👇
हेल्थ डेस्क नई दिल्ली। अगर आप बीमारी से ठीक होने के बाद भी वही पुराना टूथब्रश इस्तेमाल कर रहे हैं, तो सावधान हो जाइए. विशेषज्ञों के अनुसार ब्रश पर जमा बैक्टीरिया और वायरस दोबारा संक्रमण का खतरा बढ़ा सकते हैं, इसलिए रिकवरी के बाद टूथब्रश बदलना जरूरी माना जाता है.
बीमारी के दौरान बैक्टीरिया और वायरस टूथब्रश के ब्रिस्टल्स पर जमा हो सकते हैं
रिकवरी के बाद वही ब्रश इस्तेमाल करने से दोबारा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है
डॉक्टर सलाह देते हैं कि कोल्ड, फ्लू, कोविड या गले के इन्फेक्शन के बाद टूथब्रश बदल लेना चाहिए
बेहतर ओरल हेल्थ के लिए ब्रश को साफ, सूखा रखें और हर 3-4 महीने में बदलें
हमारा टूथब्रश रोजाना हमारे मुंह, थूक, बैक्टीरिया और वायरस के सीधे संपर्क में आता है, जब हमें कोल्ड, फ्लू, गले का इन्फेक्शन या कोई अन्य संक्रामक बीमारी होती है, तब बीमारी पैदा करने वाले कीटाणु हमारे मुंह से निकलकर ब्रश के ब्रिस्टल्स पर जमा हो सकते हैं. डॉ. विसुजा चौधरी (एसोसिएट प्रोफेसर, दंत चिकित्सा विभाग, NIIMS मेडिकल कॉलेज और अस्पताल) बताती हैं कि आमतौर पर हम अपने टूथब्रश को बाथरूम में रखते हैं, जहां नमी अधिक होती है, ऐसी जगहों पर माइक्रोऑर्गैनिज्म्स यानी सूक्ष्म जीव आसानी से पनप सकते हैं और लंबे समय तक जीवित रह सकते हैं. यहीं वजह है कि बीमारी से ठीक होने के बाद भी पुराना ब्रश इस्तेमाल करना कई बार सेहत के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है.
हालांकि, जब हम बीमार होते हैं और रोज़ उसी ब्रश का इस्तेमाल करते हैं, तो वायरस और बैक्टीरिया बार-बार ब्रश पर जमा होते रहते हैं. कई रिसर्च में यह सामने आया है कि कुछ बैक्टीरिया और वायरस कई दिनों तक ब्रश के ब्रिस्टल्स पर एक्टिव रह सकते हैं. ऐसे में अगर बीमारी से रिकवर होने के बाद भी वही पुराना ब्रश इस्तेमाल किया जाए, तो शरीर दोबारा उन्हीं कीटाणुओं के संपर्क में आ सकता है. इससे रिकवरी में अधिक समय लग सकता है और दोबारा इन्फेक्शन होने का खतरा भी बढ़ सकता है.
ओरल हेल्थ पर पड़ता है असर
ज्ञात हो कि, खासतौर पर जब शरीर की इम्यूनिटी कमजोर होती है, तब मुंह में पहले से मौजूद सामान्य बैक्टीरिया भी तेजी से बढ़ सकते हैं. इसका असर ओरल हेल्थ पर पड़ता है और ब्रश पर माइक्रोबियल लोड यानी कीटाणुओं की संख्या बढ़ सकती है. यहीं कारण है कि बीमारी के बाद टूथब्रश बदलने की सलाह दी जाती है. अगर कोई ऐसी बीमारी हुई है जो एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आने से फैल सकती है, जैसे कोल्ड, फ्लू, गले का इन्फेक्शन, वायरल फीवर या कोविड, तो बीमारी से ठीक होने के बाद अपना ब्रश बदलना जरूरी माना जाता है. डॉक्टरों के अनुसार, जब आपके सभी सिम्पटम्स पूरी तरह ठीक हो जाएं और आप कम से कम 24 से 48 घंटे तक सामान्य महसूस करें, तब नया टूथब्रश इस्तेमाल करना सबसे बेहतर होता है. इससे ब्रश पर मौजूद बचे हुए कीटाणुओं से बचाव होता है और ओरल हाइजीन भी बेहतर बनी रहती है.
वहीं, कुछ बीमारियों में ज्यादा सावधानी रखने की जरूरत होती है. उदाहरण के लिए, अगर किसी को स्ट्रेप थ्रोट हुआ है, तो एंटीबायोटिक दवा शुरू करने के लगभग 24 घंटे के भीतर ब्रश बदल लेना चाहिए. इसी तरह, अगर किसी को उल्टी वाला पेट का इन्फेक्शन हुआ है, तो उल्टी बंद होने के तुरंत बाद ब्रश बदलना बेहतर माना जाता है, क्योंकि इससे कंटैमिनेशन यानी संक्रमण फैलने का खतरा कम होता है. कोविड जैसी बीमारी के बाद भी पूरी तरह रिकवर होने पर नया ब्रश इस्तेमाल करना सुरक्षित विकल्प हो सकता है.
सिर्फ ब्रश बदलना ही काफी नहीं-
दरअसल, सिर्फ ब्रश बदलना ही काफी नहीं है, उसकी सही तरीके से देखभाल करना भी उतना ही जरूरी है, सबसे पहले, टूथब्रश को हमेशा सीधा रखना चाहिए ताकि उसमें पानी जमा न हो और वह जल्दी सूख सके. ब्रश को इस्तेमाल करने के बाद उसे अच्छी तरह धोकर खुले में सूखने देना चाहिए, क्योंकि गीला ब्रश बैक्टीरिया के पनपने की जगह बन सकता है. साथ ही, कभी भी अपना टूथब्रश किसी दूसरे व्यक्ति के साथ शेयर नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे संक्रमण एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकता है.
फिलहाल, हर 3 से 4 महीने में टूथब्रश बदलना जरूरी माना जाता है अगर ब्रश के ब्रिस्टल्स मुड़ जाएं या खराब हो जाएं, तो उसे इससे पहले ही बदल देना चाहिए. खराब ब्रश न सिर्फ सही तरीके से सफाई नहीं कर पाता बल्कि मसूड़ों और दांतों को नुकसान भी पहुंचा सकता है.


















