Amarnath Yatra : हर साल अमरनाथ यात्रा की तारीख क्यों बदलती है? पहले 30 जून, इस साल 3 जुलाई, ऐसे समझें

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Amarnath Yatra: अमरनाथ यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से हो रही है. यात्रा 57 दिन चलेगी. पहला जत्था रवाना हो चुका है. इस साल 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन करेंगे. यात्रा का समापन 28 अगस्त को होगा. दिलचस्प बात है कि अमरनाथ यात्रा की तारीखें हर साल बदलती हैं, लेकिन सवाल है कि इसकी तारीख कैसे तय होती है. आइए आसान भाषा में समझते हैं.

अमरनाथ यात्रा के लिए पहला जत्था गुरुवार को रवाना हो गया है. यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई से हो रही है. पिछले साल को छोड़ दें तो हर साल यात्रा की शुरुआत अलग-अलग तारीखों पर हुई थी. 2022 में 30 जून, 2023 में 1 जुलाई और 2022 में 29 जून से अमरनाथ यात्रा का आगाज हुआ था. इसी के आधार पर यात्रा के खत्म होने की तारीख भी अलग-अलग थी. अब सवाल है कि अमरनाथ यात्रा की तारीख हर साल क्यों बदल जाती है. आइए इसे समझते हैं.

इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त तक यानी पूरे 57 दिनों तक चलेगी. पिछले साल के मुकाबले यात्रा के लिए इस साल ज्यादा दिन तय गए हैं. जबकि पिछले साल इसकी अवधि मात्र 38 दिन थी.

क्यों बदलती है तारीख?
अमरनाथ यात्रा की तारीख धार्मिक मान्यताओं या अंग्रेजी कैलेंडर के हिसाब से नहीं तय होती. इसकी शुरुआत हिंदू पांचांग के मुताबिक तय होती है. यानी यात्रा की शुरुआत आषाढ़ मास से शुरू होती है और श्रावण पूर्णिमा (रक्षाबंधन) के दिन समाप्त होती है. यही वो समय होता है जब अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से बनने वाला शिवलिंग अपना पूर्ण आकार ले चुका होता है.

हर साल इसकी तारीख चंद्र कैलेंडर (लूनर कैलेंडर) के अनुसार तय होती है. दरअसल, हिंदू पंचांग सौर कैलेंडर से अलग चलता है, इसलिए अंग्रेजी कैलेंडर में अमरनाथ यात्रा की शुरुआत और इसके समापन की तारीख हर साल बदल जाती है.

कैलेंडर में कितना फर्क?
पूर्णिमा एक चंद्र आधारित तिथि है. हर साल ग्रेगोरियन कैलेंडर में इसकी तारीख बदलती है. कभी 9 अगस्त तो कभी 28 अगस्त. अंतर क्यों होता है, इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि हिन्दू चंद्र वर्ष 354 दिनों का होता है और अंग्रेजी सौर वर्ष 365 दिनों का. यानी हर साल 11 दिन का फर्क पैदा होता है. इसी अंतर को पाटने के लिए बीच-बीच में अधिक मास यानी एक अतिरिक्त चंद्र महीना जोड़ा जाता है जो हर दो से तीन साल में एक बार आता है. इस साल यही बदलाव हुआ है और यात्रा के दिन भी ज्यादा हैं.

यही वजह है कि कुछ सालों में अमरनाथ यात्रा की तारीख मात्र चंद दिन आगे-पीछे खिसकती हैं जबकि किसी विशेष साल में एक महीना आगे-पीछे हो जाती है.

5,486 मीटर ऊंचाई पर अमरनाथ गुफा
अनंतनाग जिला अमरनाथ की गुफा के लिए प्रसिद्ध है. अमरनाथ की गुफा 5,486 मीटर की ऊंचाई पर है. यह पहलगाम से 48 किलोमीटर की दूरी पर है. अधिक ऊंचाई के कारण, गुफा साल के अधिकांश समय बर्फ से ढकी रहती है. केवल गर्मियों में कुछ समय के लिए ही इसका प्रवेश द्वार खुलता है. गुफा के अंदर मौजूद बर्फ के स्तंभ के साथ शिवलिंग, दो छोटे बर्फ के स्तंभ मां पार्वती और पुत्र गणेश का प्रतीक हैं.

अनंतनाग जिले की आधिकारिक वेबसाइट के मुताबिक,मान्यता है कि चंद्रमा की कलाओं के साथ बर्फ के शिवलिंग की ऊंचाई घटती-बढ़ती रहती है. श्रावण माह में अगस्त की पूर्णिमा के दिन शिवलिंग अपने सबसे बड़े आकार में होता है.

3.5 लाख से अधिक श्रद्धालु करेंगे दर्शन
इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए 3.5 लाख से अधिक श्रद्धालु दर्शन करेंगे.57 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा 3 जुलाई से शुरू हो रही है और पहला जत्था रवाना हो चुका है. पिछले साल यानी 2025 कुल 5 लाख के करीब श्रद्धालुओं ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे.

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