101 मर्डर आरोपी, 62 रेपिस्ट और 19 किडनैपर्स..छात्रों के संसद मार्च में कैसे पहुंचे ये लोग? गिरफ्तारी के लिए क्या कर रही पुलिस

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दिल्ली। दिल्ली पुलिस का कहना है कि वीडियो, CCTV फुटेज, मोबाइल डेटा और तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपियों की पहचान का काम लगातार जारी है. जिन लोगों की भूमिका हिंसा में सामने आएगी, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी.

NEET पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का छात्र आंदोलन खत्म हो चुका है. शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार (25 जुलाई 2026) को को इस्तीफा दिया और सरकार ने CJP की सभी 3 मांगें भी मान ली हैं. इस दौरान 20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में हुए छात्रों के ‘संसद मार्च’ के दौरान भड़की हिंसा की जांच भी निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुकी है. दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान हिंसा, पथराव, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिसकर्मियों पर हमले के आरोपियों की पहचान के लिए बड़े स्तर पर कैंपेन चलाया. इस दौरान ऐसी जानकारियां मिली हैं, जो छात्र आंदोलन को लेकर सवाल खड़े करती हैं.

दिल्ली पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई को छात्रों के संसद मार्च में 101 मर्डर आरोपी, 62 रेपिस्ट और 19 किडनैपर्स भी मौजूद थे. ये छात्रों के बीच कैसे पहुंचे, ये बड़ा सवाल है.

आइए जानते हैं पुलिस ने जंतर-मंतर पर चल रहे छात्र आंदोलन में पहुंचे इन अपराधियों और हिस्ट्रीशीटर को कैसे आइडेंटिफाई किया? पुलिस इनकी गिरफ्तारी के लिए क्या कर रही है:-

10 FIR दर्ज, हजारों घंटे की खंगाली जा रही फुटेज

दिल्ली पुलिस ने हिंसा से जुड़े मामलों में अब तक 10 FIR दर्ज की हैं. जांच एजेंसियां संसद मार्ग, जंतर-मंतर, इंडिया गेट और आसपास लगे हजारों CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच कर रही हैं. सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, मीडिया फुटेज और आम लोगों के रिकॉर्ड किए गए वीडियो भी सबूत के तौर पर जुटाए जा रहे हैं. पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जिन लोगों ने पुलिस पर हमला किया, बैरिकेड तोड़े, सरकारी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया या हिंसा भड़काई, उनकी अलग-अलग पहचान कर कार्रवाई की जाएगी.

हजारों प्रदर्शनकारियों का आपराधिक रिकॉर्ड कैसे हुआ वेरिफाई?

दिल्ली पुलिस किसी भी बड़े प्रदर्शन के बाद सिर्फ CCTV फुटेज देखकर कार्रवाई नहीं करती, बल्कि कई स्तरों पर जांच करती है. सबसे पहले प्रदर्शन स्थल पर लगे CCTV कैमरों, ड्रोन फुटेज, पुलिस बॉडी-वॉर्न कैमरों और मीडिया वीडियो से लोगों के चेहरे और गतिविधियों की पहचान की जाती है. इसके बाद इन चेहरों को पुलिस के Facial Recognition System (FRS) और Crime and Criminal Tracking Network & Systems (CCTNS) जैसे डेटाबेस से मैच किया जाता है. अगर किसी व्यक्ति का चेहरा पहले से मौजूद आपराधिक रिकॉर्ड से मेल खाता है, तो उसकी पूरी हिस्ट्री निकाली जाती है. इसके बाद संबंधित राज्य की पुलिस, स्थानीय थाने, गिरफ्तारी रिकॉर्ड और कोर्ट के दस्तावेजों के जरिए मैनुअल वेरिफिकेशन भी किया जाता है.

AI कैमरों से हो रही पहचान

जांच में सबसे अहम भूमिका AI बेस्ड फेस रिकग्निशन सिस्टम निभा रहा है. दिल्ली पुलिस छात्रों के प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्ड हुए चेहरों को अपराधियों के डेटाबेस से मैच करा रही है. पुलिस का दावा है कि इसी टेक्नीक से बड़ी संख्या में ऐसे लोगों की पहचान हुई है, जिनके खिलाफ पहले से गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं. यानी जो हिस्ट्रीशीटर रहे हैं.

Facial Recognition System (FRS) कैसे काम करता है?

FRS किसी व्यक्ति के चेहरे की तस्वीर को केवल फोटो की तरह नहीं देखता, बल्कि चेहरे के अलग-अलग बायोमेट्रिक फीचर्स का डिजिटल मैप तैयार करता है. इसमें आंखों के बीच की दूरी, नाक की बनावट, जबड़े का आकार, माथे की चौड़ाई और चेहरे के दूसरे प्वॉइंट का एनालिसिस किया जाता है. इसके बाद यह डिजिटल फेस-टेम्पलेट लाखों रिकॉर्ड वाले डेटाबेस से मिलाया जाता है. अगर पर्याप्त समानता मिलती है, तो सिस्टम संभावित मैच दिखाता है. हालांकि, कम रोशनी, मास्क, टोपी, धुंधली तस्वीर या अलग एंगल होने पर सिस्टम की सटीकता प्रभावित हो सकती है.

989 लोगों का मिला आपराधिक रिकॉर्ड

वहीं न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने दावा किया है कि संसद मार्च के दौरान हिंसा में शामिल 989 लोगों का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड मिला है:-

▪️101 लोग हत्या के मामलों के आरोपी
▪️हत्या की कोशिश के 62 आरोपी
▪️प्रदर्शन में दिखे 61 रेप के आरोपी
▪️284 लोगों पर डकैती और लूट के मामले दर्ज
▪️POCSO एक्ट के 6 आरोपी भी हुए आइडेंटिफाई
▪️92 लोगों पर महिलाओं और बच्चों के खिलाफ मामले
▪️आर्म्स एक्ट में 229 पर अलग-अलग थानों में केस
▪️छात्र प्रदर्शन में दिखे छिनौती के 135 आरोपी
▪️19 किडनैपर्स ने भी प्रदर्शन में लिया हिस्सा


2500 से ज्यादा संदिग्धों की पहचान

एक अन्य पुलिस कार्रवाई में जंतर-मंतर क्षेत्र में लगाए गए फेस रिकग्निशन कैमरों की मदद से 2,500 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई, जिनका आपराधिक रिकॉर्ड पहले से मौजूद है. हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का आपराधिक रिकॉर्ड होना अपने-आप में हिंसा में शामिल होने का सबूत नहीं है. हर मामले की अलग-अलग जांच की जा रही है.

पुलिसकर्मियों पर भी हुआ हमला

दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए. ACP जय प्रकाश ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उनके माथे पर पत्थर लगा, जिससे वे घायल हो गए. पुलिस का दावा है कि कई जवानों को पथराव और धक्का-मुक्की में चोटें आईं.

CJP ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप

दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने पुलिस की कार्रवाई को अत्यधिक बल प्रयोग वाला बताया है. संगठन ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर लाठीचार्ज किया गया और कई लोगों के साथ मारपीट हुई. CJP ने एक स्पेशल वेबसाइट भी शुरू की है, जहां लोग पुलिस कार्रवाई से जुड़े फोटो और वीडियो अपलोड कर सकते हैं. संगठन का कहना है कि इन सबूतों के आधार पर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा मामला

मामला अब सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है. शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया कि प्रदर्शनकारियों के खिलाफ फिलहाल कोई कठोर कार्रवाई न की जाए, नाबालिगों को रिहा किया जाए और प्रदर्शन से जुड़ी CCTV व अन्य डिजिटल फुटेज सुरक्षित रखी जाए.

आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस क्या कर रही है?

जिन लोगों पर हिंसा, बैरिकेड तोड़ने, पुलिस पर हमला, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप हैं, उन्हें दर्ज FIRs में आरोपी बनाया जा रहा है. इस मामले में कई FIR दर्ज की गई हैं, जिनमें हत्या के प्रयास सहित गंभीर धाराएं भी शामिल हैं. दिल्ली पुलिस ने कुछ संदिग्धों के नाम और CCTV तस्वीरें सार्वजनिक की हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी और तलाश अभियान चलाने की बात कही है.

क्या किसानों के आंदोलन में भी ऐसी तकनीक का इस्तेमाल हुआ है?

हां. दिल्ली पुलिस और अन्य सुरक्षा एजेंसियां पहले भी बड़े सार्वजनिक आयोजनों और प्रदर्शनों में निगरानी तकनीकों का इस्तेमाल कर चुकी हैं. 2020 के दिल्ली दंगों, किसान आंदोलन, गणतंत्र दिवस परेड, G20 शिखर सम्मेलन, जंतर-मंतर प्रदर्शनों और कई बड़े धार्मिक आयोजनों के दौरान CCTV नेटवर्क, ड्रोन निगरानी और Facial Recognition जैसी तकनीकों का इस्तेमाल हुआ है.

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