26 दिन भूखा रहा भूखा, क्या अब भी साबित करनी पडे़गी ईमानदारी? अनशन तोड़ने से मचे बवाल पर वांगचुक का नया Video

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नई दिल्ली। NEET पेपर लीक के खिलाफ सोनम वांगचुक 26 दिन से भूख हड़ताल पर थे. उन्होंने 27वें दिन गुरुवार देर रात 12:30 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजदूगी में अपना अनशन खत्म किया था.
सोनम वांगचुक अभी गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती हैं. उनकी हालत में सुधार हो रहा है।

NEET पेपर लीक और एजुकेशन सिस्टम के खिलाफ 26 दिन से भूख हड़ताल कर रहे सोशल एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने गुरुवार (23 जुलाई) की देर रात अपना अनशन तोड़ा. इसके बाद उनपर सरकार के दबाव में आने के आरोप लग रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स में अलग-अलग थ्योरी बनाई जा रही है. सोशल मीडिया पर भी रिएक्शन आ रहे हैं. इस बीच वांगचुक ने नया वीडियो जारी कर अपनी बात रखी है. सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X हैंडल पर पोस्ट किए गए वीडियो में पूछा- “मैं 26 दिन भूखा रहा हूं. क्या इसके बाद भी मुझे अपनी ईमानदारी साबित करने की जरूरत है?” उन्होंने अपने यू-ट्यूब चैनल पर आधे घंटे का डिटेल वीडियो शेयर किया है.



सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी के छात्र आंदोलन से 28 जून को जुड़े थे. इसी दिन से उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर NEET-UG पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में कथित गड़बड़ियों के खिलाफ छात्रों के समर्थन में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू की थी. उन्होंने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह की मौजदूगी में अपना अनशन खत्म किया था. इस दौरान नड्डा ने वांगचुक को जूस पिलाया था.

अनशन तोड़ने का बताया कारण

इससे पहले वांगचुक ने शुक्रवार (24 जुलाई) की सुबह जारी वीडियो मैसेज में कहा, “पिछले दो दिन से सरकार के साथ लगातार बातचीत चल रही थी. इस दौरान मेरी तीन प्रमुख मांगों पर चर्चा हुई. सरकार की ओर से इन मांगों पर लिखित आश्वासन मिलने के बाद मैंने भूख हड़ताल खत्म करने का फैसला लिया.”

सुबह के वीडियो में बताया था सरकार ने दिया क्या आश्वासन

वांगचुक ने कहा, “सरकार ने प्रदर्शनकारी छात्रों पर केस दर्ज नहीं करने, पेपर लीक और परीक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय करने के मुद्दे पर संसद में चर्चा कराने और आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिजन को उचित मुआवजा देने का आश्वासन दिया है.” वीडियो में वांगचुक ने कहा कि सरकार की ओर से शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कोई आश्वासन नहीं मिला, लेकिन उन्होंने इसे अनशन खत्म करने की अनिवार्य शर्त नहीं माना.

गीतांजलि अंग्मो ने भी किया पोस्ट

सोनम वांगचुक पर सरकार के दबाव में आने के आरोपों पर उनकी पत्नी गीतांजलि अंग्मो ने X पर एक भावुक पोस्ट किया है. गीतांजलि ने लिखा-“आलोचना करने की जल्दबाजी करने से पहले, जरा रुककर उस भावना को समझें जिसके तहत उन्होंने किसी बड़े मकसद के लिए 26 दिनों तक उपवास किया. आज वे ICU में हैं और उनका वजन 11 किलो कम हो गया है, क्योंकि उन्होंने आराम के बजाय त्याग को चुना. उन पर अपनी उम्मीदों और राजनीतिक हिसाब-किताब का बोझ डालने से पहले, कम से कम हम उनके प्रति थोड़ी सहानुभूति तो दिखा ही सकते हैं. निस्वार्थ सेवा वाले जीवन को परखने की काबिलियत हर किसी में नहीं होती. ऐसा करने के लिए पहले नैतिक स्तर हासिल करना पड़ता है. कृपया थोड़ा दिल से सोचें.”



विपक्षी सांसदों ने भी अनशन खत्म करने को कहा था

22 जुलाई को संसद के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों का एक डेलीगेशन सोनम वांगचुक से मिलने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचा था. इस डेलीगेशन में कांग्रेस के विवेक तन्खा, तृणमूल कांग्रेस की सागरिका घोष, CPIM के जॉन ब्रिटास, आम आदमी पार्टी के संजय सिंह समेत कई सांसद शामिल थे. सांसदों ने वांगचुक को एक संयुक्त पत्र सौंपकर अनशन समाप्त करने की अपील की. डेलीगेशन ने ये भी कहा था कि संसद में NEET पेपर लीक का मामला उठाया जाएगा. पहले इस लेटर पर 55 सांसदों के साइन थे. बाद में इनकी संख्या 65 हो गई थी.


वांगचुक के बारे में जानिए

सोनम वांगचुक सोशल और एनवायरमेंट एक्टिविस्ट, इनोवेटर, टीचर और साइंटिस्ट हैं. उनका जन्म 1966 में लेह जिले के अल्ची के पास, लद्दाख में हुआ था. उनके गांव में स्कूल न होने के कारण 9 साल की उम्र तक उनका किसी स्कूल में दाखिला नहीं हुआ. 9 साल की उम्र में उन्हें श्रीनगर ले जाया गया और वहां एक स्कूल में दाखिला दिलाया गया. बाद में दिल्ली के विशेष केंद्रीय स्कूल में भी उन्होंने पढ़ाई की. इसके बाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी यानी NIT, श्रीनगर से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में BTech किया.

इंजीनियरिंग के बाद वांगचुक ने साल 1988 में अपने भाई और पांच साथियों के साथ मिलकर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट ऑफ लद्दाख यानी SECMOL की शुरुआत की. SECMOL ने ‘ऑपरेशन न्यू होप’ की शुरुआत की. इसके तहत सरकारी स्कूलों में एजुकेशन रिफॉर्म और लोकलाइज्ड टेक्स्टबुक्स, टीचर्स की ट्रेनिंग और गांव-स्तरीय शिक्षा समितियों के गठन की पहल शुरू की गई.

शुरू किया आइस स्तूप प्रोजेक्ट

वांगचुक ने साल 2013 के अंत में आइस स्तूप प्रोजेक्ट की शुरुआत की. मकसद लद्दाख के किसानों को अप्रैल और मई के महीनों में बुवाई में पानी की कमी से बचाने का समाधान ढूंढना था.  उन्होंने सफलतापूर्वक दो मंजिला आइस स्तूप का प्रोटोटाइप बना लिया. इसमें लगभग 1,50,000 लीटर पानी स्टोर किया जा सकता था.

TIME मैगजीन ने दी जगह

सोनम वांगचुक को TIME मैगजीन ने ‘द 100 मोस्‍ट इंफ्लुएंशियल क्‍लाइमेट लीडर्स ऑफ 2025’ की लिस्‍ट में जगह दी है, मैगजीन ने लिखा था- “वांगचुक एक इंजीनियर, शिक्षाविद और सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वो पिछले एक दशक से प्राचीन सांस्कृतिक परंपरा, कृत्रिम ग्लेशियर बनाने में नई वैज्ञानिक तकनीकों को शामिल करने का काम कर रहे हैं.”

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