गृह मंत्री अमित शाह के ‘वनवासी’ संबोधन पर गरमाई सियासत, कांग्रेस पार्षद योजना शिवशंकर पैंकरा का तीखा विरोध

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लैलूंगा/रायगढ़। छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के लैलूंगा नगर पंचायत के वार्ड क्रमांक 6 के कांग्रेस पार्षद श्रीमती योजना शिवशंकर पैकरा ने गृह मंत्री अमित शाह के “वनवासी” शब्द पर आपत्ति जताई हैं उन्होंने कहा है ‘वनवासी’ जैसे शब्द का प्रयोग करना करोड़ों आदिवासियों की भावनाओं को आहत पहुंचाना है।

बता दें कि, गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज को ‘वनवासी’ कहने पर देश भर में सियासत गरमा गई है। इसके विरोध में आदिवासी कांग्रेस और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने गृह मंत्री के खिलाफ जमकर प्रदर्शन किए और कई स्थानों पर उनके पुतले भी फूंके गए।


विवाद और विरोध प्रदर्शन के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं:

▪️दिल्ली में दिया गया बयानः हाल ही में दिल्ली में आयोजित ‘जनजातीय संस्कृति समागम’ में गृह मंत्री ने आदिवासी समुदाय को संबोधित करने के लिए ‘वनवासी’ शब्द का इस्तेमाल किया था।

▪️कांग्रेस का रुखः कांग्रेस नेताओं, पार्षदों और कार्यकर्ताओं का आरोप है कि ‘वनवासी’ शब्द आदिवासी समुदाय के ऐतिहासिक संघर्ष, पहचान और विशिष्ट संस्कति को कमजोर करने की कोशिश किया जा रहा है।

वहीं पार्षद पैंकरा ने कहा “आदिवासी सिर्फ जंगल में रहने वाला समुदाय नहीं है, आदिवासी इस देश की मूल संस्कृति, परंपरा और पहचान के संवाहक हैं। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा आदिवासी समाज के लिए ‘वनवासी’ शब्द का इस्तेमाल बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है। यह शब्द आदिवासी समाज के ऐतिहासिक अस्तित्व, उनकी पहचान और उनके संवैधानिक अधिकारों को कम आंकने का प्रयास प्रतीत होता है।

उन्होंने कहा है कि मैं, नगर पंचायत लैलूँगा वार्ड क्रमांक 6 की कांग्रेस पार्षद श्रीमती योजना शिवशंकर पैंकरा , इस बयान पर कड़ी आपत्ति करती हूं। आदिवासी समाज को संविधान ने ‘अनुसूचित जनजाति’ और देश ने ‘आदिवासी’ के रूप में सम्मान दिया है। ऐसे में देश के इतने बड़े पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा ‘वनवासी’ जैसे शब्द का प्रयोग करोड़ों आदिवासियों की भावनाओं को आहत करता है।



बता दें कि, आदिवासी समाज ने हमेशा जल, जंगल और जमीन की रक्षा की है, देश की आजादी से लेकर राष्ट्र निर्माण तक अपना अमूल्य योगदान दिया है। उनकी पहचान को बदलने या कमजोर करने की किसी भी कोशिश को समाज कभी स्वीकार नहीं करेगा।

आगे उन्होंने कहा कि, मैं केंद्र सरकार से मांग करती हूं कि आदिवासी समुदाय के सम्मान और गरिमा का ध्यान रखते हुए भविष्य में ऐसी शब्दावली के प्रयोग न किया जाए और आदिवासी समाज से जुड़े मुद्दों पर संवेदनशीलता के साथ बात की जाए।

वहीं उन्होंने कहा कि, हमारी आदिवासी सम्मान से कोई समझौता नहीं होगा। हमारी पहचान, हमारा स्वाभिमान और हमारे अधिकार सर्वोपरि हैं, और हमारी आदिवासी अस्मिता से खिलवाड़ कतई बर्दाश्त नहीं नहीं किया जाएगा।

जय जोहार.! जय आदिवासी समाज.!”

समापन नारा

“जो आदिवासी का सम्मान करेगा, वही देश का सम्मान करेगा!” “पहचान पर चोट नहीं सहेंगे, आदिवासी सम्मान लेकर रहेंगे!” “जल-जंगल-जमीन और स्वाभिमान, यही है आदिवासी की पहचान!”

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