GK: कौन होते हैं नीली वर्दी वाले ये जवान? जो हर प्रदर्शन और दंगे में संभालते हैं मोर्चा..आइए जानें

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नई दिल्ली: सोमवार को दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान पुलिस के साथ नीली वर्दी फोर्स मोर्चा संभालती हुई दिखी. इसके बाद इस पुलिस फोर्स चर्चा हो रही है. इस स्टोरी में हम आपको इसी के बारे में बता रहे हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में यहां…

नीली वर्दी वाले जवान कौन हैं?

20 जुलाई 2026 को CJP के संसद चलो मार्च के दौरान दिल्ली में प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच कई जगह तनाव देखने को मिला. ऐसे हालात में दिल्ली पुलिस के साथ नीली वर्दी में एक खास फोर्स भीड़ को संभालने और स्थिति को कंट्रोल करती हुई नजर आई. इस फोर्स का नाम रैपिड एक्शन फोर्स यानी RAF. इसे खास तौर पर दंगे, हिंसा, बड़े प्रदर्शन और भीड़ को कंट्रोल करने जैसी मुश्किल परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया गया है.


क्या है RAF और कब हुई थी इसकी शुरुआत?

RAF यानी रैपिड एक्शन फोर्स, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल यानी CRPF की एक खास यूनिट है. इसकी शुरुआत 11 दिसंबर 1991 को नई दिल्ली में हुई थी. हालांकि इसे पूरी तरह से 7 अक्टूबर 1992 को एक्टिव किया गया. इसका मुख्य काम दंगे, हिंसा, बड़े प्रदर्शन और कानून-व्यवस्था से जुड़े मुश्किल हालात को संभालना है. इसके जवानों को इस तरह की परिस्थितियों में तेजी से कार्रवाई करने और भीड़ को नियंत्रित करने की खास ट्रेनिंग दी जाती है.


नीली वर्दी क्यों है RAF की पहचान?

RAF के जवान अपनी खास नीली वर्दी के लिए आसानी से पहचाने जाते हैं. इस वर्दी का रंग शांति का प्रतीक माना जाता है. RAF का आदर्श वाक्य ‘संवेदनशील पुलिसिंग के साथ मानवता की सेवा’ है. इसका मतलब है कि फोर्स का काम सिर्फ कानून-व्यवस्था बनाए रखना ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर आम लोगों की मदद करना भी है. RAF को अलग-अलग तरह के हालात के लिए खास ट्रेनिंग दी जाती है, जिससे वह कम समय में किसी भी जगह पहुंचकर स्थिति संभाल सके.


RAF की कमान किसके हाथ में होती है?

RAF की कमान एक वरिष्ठ अधिकारी के हाथ में होती है. इसकी बटालियनों का नेतृत्व कमांडेंट रैंक के अधिकारी यानी कमांडिंग ऑफिसर करते हैं. RAF में जवानों को भीड़ नियंत्रण और दंगा जैसी परिस्थितियों से निपटने के लिए खास ट्रेनिंग दी जाती है. फोर्स की तैनाती जरूरत के हिसाब से अलग-अलग राज्यों और शहरों में की जा सकती है. जब किसी इलाके में बड़ा प्रदर्शन, हिंसा या तनाव की स्थिति बनती है, तो स्थानीय पुलिस की मदद के लिए RAF को भी मौके पर भेजा जाता है.


प्रदर्शन और दंगे में RAF क्या करती है?

जब किसी प्रदर्शन के दौरान हालात बिगड़ने लगते हैं या भीड़ बेकाबू होने की आशंका होती है, तब RAF को तैनात किया जा सकता है. इसका मकसद भीड़ को नियंत्रित करना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना होता है. जवानों को ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए खास अभ्यास कराया जाता है. वे स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर काम करते हैं और स्थिति के अनुसार लोगों को पीछे हटाने या भीड़ को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की कोशिश करते हैं. इसका इस्तेमाल संवेदनशील इलाकों में भी किया जाता है.




सिर्फ दंगा कंट्रोल नहीं, राहत कामों में भी आगे

RAF की भूमिका सिर्फ प्रदर्शन और दंगा कंट्रोल तक सीमित नहीं है. बाढ़, भूकंप, चक्रवात और दूसरी आपदाओं के दौरान भी इसके जवान राहत और बचाव कार्यों में हिस्सा लेते हैं. जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों तक मदद पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में भी फोर्स की भूमिका रहती है. यही वजह है कि RAF को मुश्किल हालात में तेजी से काम करने वाली फोर्स के तौर पर देखा जाता है. इसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था के साथ लोगों की सुरक्षा में मदद करना भी है.


चुनाव, त्योहार और बड़े आयोजनों में भी तैनाती

देश में चुनाव, बड़े त्योहार और संवेदनशील आयोजनों के दौरान भी RAF की तैनाती की जा सकती है. ऐसे मौकों पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है और कई बार कानून-व्यवस्था को लेकर चुनौती पैदा हो सकती है. RAF के जवान स्थानीय प्रशासन और पुलिस के साथ मिलकर सुरक्षा व्यवस्था संभालते हैं. सांप्रदायिक तनाव या हिंसा की स्थिति में भी यह फोर्स अहम भूमिका निभाती है. इसके अलावा RAF की टुकड़ियां संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन में भी तैनात रही हैं.

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