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Chhattisgarh News/जगदलपुर। झीरम घाटी हमले के करीब 13 साल पुराने मामले में NIA की विशेष अदालत ने शनिवार को फैसला सुनाया। अदालत ने 10 आरोपितों को दोषी करार दिया है। उन्हें आगामी 16 सितंबर को सजा सुनाई जाएगी। कांग्रेस ने कोर्ट के इस फैसले को अधूरा न्याय बताया है। इससे पहले विशेष अदालत ने 12 अगस्त को दोनों पक्षों की अंतिम बहस पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रखा था। जिन धाराओं में आरोपितों को दोषी ठहराया गया है उनमें मृत्यु दंड का प्रावधान भी है।
राजनीतिक साजिश, सुरक्षा में चूक पर नहीं हुई जांच
वहीं, कांग्रेस विधि प्रकोष्ठ से जुड़े अवधेश झा ने NIA के फैसले को अधूरा न्याय बताया है। उन्होंने कहा कि पार्टी शुरुआत से ही इस कांड की जांच राजनीतिक साजिश और सुरक्षा में चूक के नजरिए से भी किए जाने की मांग करती रही है। जांच पूरी है लेकिन इन दोनों पहलुओं पर हुई जांच से पार्टी संतुष्ट नहीं हुई है। इसलिए यह अधूरा न्याय है।
खटखटाएंगे उच्च न्यायालय का दरवाजा
दरअसल, बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी ने कहा कि वे फैसले का विवरण देखकर आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी करेंगे। सभी अभियुक्तों को दोषी ठहराया गया है। उन्हें समान उद्देश्य में दोषी माना गया है।

परिवर्तन यात्रा पर हुआ था हमला, खत्म हुई थी एक पीढ़ी
फिलहाल, 25 मई 2013 के दिन कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के दौरान दरभा की झीरम घाटी में माओवादियों के घात लगाकर किए गए हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा और पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोगों की मौत हुई थी।


















