GK: आजादी के समय भारत में कितने लोग पढ़े-लिखे थे? जानिए 1947 से अब तक लिटरेसी रेट का सफर

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India Literacy Rate: आजादी के समय 1947 में भारत में पढ़े-लिखे लोगों की कितनी संख्या थी. इस स्टोरी में हम आपको बता रहे हैं की साक्षरता दर में 1947 के बाद कितना बदलाव आया है.

आजादी के समय भारत कितना पढ़ा-लिखा था?

1947 में जब भारत आजाद हुआ, तब देश में पढ़ाई की हालत आज जैसी नहीं थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक उस समय करीब 18 प्रतिशत लोग ही पढ़ और लिख पाते थे. हालांकि जनगणना के आंकड़ों में आजादी के बाद 1951 का पहला आंकड़ा 18.33 प्रतिशत मिलता है. यानी उस दौर में देश की बड़ी आबादी पढ़ाई से दूर थी और गांवों में इसकी हालत और भी कमजोर थी.


1951 से शुरू हुई बदलाव की कहानी

1951 में भारत की लिटरेसी रेट 18.33 प्रतिशत थी. पुरुषों में यह 27.16 प्रतिशत और महिलाओं में सिर्फ 8.86 प्रतिशत थी. यानी पढ़ाई के मामले में महिलाओं की स्थिति काफी पीछे थी. इसके बाद सरकार ने स्कूलों की संख्या बढ़ाने और बच्चों को पढ़ाई से जोड़ने पर जोर दिया. 1961 तक देश की लिटरेसी रेट बढ़कर 28.30 प्रतिशत हो गई. यह बदलाव धीरे-धीरे आगे बढ़ता रहा.


1971 में भी बड़ी आबादी अनपढ़ थी

1971 की Census के मुताबिक भारत की लिटरेसी रेट 34.45 प्रतिशत पहुंच गई थी. पुरुषों की लिटरेसी रेट 45.96 प्रतिशत और महिलाओं की 21.97 प्रतिशत थी. इसका मतलब था कि देश में हर तीन लोगों में करीब एक व्यक्ति ही पढ़ा-लिखा था. हालांकि 1951 के मुकाबले काफी सुधार हुआ था. लेकिन महिलाओं की शिक्षा अभी भी बड़ी चुनौती बनी हुई थी, खासकर गांव और गरीब परिवारों में.




1981 से बढ़ने लगी रफ्तार

1981 में भारत की लिटरेसी रेट बढ़कर 43.57 प्रतिशत हो गई. पुरुषों में यह 56.38 प्रतिशत और महिलाओं में 29.76 प्रतिशत थी. इसके बाद देश में स्कूल और कॉलेजों की संख्या बढ़ने लगी और ज्यादा बच्चे पढ़ाई से जुड़ने लगे. शिक्षा को लेकर लोगों की सोच में भी धीरे-धीरे बदलाव आया. फिर भी उस समय करीब आधी आबादी पढ़ने-लिखने से दूर थी.


1991 और 2001 में बड़ा बदलाव

1991 में भारत की लिटरेसी रेट 52.21 प्रतिशत हो गई. इसके दस साल बाद 2001 में यह बढ़कर 64.83 प्रतिशत पहुंच गई. 2001 में पुरुषों की लिटरेसी रेट 75.26 प्रतिशत और महिलाओं की 53.67 प्रतिशत थी. यानी पहली बार महिलाओं की लिटरेसी रेट भी 50 प्रतिशत के पार पहुंच गई. इस दौर में बच्चों को स्कूल भेजने और शिक्षा को बढ़ावा देने वाली कई योजनाओं ने भी असर दिखाया.


2011 में 74 प्रतिशत लोग पढ़े-लिखे

2011 Census में भारत की लिटरेसी रेट 74.04 प्रतिशत दर्ज हुई. पुरुषों में यह 82.14 प्रतिशत और महिलाओं में 65.46 प्रतिशत थी. यानी 1951 के मुकाबले देश की लिटरेसी रेट चार गुने से भी ज्यादा बढ़ चुकी थी. महिलाओं की स्थिति में भी काफी सुधार आया. हालांकि पुरुषों और महिलाओं के बीच अभी भी करीब 17 प्रतिशत अंक का अंतर था, इसलिए पूरी तरह बराबरी की मंजिल अभी दूर थी.


2023-24 में लिटरेसी रेट 80.9 प्रतिशत

PLFS 2023-24 के मुताबिक भारत में 7 साल और उससे ज्यादा उम्र के लोगों की लिटरेसी रेट 80.9 प्रतिशत थी. यानी 2011 के 74.04 प्रतिशत के मुकाबले इसमें करीब 7 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई. लेकिन यहां एक बात समझना जरूरी है कि 2011 का आंकड़ा Census से आया था, जबकि 2023-24 का आंकड़ा सर्वे से आया है. इसलिए दोनों आंकड़ों की सीधी तुलना सावधानी से करनी चाहिए.


आगे बढ़ा भारत, लेकिन अंतर अभी बाकी

आज भारत की लिटरेसी रेट आजादी के समय के मुकाबले काफी ज्यादा है. फिर भी हर राज्य और हर इलाके की तस्वीर एक जैसी नहीं है. कुछ राज्यों में लिटरेसी रेट 90 प्रतिशत से ऊपर है, जबकि कुछ जगह यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है. गांव और शहर के बीच भी फर्क दिखता है. महिलाओं की शिक्षा में भी बड़ा सुधार हुआ है, लेकिन स्कूल छोड़ने और पढ़ाई की गुणवत्ता जैसे सवाल अभी बाकी हैं.

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