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Chhattisgarh News/खैरागढ़। जिस TET को लेकर आज शिक्षक सड़क पर हैं, वही परीक्षा बच्चों की पढ़ाई और शिक्षक की न्यूनतम योग्यता से जुड़ी है। सुप्रीम कोर्ट ने इन-सर्विस शिक्षकों के लिए TET को अनिवार्य माना है, लेकिन खैरागढ़ में पुराने शिक्षक इस फैसले के बाद सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं। शनिवार को शिक्षक साझा मंच ने बरसते पानी के बीच धरना दिया और बाद में रैली निकालकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।
आखिर TET है क्या और क्यों जरूरी है?
TET यानी Teacher Eligibility Test (शिक्षक पात्रता परीक्षा)। आसान भाषा में कहें तो यह परीक्षा यह जांचने के लिए है कि शिक्षक में बच्चों को पढ़ाने के लिए जरूरी न्यूनतम शिक्षण क्षमता है या नहीं। इसमें केवल विषय का ज्ञान ही नहीं, बल्कि बाल विकास, शिक्षण पद्धति, भाषा और बच्चों को समझने से जुड़े सवाल भी होते हैं। RTE यानी शिक्षा का अधिकार कानून लागू होने के बाद शिक्षक की पात्रता के लिए TET को महत्वपूर्ण बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने भी अपने फैसले में माना कि बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जा सकता। इसी आधार पर अदालत ने इन-सर्विस शिक्षकों के लिए भी TET की अनिवार्यता को बरकरार रखा है।
फिर 20-30 साल पुराने शिक्षक विरोध क्यों कर रहे? यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। खैरागढ़ में आंदोलन कर रहे शिक्षकों का कहना है कि जब उनकी नियुक्ति हुई थी, उस समय TET अनिवार्य नहीं था। उन्होंने उस समय सरकार की ओर से तय सभी शैक्षणिक योग्यता और भर्ती की शर्तें पूरी की और नौकरी हासिल की। कई शिक्षक अब 20, 25 और यहां तक कि 30 साल तक सेवा कर चुके हैं।

शिक्षकों का सवाल – बीच नौकरी में TET की नई शर्त क्यों लागू की जा रही ?
शिक्षकों का कहना है कि जब नियुक्ति के समय वे योग्य थे और विभाग ने इतने वर्षों तक उनकी सेवा ली, तो अब बीच नौकरी में TET की नई शर्त क्यों लागू की जा रही है। प्रधानपाठक ज्योति अग्रवाल ने कहा कि उनकी उम्र 58 साल है। उनका कहना है कि इतने लंबे सेवाकाल के बाद अब परीक्षा की शर्त उनके लिए बड़ी परेशानी है। उनका सवाल है कि जिस योग्यता के आधार पर नौकरी मिली और इतने वर्षों तक सेवा की, उसी सेवा को ध्यान में रखते हुए पुराने शिक्षकों को TET से छूट दी जानी चाहिए। शिक्षक साझा मंच के जिलाध्यक्ष रामलाल साहू ने भी इसी बात पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि शिक्षक भर्ती के समय जो योग्यता मांगी गई थी, उसे पूरा करने के बाद ही नियुक्तियां हुई थी। अगर 25-26 साल तक शिक्षक बच्चों को पढ़ाते रहे, तो क्या इतने वर्षों तक उनकी गुणवत्ता पर सवाल नहीं था?
हालांकि, यहां एक बात साफ समझना जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट ने TET को अनिवार्य माना है और फिलहाल यह फैसला लागू है। हालांकि पुराने शिक्षकों को राहत देते हुए परीक्षा पास करने के लिए 31 अगस्त 2028 तक का समय दिया गया है। यानी अभी ऐसा नहीं है कि शिक्षकों की नौकरी तुरंत खत्म हो जाएगी, लेकिन तय समय-सीमा के भीतर TET पास करना जरूरी होगा। पदोन्नति के मामले में भी TET की शर्त महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि शिक्षकों की मांग अब सरकार से राहत की है। उनका कहना है कि पुराने शिक्षकों की उम्र, लंबे अनुभव और सेवा अवधि को देखते हुए कोई अलग व्यवस्था बनाई जाए।
आंदोलन में सिर्फ TET का मुद्दा नहीं
वहीं, खैरागढ़ के शिक्षकों ने TET से छूट के साथ वरिष्ठता के आधार पर पदोन्नति, पूर्व सेवा अवधि को जोड़कर पूर्ण पेंशन, केंद्रीय वेतनमान के आधार पर वेतन निर्धारण, वेतन विसंगति दूर करने और B.Ed के लिए विभागीय ब्रिज कोर्स जैसी मांगें भी रखी हैं।शिक्षकों का कहना है कि वे आंदोलन के कारण बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं करना चाहते इसलिए शनिवार को स्कूल में पढ़ाने के बाद धरना प्रदर्शन किया गया। बारिश के बावजूद शिक्षक धरने पर डटे रहे। इसके बाद रैली निकालकर तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

दरअसल, शिक्षकों ने सरकार को आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है। मांगों पर समाधान नहीं हुआ तो 29 अगस्त को जिला स्तरीय हड़ताल की जाएगी। 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस तक सरकार के फैसले का इंतजार किया जाएगा। इसके बाद भी बात नहीं बनी तो 9 सितंबर से अनिश्चितकालीन आंदोलन और मुख्यमंत्री तथा शिक्षा मंत्री के निवास घेराव की चेतावनी दी गई है। इस पूरे विवाद में दोनों पक्षों की अपनी बात है।
फिलहाल, सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि शिक्षक की न्यूनतम पात्रता सुनिश्चित होना जरूरी है, जबकि पुराने शिक्षकों का कहना है कि उनकी दो-तीन दशक की सेवा और अनुभव को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यानी असली सवाल सिर्फ TET का नहीं है। सवाल यह है कि नई पात्रता व्यवस्था लागू करते समय उन शिक्षकों के अनुभव और सेवा सुरक्षा का रास्ता क्या होगा, जिन्होंने अपनी जिंदगी का बड़ा हिस्सा सरकारी स्कूलों में बच्चों को पढ़ाने में लगा दिया है। अब सरकार को सुप्रीम कोर्ट के आदेश और पुराने शिक्षकों की व्यावहारिक परेशानी, दोनों के बीच रास्ता निकालना होगा।


















