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नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में औद्योगिक विकास, आधुनिक तकनीक, निवेश और रोजगार को गति देने के उद्देश्य से कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट बैठक में सेमीकंडक्टर उद्योग, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग, उर्वरक उत्पादन और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं से जुड़े बड़े निर्णय लिए गए।
सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से भारत की उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, विदेशी निवेश आकर्षित होगा और लाखों लोगों के लिए नए अवसर पैदा होंगे।
1. सेमीकंडक्टर मिशन को नई रफ्तार
कैबिनेट ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए सेमिकॉन 2.0 कार्यक्रम को मंजूरी दी है। इस योजना के तहत लगभग 1.27 लाख करोड़ रुपये के निवेश का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य भारत को केवल चिप आयात करने वाला देश नहीं, बल्कि चिप डिजाइन और निर्माण के क्षेत्र में वैश्विक पहचान दिलाना है।
2. चिप डिजाइन और रिसर्च को मिलेगा बढ़ावा
नई नीति के तहत देश में चिप डिजाइन करने वाले स्टार्टअप, एमएसएमई और शोध संस्थानों को आधुनिक तकनीक और अनुसंधान सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर रहेगा। सरकार का लक्ष्य घरेलू स्तर पर नई पीढ़ी की चिप विकसित करना है ताकि विदेशी तकनीक पर निर्भरता कम हो सके। इससे नवाचार को बढ़ावा मिलेगा और भारतीय इंजीनियरों तथा टेक्नोलॉजी कंपनियों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
3. उर्वरक उत्पादन बढ़ाने की तैयारी
कृषि क्षेत्र को ध्यान में रखते हुए सरकार ने यूरिया उत्पादन से जुड़े कई अहम फैसले लिए हैं। नई निवेश नीति के माध्यम से वर्ष 2031 तक नए यूरिया संयंत्रों को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही पुराने संयंत्रों को अधिक ऊर्जा दक्ष और कम लागत वाली तकनीक में बदलने की योजना बनाई गई है। इस पहल का उद्देश्य घरेलू उत्पादन बढ़ाना, आयात पर निर्भरता कम करना और किसानों को समय पर उर्वरक उपलब्ध कराना है।
4. मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग को मिलेगा नया समर्थन
कैबिनेट ने मोबाइल निर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए PLI 2.0 योजना को भी मंजूरी दी है। इस योजना के जरिए सरकार चाहती है कि अधिक से अधिक कंपनियां भारत में उत्पादन इकाइयां स्थापित करें। यदि निवेश बढ़ता है तो इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग का विस्तार होगा, निर्यात में वृद्धि होगी और विनिर्माण क्षेत्र में बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
5. युवाओं के लिए कौशल और रोजगार के नए अवसर
सरकार का फोकस केवल उद्योग लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन उद्योगों के लिए प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार करने पर भी है। देश के कई विश्वविद्यालयों में छात्रों को चिप डिजाइन और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स तकनीक का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। आने वाले समय में सेमीकंडक्टर फैब, क्लीन रूम ऑपरेशन, चिप निर्माण और परीक्षण जैसे क्षेत्रों में भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जिससे युवाओं को हाई-टेक सेक्टर में रोजगार मिलने की संभावना बढ़ेगी।


















