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General knowledge;अमेरिका में काम कर रहे भारतीय कितना कमाते हैं? नई रिपोर्ट में भारतीय प्रोफेशनल्स की औसत सैलरी, H-1B वीजा, अमेरिकी कर्मचारियों से तुलना और कमाई के बड़े कारणों का खुलासा हुआ है.
ज्यादा सैलरी के लिए विदेश जाते हैं भारतीय
बेहतर नौकरी, ज्यादा सैलरी और अच्छी लाइफ के लिए हर साल हजारों भारतीय अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और दूसरे देश जाते हैं. अगर आप भी सोचते हैं कि अमेरिका जाकर लोग कितना कमाते होंगे, तो नया डेटा चौंकाने वाला है.
अमेरिका में भारतीयों की कमाई कितनी है?
Newsweek की नई रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में काम कर रहे भारतीय नागरिकों की मीडियन सालाना कमाई करीब 1.46 लाख अमेरिकी डॉलर बताई गई है. भारतीय रुपये में यह रकम लगभग 1.25 करोड़ रुपये सालाना के आसपास बैठती है.

अमेरिकी ग्रेजुएट्स से कितनी ज्यादा कमाई?
डेटा के अनुसार, अमेरिका में जन्मे कॉलेज ग्रेजुएट्स की औसत सालाना कमाई करीब 87,000 डॉलर यानी लगभग 74 लाख रुपये बताई गई. आसान शब्दों में कहें तो भारतीय प्रोफेशनल्स की कमाई इससे करीब दो-तिहाई ज्यादा दर्ज की गई.
स्टूडेंट वीजा से पहुंचे लोग भी ज्यादा कमा रहे
रिपोर्ट में ये बताया गया है कि जो लोग पहले स्टूडेंट वीजा पर अमेरिका पहुंचे और बाद में नौकरी करने लगे, उनकी मीडियन कमाई करीब 1.15 लाख डॉलर यानी लगभग 98 लाख रुपये सालाना रही.
H-1B वीजा को लेकर विवाद क्यों हो रहा?
बहुत समय से बहस चलती रही है कि कुछ कंपनियां H-1B वीजा के जरिए विदेशी कर्मचारियों को कम सैलरी पर रखती हैं. कुछ रिसर्च में दावा किया गया कि समान नौकरी में कुछ H-1B वर्कर्स की कमाई अमेरिकी कर्मचारियों से औसतन 16% तक कम हो सकती है.
भारतीयों की कमाई ज्यादा क्यों दिख रही है?
रिपोर्ट के मुताबिक, बड़ी वजह सेक्टर है. अमेरिका में बहुत से भारतीय टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और हाई-पेइंग प्रोफेशन में काम करते हैं. इसी वजह से उनकी कुल कमाई का औसत ऊपर चला जाता है.
उम्र का भी कमाई में बड़ा रोल
रिसर्च में बताया गया कि कम उम्र के H-1B कर्मचारी कई मामलों में अमेरिकी कर्मचारियों से ज्यादा कमाई करते हैं. वहीं कुछ ज्यादा उम्र वाले कर्मचारियों की कमाई कम देखी गई. क्योंकि उनमें कई लोग कम वेतन वाले आउटसोर्सिंग रोल्स में काम करते हैं.
H-1B को लेकर अमेरिका सख्त
अमेरिका हर साल करीब 85,000 नए H-1B वीजा जारी करता है. इनमें 20,000 वीजा अमेरिका से एडवांस डिग्री लेने वाले छात्रों के लिए रिजर्व रहते हैं. इस वीजा सिस्टम पर लगातार राजनीतिक बहस भी चलती रहती है.
ट्रंप की नई फीस पर कोर्ट ने दिया झटका
2025 में डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन ने नए H-1B आवेदन पर 1 लाख डॉलर यानी करीब 86 लाख रुपये फीस लगाने की कोशिश की थी. लेकिन 2026 में अमेरिकी अदालत ने इस फैसले को रोक दिया और कहा कि ऐसी फीस लागू करने का अधिकार सरकार के पास नहीं था.


















