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मास्को। भारत के 2 सबसे करीबी दोस्तों रूस और आर्मेनिया के बीच तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने आर्मेनिया पर अपना दबाव तेज कर दिया ताकि वह पश्चिमी देशों के खेमे में नहीं जाए।
बता दें कि, रूस और आर्मेनिया दोनों ही दशकों से करीबी सहयोगी रहे हैं लेकिन अजरबैजान के साथ जंग में मास्को के साथ नहीं देने की वजह से आर्मेनिया ने अब पश्चिमी देशों के साथ दोस्ती मजबूत करना शुरू कर दिया है। यही नहीं अब तक रूस से हथियार खरीदने वाला आर्मेनिया जमकर भारत, ईरान और चीन से हथियार खरीद रहा है। पुतिन चाहते हैं कि आर्मेनिया रूस के नेतृत्व वाले यूरेशियन इकनॉमिक यूनियन को छोड़कर पश्चिमी देशों के यूरोपीय यूनियन में शामिल होने के फैसले पर तत्काल जनमत संग्रह कराए। वहीं आर्मेनिया के पीएम निकोल पश्नियान ने इस मांग को खारिज कर दिया है।
ज्ञात हो कि, आर्मेनिया के पीएम पश्नियान को पुतिन ने जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया था और इसी दौरान उन्होंने जनमत संग्रह कराने की मांग को खारिज कर दिया। पश्नियान के इस कदम से रूस को बड़ा झटका लगा है। आर्मेनिया के पीएम ने रूस की इस मांग को ‘अनुचित’ करार दिया है। उन्होंने यह बयान ऐसे समय पर दिया है जब रूस ने आर्मेनिया बहुत ज्यादा दबाव बढ़ा दिया है ताकि वह पश्चिमी देशों के खेमे से दूर रहे। इस तनाव की शुरुआत तब जब 29 मई को कजाखस्तान में EAEU के समिट में रूस, बेलारूस, कजाखस्तान और किर्गिस्तान ने एक संयुक्त बयान जारी करके आर्मेनिया से मांग की कि वह यूरोपीय यूनियन को जॉइन करने पर जनमत संग्रह कराए।
पुतिन ने आर्मेनिया को दी ‘यूक्रेन वाली’ धमकी
वहीं, रूसी नेता ने साफ कह दिया कि यूरोपीय संघ और EAEU की एक साथ सदस्यता असंभव है। पुतिन ने एक तरह से आर्मेनिया को इशारे में धमकी दे दी कि उसका भी हाल यूक्रेन वाला हो सकता है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि यूक्रेन यूरोपीय संघ की सदस्यता चाहता था और इसी वजह से जंग के हालात बने। वहीं आर्मेनिया के पीएम ने सोशल मीडिया पर जारी अपने एक संदेश में जोर देकर कहा कि उनकी सरकार तब तक EAEU के साथ मिलकर तब तक काम करती रहेगी जब तक उसे रोक नहीं दिया जाता है।
वहीं, आर्मेनिया के पीएम ने यह भी कहा कि रूस के साथ रिश्ते ‘संक्रमण काल’ में हैं। दोनों देशों का दावा है कि पुतिन ने जन्मदिन की बधाई देने के लिए फोन किया था लेकिन विश्लेषकों का कहना है कि इसके पीछे वजह यूरोपीय यूनयिन की सदस्यता है। रूस आर्मेनिया पर दबाव बना रहा है कि वह यूरोपियन यूनियन से दूर रहे। वह भी तब जब आर्मेनिया में 7 जून को संसदीय चुनाव होने वाले हैं। रूस ने आर्मेनिया में अपने राजदूत को सलाह के लिए वापस बुलाया है। रूस ने आर्मेनिया से मछली और सीफूड के आयात पर रोक लगा दी है। इससे येरेवान को बड़ा झटका लगा है।
आर्मेनिया- रूस विवाद का नगर्नो कराबाख कनेक्शन
दरअसल, एक समय में आर्मेनिया रूस का उपनिवेश रह चुका है। इसी वजह से पुतिन चाहते हैं कि आर्मेनिया में रूस की पकड़ बनी रहे। यूरोपीय संघ ने आरोप लगाया कि रूस अर्थव्यवस्था को चोट पहुंचाकर आर्मेनिया के चुनाव को प्रभावित करना चाहता है। दरअसल, साल 2023 में अजरबैजान ने आर्मेनिया को हराकर नगर्नो कराबाख इलाके पर कब्जा कर लिया। आर्मेनिया ने रूस से मदद की गुहार लगाई लेकिन वह यूक्रेन युद्ध में लगा रहा और कोई मदद नहीं की। इसके बाद अब आर्मेनिया ने भारत, ईरान और चीन से हथियार खरीदे हैं और रूस पर से निर्भरता को घटा दिया है। आर्मेनिया अब यूक्रेन से भी रिश्ते मजबूत कर रहा है।
आर्मेनिया को सबसे ज्यादा हथियार निर्यात करता है भारत
फिलहाल, आर्मेनिया और रूस के बीच इस तनाव से भारत की भी टेंशन बढ़ सकती है। भारत अपने 60 फीसदी हथियार रूस से खरीदता है। वहीं भारत ने आर्मेनिया को पिनाका राकेट सिस्टम, तोपें, एंटी टैंक रॉकेट और आकाश एयर डिफेंस सिस्टम की आपूर्ति की है। आर्मेनिया को भारत सबसे ज्यादा हथियारों का निर्यात करता है। आर्मेनिया ने भारत से करीब 2 अरब डॉलर के हथियार खरीदे हैं। आर्मेनिया भारत से ड्रोन भी ले रहा है ताकि अजरबैजान को करारा जवाब दिया जा सके। भारत के कई हथियार रूसी मूल के हैं। अब रूस की आर्मेनिया से नाराजगी से भारत की टेंशन बढ़ सकती है।


















