GK: पायलट कैसे साफ करते हैं प्लेन का शीशा, क्या कार की तरह लगे होते हैं वाइपर?

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Ajab Gjab: क्या आपने कभी सोचा है कि प्लेन का सामने वाला शीशा आखिर साफ कैसे किया जाता है? क्या प्लेन में इसे साफ करने के लिए प्लेन में वाइपर लगे होते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में यहां…


प्लेन का शीशा कैसे साफ होता है? हाल ही में सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है. इस वीडियो में एक पायलट कॉकपिट से बाहर निकलकर प्लेन का शीशा साफ करता दिखाई देता है. इसे देखकर कई लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि क्या सच में पायलट ही प्लेन का शीशा साफ करते हैं? आइए जानते हैं इसके बारे में यहां…

उड़ान से पहले होती है पूरी सफाई
हर उड़ान से पहले मेंटेनेंस टीम कॉकपिट के सामने लगे शीशों को अच्छे से साफ करती है. खास लिक्विड और कपड़े से धूल, दाग और कीड़े हटाए जाते हैं ताकि पायलट को साफ दिखे.



पायलट खुद सफाई नहीं करते आम तौर पर पायलट का काम सिर्फ विमान उड़ाना होता है. सफाई की जिम्मेदारी ग्राउंड स्टाफ की होती है. हालांकि कभी-कभी पायलट या को-पायलट साइड विंडो खोलकर हल्की सफाई कर सकते हैं.

प्लेन में भी होते हैं वाइपर जैसे कार में वाइपर होते हैं, वैसे ही प्लेन के कॉकपिट में भी वाइपर लगे होते हैं. ये बारिश या गंदगी हटाने के काम आते हैं और पायलट इन्हें कॉकपिट से आसानी से कंट्रोल करते हैं.

मजबूत होते हैं प्लेन के वाइपर विमान के वाइपर कार के मुकाबले ज्यादा मजबूत बनाए जाते हैं. आम तौर पर दो अलग-अलग वाइपर होते हैं, एक पायलट की तरफ और दूसरा को-पायलट की तरफ, ताकि दोनों को साफ दिखाई दे.



तेज रफ्तार में हवा ही साफ कर देती है जब विमान बहुत तेज गति से उड़ता है, लगभग 900 किलोमीटर प्रति घंटा या उससे ज्यादा, तब तेज हवा खुद ही पानी और धूल को उड़ा देती है. इसलिए ऊपर वाइपर की जरूरत कम पड़ती है. विमान के शीशों पर खास तरह की हाइड्रोफोबिक कोटिंग लगाई जाती है. इससे पानी शीशे पर रुकता नहीं है और हवा के साथ फिसलकर नीचे चला जाता है, जिससे विजिबिलिटी बेहतर रहती है.

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