👇
Why Ganesh has Elephant Head:माता पार्वती द्वारा निर्मित गणेश जी ने जब शिव जी का मार्ग रोका, तो क्रोधित शिव ने उनका सिर काट दिया. बाद में, शिव ने हाथी का सिर लगाकर उन्हें नया जीवन दिया और सभी देवताओं में प्रथम पूज्य का वरदान प्रदान किया.
Why Ganesh has Elephant Head: हिंदू धर्म में महादेव के पुत्र भगवान गणेश को विघ्नहर्ता कहा जाता है. सबसे प्रथम उन्हीं की पूजा की जाती है. इसलिए भगवान गणेश को प्रथम पूज्य कहा जाता है. किसी भी पूजा-पाठ या शुभ काम की शुरुआत भगवान गणेश के पूजन से पहले नहीं की जाती. मान्यता है कि भगवान गणेश के पूजन से शुरू हुए किसी भी काम विघ्न उत्पन्न नहीं होता. शास्त्रों में कई प्रसिद्ध और रहस्यमयी कहानियां मिलती हैं.
ज्ञात हो कि, विघ्नहर्ता भगवान गणेश की जन्म कथा भी इन्हीं प्रसिद्ध और रहस्यमयी कहानियों में शामिल है. मान्यता है कि माता पार्वती ने अपने शरीर के उबटन से एक बालक बनाकर उसमें प्राण डाल दिए. वही बालक आगे चलकर भगवान गणेश के रूप में जाने गए. कहा जाता है कि माता पार्वती ने गणेश जी को अपने द्वार की रक्षा दायित्व सौंपा था. उसी समय महादेव ने गणेश जी का सिर काट दिया था. आइए ये रोचक कथा जानते हैं.
पौराणिक कथा के अनुसार…
पौराणिक कथा के अनुसार, माता पार्वती गणेश जी को अपने द्वार की रक्षा का दायित्व सौंपकर चली गईं. उस समय महादेव वहां उपस्थित नहीं थे. गणेश जी अपनी माता की आज्ञा का पूरी तरह पालन कर रहे थे. कुछ समय बाद शिव जी वहां पहुंचे द्वार से भीतर जाने लगे, लेकिन गणेश जी ने उनको ऐसा करने से रोक दिया. गणेश जी भगवान शिव को नहीं पहचानते थे.
वहीं, गणेश जी ने महादेव से कहा कि उनकी माता की आज्ञा के बिना कोई भीतर नहीं जा सकता. ये बात भगवान शिव को बुरी लग गई. फिर धीरे-धारे दोनों में विवाद बढ़ता ही गया. भगवान शिव के गण और देवता गणेश जी को समझाने में जुट गए, लेकिन गणेश जी अपनी बात पर डटे रहे. इधर भगवान शिव का क्रोध बढ़ता ही गया और अंत में उन्होंने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर काट दिया.
शिव जी ने किया जीवनदान देने का फैसला
दरअसल, जब माता पार्वती को इस बारे में पता चला तो वो बहुत क्रोधित और दुखी हुईं. उस समय उनके क्रोध ने पूरे संसार को संकट में डाल दिया था. देवताओं ने भगवान शिव से स्थिति को संभालने का आग्रह किया. तब भगवान शिव ने अपनी गलती महसूस हुई और उन्होंने गणेश जी को जीवनदान देने का फैसला किया. भगवान शिव ने अपने गणों को उत्तर दिशा की ओर सिर करके सोए पहले जीव का सिर लाने को कहा.
फिलहाल, गणों को हाथी का एक बच्चा उत्तर दिशा में सिर करके सोता हुआ मिला. गण हाथी के बच्चे का सिर लेकर महादेव के पास आए. इसके बाद भगवान शिव ने गणेश जी को नया जीवन दिया. साथ ही उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूजनीय होने का वरदान भी दिया. तभी से सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाने लगी.
Disclaimer:
इस खबर में दी गई जानकारी धार्मिक मान्यताओं और सामान्य जानकारियों पर आधारित है. janjantaksandesh.com इसकी पुष्टि नहीं करता है.


















