General Knowledge : भारत में कहां-कहां हैं तेल के कुएं..असम में हुई खोज ने कैसे खोला रास्ता?.आईए जानें

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Oil well in India: अमेरिका-इजराइल और ईरान की जंग के बीच तेल और गैस चर्चा में है. काला सोना कहा जाने वाला तेल किसी भी देश की किस्मत बदलने की ताकत रखता है. ईरान से सऊदी तक तेल की ताकत का रुतबा नजर आता है. भारत में इसकी शुरुआत तब हुई जब असम के डिगबोई में इसे खोजा गया. यह खोज भारत के पेट्रोलियम सेक्टर के लिए टर्निंग पॉइंट थी. जानिए, भारत में कहां-कहां तेल के कुएं.

तेल कैसे किसी देश की किस्मत बदलता है ये मिडिल ईस्ट से समझा जा सकता है. सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर, ईरान वो देश हैं जिनके तेल के भंडार उन्हें मालामाल किया. यही वजह है इसे काला सोना कहा जाता है. यहां के तेल कुएं सही मायने में सोना उगल रहे हैं. भारत में भी तेल के कुएं हैं. यहां भी क्रूड ऑयल का खजाना है. भले ही मिडिल ईस्ट से कम ही सही.भारत में इसकी शुरुआत 1867 से हुई थी, जब असम के डिगबोई में तेल की खोज हुई. यह खोज भारत के पेट्रोलियम सेक्टर के लिए टर्निंग पॉइंट थी. इसके बाद भारत में बहुत कुछ बदला. पेट्रोलियम प्रोडक्ट बनने का रास्ता साफ हुआ. एलपीजी का उत्पादन शुरू हुआ जो लोगों के रसोई घर तक पहुंची.

असम के डिगबोई में भारत की पहली आधुनिक रिफाइनरी का निर्माण हुआ और दिसंबर 1901 में इसका संचालन शुरू हुआ. देश में पहला पेट्रोलियम प्रोडक्ट तब सामने जब जनवरी 1902 में केरोसिन का पहला बैच बाजार पहुंचा. धीरे-धीरे देश के दूसरे हिस्सों में तेल की खोज हुई. प्राकृतिक गैस के भंडार मिले.

देश में कहां-कहां तेल के कुएं?

तेल से समृद्ध दुनिया के दूसरे देशों की तुलना में भारत का तेल भंडार कम है लेकिन यह उपलब्धि देश के लिए खास है. घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन भारत की कुल मांग का केवल 15-18% ही पूरा करता है, जबकि शेष मांग पश्चिम एशिया, रूस और अफ्रीका से तेल आयात के जरिए पूरा किया जाता है. देश के कई हिस्सों में तेल का विशाल भंडार है.

असम: यह देश का सबसे पुराना तेल उत्पादक क्षेत्र है. देश के पेट्रोलियम उद्योग में इसका ऐतिहासिक महत्व है. असम में ब्रह्मपुत्र घाटी के किनारे लगभग 320 किलोमीटर तक तेल से भरी परतें फैली हुई हैं. यहां के कई हिस्सों में तेल के विशाल भंडार हैं. जैसे- डिगबोई, नाहरकटिया, मोरन-हुगरीजन देश का सबसे पुराना तेल क्षेत्र है. वहीं तेल का प्यूरीफिकेशन डिगबोई, गुवाहाटी, बोंगाईगांव और बरौनी में किया जाता है.Assam Oil Refinary
असम के डिगबोई की रिफाइनरी.

गुजरात: गुजरात पश्चिमी भारत के सबसे महत्वपूर्ण तटीय तेल उत्पादक क्षेत्रों में से एक है. अंकलेश्वर, कलोल, मेहसाणा, नवगाम, कोसांबा, कथाना, बरकोल, सानंद राज्य के सबसे अधिक उत्पादक तेल क्षेत्र हैं. तेल को ट्रॉम्बे और कोयाली की रिफाइनरियों तक पहुंचाया जाता है. यहां का पाइपलाइन नेटवर्क प्रोडक्शन और प्यूरीफिकेशन में मदद करता है.

राजस्थान: बाड़मेर क्षेत्र के कारण राजस्थान भारत का सबसे बड़ा तटवर्ती तेल उत्पादक राज्य बनकर उभरा. इस बेसिन में बलुआ पत्थर संरचनाओं में महत्वपूर्ण भंडार मौजूद हैं. भारत में पाए गए सबसे बड़े तेल भंडारों में से एक प्रमुख तेल क्षेत्र है. भारत के घरेलू कच्चे तेल उत्पादन में इसका महत्वपूर्ण योगदान है.

मुंबई हाई: यह भारत का सबसे बड़ा और सबसे अधिक उत्पादक तेल वाला क्षेत्र है. अरब सागर में स्थित यह तेल क्षेत्र मुंबई से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में है. 1974 में खोजा गया यह क्षेत्र चट्टानी परतों में हैं.

कृष्णा-गोदावरी बेसिन: पूर्वी तट पर स्थित कृष्णा-गोदावरी (केजी) बेसिन एक महत्वपूर्ण उभरता हुआ तेल और गैस उत्पादक क्षेत्र है. इसमें पर्याप्त हाइड्रोकार्बन क्षमता में मौजूद है. आंध्र प्रदेश के तट से दूर स्थित इस खास तेल में तेल और प्राकृतिक गैस दोनों के भंडार मौजूद हैं.

कावेरी बेसिन: कावेरी बेसिन तमिलनाडु और उससे सटे हिस्से का महत्वपूर्ण तेल उत्पादक क्षेत्र है. नरीमनम, कोविलप्पल में तेल का भंडार है.

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