अगर आरक्षण की समीक्षा करने की कोशिश भी की जाती है, तो उनकी पार्टी इसका कड़ा विरोध करेगी. उन्होंने सामाजिक न्याय को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
जंतर-मंतर के आंदोलन के बीच सामने आया बयान
दरअसल, दिल्ली के जंतर-मंतर पर आरक्षण व्यवस्था को लेकर आंदोलन चल रहा है. इसी बीच चिराग पासवान ने अपने पुराने वीडियो साझा कर इस मुद्दे पर अपनी बात रखी है.
फिलहाल, उनके इस कदम को राजनीतिक तौर पर भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पुराने भाषण और चुनाव प्रचार के वीडियो के जरिए उन्होंने यह बताने की कोशिश की है कि आरक्षण को लेकर उनकी पार्टी का रुख पहले से स्पष्ट रहा है.


















