GK: क्या है डीप डिप्रेशन.! अर्नब तूफान से पहले IMD ने क्यों जारी किया इसका अलर्ट? आइए जानें!

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नई दिल्ली। बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन को लेकर IMD की चेतावनी जारी की है. जानें क्या होता है डीप डिप्रेशन, क्या यह चक्रवात ‘अर्नब’ पर असर डालेगा और कैसे दिखता है इसका असर.

बंगाल की खाड़ी में कुछ बदलाव हो रहे हैं. भारी बारिश, तूफान की भी आशंका मौसम विभाग ने जताई है. डीप डिप्रेशन की चेतावनी भी मौसम विज्ञानियों ने दी है. अगले दो दिन आंध्र प्रदेश, ओडिशा के तटवर्ती इलाकों में बेहद सतर्कता बरतने के हैं. इन्हीं वजहों से अरनब तूफान की चर्चा भी तेज हो चली है. मौसम विज्ञानी नजर रखे हुए हैं. स्थानीय प्रशासन सतर्क है. आइए, इसी बहाने समझते हैं कि आखिर क्या है डीप डिप्रेशन? मौसम विभाग ने क्यों दी चेतावनी? अरनब तूफान पर इसका क्या असर हो सकता है?


हालांकि, कम और सरल शब्दों में कहें तो डीप डिप्रेशन एक शक्तिशाली मौसमी सिस्टम है, लेकिन यह अपने आप में चक्रवाती तूफान नहीं होता. मौसम विभाग की चेतावनी का उद्देश्य भारी बारिश, तेज हवा और संभावित जलभराव से लोगों को पहले से सतर्क करना है. अर्नब तूफान का नाम तभी लागू होगा जब सिस्टम चक्रवाती तूफान की निर्धारित श्रेणी तक पहुंचे. इसलिए नाम को लेकर अटकलों के बजाय मौसम विभाग की रिपोर्ट्स पर नजर रखना जरूरी है और इस विषय को विस्तार से समझने के लिए कुछ अलग-अलग तथ्यों को भी देखना होगा.


बंगाल की खाड़ी में डीप डिप्रेशन का अनुमान

बंगाल की खाड़ी में बना कम दबाव का क्षेत्र पहले डिप्रेशन में बदला. इसके बाद इसके और मजबूत होकर डीप डिप्रेशन बनने का अनुमान जताया गया. भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने बताया कि यह सिस्टम पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ रहा है. इसके उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तट की ओर बढ़ने की संभावना थी. सिस्टम के विशाखापत्तनम और गोपालपुर के बीच तट पार करने का अनुमान था. उपलब्ध रिपोर्ट में इसके लिए 23 सितंबर की रात से 24 सितंबर की सुबह तक का समय बताया गया. इस दौरान तटीय और आसपास के इलाकों में भारी बारिश और तेज हवाओं का खतरा बताया गया.

क्या है डीप डिप्रेशन का मतलब?

डीप डिप्रेशन समुद्र के ऊपर बना एक मजबूत मौसमी सिस्टम होता है. यह सामान्य डिप्रेशन से ज्यादा शक्तिशाली होता है. इसमें हवाएं तेज हो सकती हैं. बादल घने हो सकते हैं. और आसपास के इलाकों में लगातार बारिश हो सकती है. मौसम विभाग ऐसी प्रणालियों को उनकी ताकत और हवा की गति के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखता है. डिप्रेशन में तीन मिनट की औसत सतही हवा की गति 31 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा होती है.

वहीं, डीप डिप्रेशन में यह गति करीब 52 से 61 किलोमीटर प्रति घंटा होती है. जब हवा की गति 63 किलोमीटर प्रति घंटा या इससे ज्यादा हो जाती है, तब सिस्टम को चक्रवाती तूफान की श्रेणी में रखा जा सकता है. इसलिए डीप डिप्रेशन और चक्रवाती तूफान एक ही चीज नहीं हैं. हर डीप डिप्रेशन चक्रवात नहीं बनता. उसे चक्रवात कहने के लिए उसकी ताकत और हवा की गति तय सीमा तक पहुंचनी चाहिए.


मौसम विभाग ने चेतावनी क्यों दी?

हालांकि, मौसम विभाग की चेतावनी का मुख्य कारण भारी बारिश और तेज हवाओं की आशंका थी. तटीय ओडिशा और उत्तर आंध्र प्रदेश में बारिश से निचले इलाकों में पानी भर सकता है. पहले से गीली जमीन वाले क्षेत्रों में बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है. नदियों और नालों का जलस्तर भी ऊपर जा सकता है.

ज्ञात हो कि, समुद्र में मौसम खराब होने पर मछुआरों और नावों के लिए खतरा बढ़ता है. ऊंची लहरें और तेज हवाएं समुद्री गतिविधियों को प्रभावित कर सकती हैं. बारिश के कारण सड़कों पर पानी भरने और यातायात धीमा होने की आशंका भी रहती है. मीडिया रिपोर्ट्स में ओडिशा के कई जिलों में स्कूल और आंगनवाड़ी केंद्र बंद करने की जानकारी दी गई. यह स्थानीय प्रशासन की एहतियाती कार्रवाई थी. ऐसी घोषणाएं जिले और समय के हिसाब से अलग हो सकती हैं.

अर्नब तूफान की चर्चा क्यों शुरू हुई?

वहीं अर्नब नाम को लेकर चर्चा इसलिए हुई क्योंकि उत्तर हिंद महासागर क्षेत्र में बनने वाले चक्रवातों के लिए नामों की एक सूची तय है. सूची में अगला चक्रवात बनने पर उसका नाम अरनब हो सकता है. यह नाम बांग्लादेश ने दिया है. लेकिन किसी सिस्टम के नामित चक्रवात बनने से पहले उसे चक्रवाती तूफान की निर्धारित श्रेणी तक पहुंचना जरूरी है. मौसम विभाग का पूर्वानुमान यह था कि सिस्टम डीप डिप्रेशन के रूप में तट पार कर सकता है. इसका अर्थ है कि अरनब नाम का इस्तेमाल होना तय नहीं था. केवल नाम सूची में होने से यह साबित नहीं होता कि तूफान बन चुका है या जरूर बनेगा.

किन इलाकों पर असर पड़ सकता है?

दरअसल सबसे ज्यादा असर उत्तर आंध्र प्रदेश और दक्षिण ओडिशा के तटीय क्षेत्रों पर पड़ने की आशंका थी. भारी बारिश का असर आसपास के जिलों तक भी जा सकता है. तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के हिस्सों में भी बारिश की संभावना बताई गई. हालांकि, हर जिले में बारिश की मात्रा एक जैसी नहीं होती. स्थानीय असर सिस्टम के रास्ते, उसकी गति और ताकत पर निर्भर करता है. भारी बारिश के समय निचले इलाकों, नदी किनारे और जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी जरूरी है. तेज हवा में पेड़ों, बिजली के खंभों और कमजोर ढांचों से दूरी रखना बेहतर है. समुद्र में जाने से पहले मछुआरों को मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की सलाह माननी चाहिए.

लोगों को क्या सावधानी रखनी चाहिए?

फिलहाल लोगों को मौसम विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों पर नजर रखना चाहिए. अफवाह या पुराने संदेशों को बिना जांचे साझा न करें. बारिश के दौरान जलभराव वाली सड़क से गुजरने से बचें. बिजली चमकने पर खुले मैदान और पेड़ों के नीचे न रुकें. जरूरी दवाइयां, पीने का पानी और फोन चार्ज रखने जैसी सामान्य तैयारी ऐसी स्थिति में मददगार हो सकती है.

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