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Chhattisgarh News/रायपुर। छत्तीसगढ़ विधानसभा में आज एक महत्वपूर्ण और चर्चित विधेयक ‘छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य विधेयक, 2026’ पारित कर दिया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए कहा कि इससे उन लोगों पर प्रभावी रोक लगेगी, जो अशिक्षा, गरीबी और अज्ञानता का फायदा उठाकर लोगों को लोभ-प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराते हैं। विधेयक का उद्देश्य मुख्यमंत्री ने कहा कि इस विधेयक का मुख्य उद्देश्य धर्मांतरण की प्रक्रिया को पारदर्शी और नियंत्रित बनाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब किसी भी व्यक्ति को धर्मांतरण करने या कराने से पहले निर्धारित प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य होगा।
वहीं, विधेयक के अनुसार, जो व्यक्ति धर्म परिवर्तन करना चाहता है या जो उसे धर्मांतरित कराना चाहता है, दोनों को प्राधिकृत अधिकारी के समक्ष पूर्व सूचना देना अनिवार्य होगा। सूचना मिलने के एक सप्ताह के भीतर संबंधित अधिकारी द्वारा नोटिस जारी किया जाएगा और इसकी जानकारी जिला की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक की जाएगी।
जांच के बाद ही मिलेगी अनुमति
दरअसल, नए कानून के तहत प्राधिकृत अधिकारी को यह जिम्मेदारी दी गई है कि वह एक माह के भीतर पूरे मामले की जांच करें। जांच के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि धर्मांतरण में कहीं लोभ, प्रलोभन, भय, दबाव या किसी प्रकार की जबरदस्ती शामिल तो नहीं है। यदि जांच में सब कुछ नियमानुसार और स्वेच्छा से किया जाना पाया जाता है, तभी धर्मांतरण की अनुमति दी जाएगी। विधेयक के पारित होने के बाद अब बिना अनुमति या किसी भी प्रकार के प्रलोभन, दबाव या गलत तरीके से किया गया धर्मांतरण अवैध माना जाएगा। इससे ऐसे मामलों पर कड़ी निगरानी और नियंत्रण संभव होगा।
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सामाजिक और प्रशासनिक प्रभाव
फिलहाल, इस कानून से धर्मांतरण से जुड़े विवादों में कमी आएगी और प्रशासन को मामलों की जांच में स्पष्ट दिशा मिलेगी। साथ ही, इससे समाज में पारदर्शिता और कानून का पालन सुनिश्चित होगा। हालांकि, इस विधेयक को लेकर अलग-अलग वर्गों में चर्चा भी तेज हो गई है और इसके प्रभाव को लेकर विभिन्न मत सामने आ सकते हैं।










