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जनरल नॉलेज डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपने कभी सोचा है कि पूरी धरती एक ही समय पर क्यों नहीं चलती? जब अमेरिका में दिन होता है, तो भारत में रात. ऐसे में दोनों देश के लोग कैसे एक समय पर मिले और उनके बीच टाइम को लेकर कंफ्यूजन ना हो, इसके लिए टाइम जोन का कॉन्सेप्ट ईजाद किया गया. आइए जानते हैं घड़ी की सुइयों के पीछे छिपे टाइम जोन के साइंस और इतिहास को…
रेलगाड़ियों की वजह से टाइम जोन की शुरूआत
19वीं सदी से पहले, हर शहर अपना समय सूरज की स्थिति के हिसाब से तय करता था, लेकिन जब रेलगाड़ियां और संचार के साधन बढ़े, तो अलग-अलग जगहों पर लोकल टाइम की वजह से भारी कन्फ्यूजन होने लगा, इसी समस्या ने स्टैंडर्ड टाइम की जरूरत पैदा की.

किसे आया टाइम जोन बनाने का ख्याल?
दुनिया को टाइम जोन में बांटने का श्रेय स्कॉटिश-कनाडा के इंजीनियर सर स्टैनफोर्ड फ्लेमिंग को जाता है. उन्होंने ही सबसे पहले यह प्रस्ताव रखा कि दुनिया को अलग-अलग समय क्षेत्रों में बांटा जाना चाहिए ताकि अंतरराष्ट्रीय यात्रा और व्यापार आसान हो सके.
वाशिंगटन डीसी की वो ऐतिहासिक कॉन्फ्रेंस
साल 1884 में अमेरिका की राजधानी वाशिंगटन डीसी में इंटरनेशनल मेरिडियन कॉन्फ्रेंस हुई. इस कॉन्फ्रेंस में 25 देशों के प्रतिनिधि शामिल हुए. इसी मीटिंग में तय किया गया कि दुनिया का समय कैसे मापा जाएगा.
ग्रीनविच मीन टाइम (GMT) का जन्म
इसी सम्मेलन में लंदन के ग्रीनविच से गुजरने वाली रेखा को 0 डिग्री देशांतर (Prime Meridian) माना गया. यहीं से दुनिया का मानक समय GMT शुरू हुआ, जिसके आधार पर बाकी देशों का समय आगे (+) या पीछे (-) तय किया जाता है.
दुनिया के 24 हिस्से
पूरी दुनिया को कुल 24 टाइम जोन में बांटा गया है. हर जोन के बीच आमतौर पर एक घंटे का अंतर होता है. हालांकि, कुछ देश अपनी सुविधा के अनुसार आधे घंटे (जैसे भारत का GMT+5:30) का भी अंतर रखते हैं.

इंटरनेशनल डेट लाइन
वहीं, डेट तय करने को लेकर 180 डिग्री देशांतर पर एक काल्पनिक रेखा खींची गई है जिसे इंटरनेशनल डेट लाइन कहते हैं. इसे पार करते ही कैलेंडर की तारीख बदल जाती है. यह रेखा प्रशांत महासागर के बीच से उत्तर से दक्षिण की और खींची गई है.
सीधी क्यों नहीं है तारीख बदलने वाली रेखा?
इंटरनेशनल डेट लाइन बिल्कुल सीधी नहीं बल्कि जिग-जैग है, ऐसा इसलिए किया गया ताकि एक ही देश या द्वीप समूह के बीच से यह रेखा न गुजरे, वरना एक ही टापू पर दो अलग-अलग तारीखें हो जातीं और वहां का प्रशासन चलाना असंभव हो जाता.


















