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लाइफस्टाइल डेस्क। आस्टियोपोरोसिस हड्डियों से जुड़ी ऐसी बीमारी है, जिसमें हड्डियों का घनत्व और मजबूती धीरे-धीरे कम होने लगती है। इसे साइलेंट बीमारी भी कहा जाता है।
क्योंकि शुरुआती चरण में इसके स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। हड्डी रोग विशेषज्ञ, डाॅ. यूडी सक्सेना के अनुसार कई बार मामूली चोट या गिरने के बाद फ्रैक्चर होने पर इसका पता चलता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका खतरा बढ़ सकता है।
कैल्शियम और विटामिन-डी की कमी, शारीरिक गतिविधि का अभाव, धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन भी हड्डियों को कमजोर कर सकता है।
लगातार कमर दर्द, लंबाई कम होना या बार-बार फ्रैक्चर होना इसके संभावित संकेत हो सकते हैं। हड्डियों को मजबूत रखने के लिए नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और पर्याप्त कैल्शियम-विटामिन डी जरूरी है।
धूप में उचित समय बिताना भी फायदेमंद हो सकता है। जिन लोगों में हड्डियों की कमजोरी का जोखिम अधिक है, उन्हें डाॅक्टर की सलाह से बोन डेंसिटी जांच करानी चाहिए। समय पर जांच और उपचार से फ्रैक्चर के खतरे को कम किया जा सकता है।


















