Health Tips : रोजाना 10k कदम चलने से शरीर में क्या होता है? एक्सपर्ट ने बताया

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। रोजाना 10 हजार कदम चलना लोगों में काफी पॉपुलर है. मोबाइल, स्मार्ट वॉच या दूसरे गैजेट्स से स्टेप काउंट करना आसान हो गया है. इसलिए ज्यादातर अब 10 हजार कदम चलने को रूटीन में शामिल करने लगे हैं. क्या आप जानते हैं इससे शरीर में क्या फर्क पड़ता है. चलिए आपको बताते हैं.



सैर करने का तरीके में कई बदलाव यानी मॉडर्न तरीके अपनाए जाते हैं. इनमें से एक रोजाना 10 हजार कदम चलना भी शामिल है. सोशल मीडिया पर वीडियो या पोस्ट देखकर लोग स्मार्ट वॉच और दूसरे गैजेट्स से अपने स्टेप काउंट करते हैं. कई स्टडी में आया है कि लोग 10 हजार कदम चलने का मेंटल प्रेशर भी लेने लगे हैं. वैसे यहां हम बताने जा रहे हैं कि आखिर रोजाना ऐसा करने से शरीर में क्या बदलाव नजर आते हैं. डॉक्टर राकेश कुमार सिंह (साइंटिस्ट, AIIMS, नई दिल्ली) कहते हैं कि पैदल चलना हमारे शरीर की कोशिकीय, अंगीय जो प्रणालीगत स्तर है उसके प्रभावति करता है. इसकी वजह से हमारी हेल्थ में पॉजिटिव इफेक्ट्स नजर आते हैं.


बता दें कि, पैदल चलने से हमारी मांसपेशियों और दूसरे अंगों में ब्लड फ्लो बेहतर हो पाता है. एक्ट्रेस तमन्ना भाटिया के फिटनेस ट्रेनर सिद्धार्थ सिंह ने अपने अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में इसको लेकर जानकारी साझा की. चलिए आपको बताते हैं कि रोजाना ऐसा करने से हमारे शरीर में कौन-कौन से बदलाव आते हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

हालांकि, डॉक्टर राकेश कहते हैं कि हमारे शरीर की अधिकांश मांसपेशियां पैरों में होती हैं, इसलिए दिनभर में ज्यादा चलना स्वस्थ रक्त शर्करा से स्तर को सही बनाए रखने का तरीका है. क्योंकि इससे मांसपेशियों को ग्लूकोज अवशोषित करने में बेहतर हेल्प मिलती है. बल्ड शुगर का लेवल सही रखने से लिवर में ट्राइगिलिस्ट्राइड का प्रोडक्शन कम होता है.


वहीं, नियमित शारीरिक गतिविधि से पूरी हेल्थ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. वजन को बनाए रखने या इसे बढ़ने से रोकने में ये एक्टिविटी काफी हेल्प करती है. ब्लड शुगर, बल्ड प्रेशर और फैट के सुधार हो सकता है.

शरीर में नजर आते हैं ये बदलाव
पहला वीक- शरीर में दर्द महसूस होना

ज्ञात हो कि, ट्रेनर सिद्धार्थ कहते हैं कि इस रूटीन को अपनाने में एक हफ्ता लग ही जाता है. शुरू में मांसपेशियों में दर्द, हल्की इरिटेशन और थोड़ी दिनचर्या में गड़बड़ी महसूस हो सकती है. लेकिन धीरे-धीरे आपका शरीर इसके अनुकूल होने लगता है.

दूसरा वीक- अच्छा डाइजेशन और हल्कापन महसूस होना

वहीं, ट्रेनर कहते हैं कि जब आप दूसरे वीके में शामिल होते हैं तो चीजें बदली हुई नजर आने लगती है. ऐसे में शरीर में होने वाली अकड़न कम होने लगती है और आराम महसूस होने लगता है. इस दौरान पाचन बेहतर फील होता है और शरीर में अलग ही एनर्जी महसूस होने लगती है.



तीसरा हफ्ता- एनर्जेटिक फील होना

दरअसल, सिद्धार्थ के मुताबिक तीसरे हफ्ते में हमारा शरीर इसके अनुकूल खुद को ढाल लेता है. ऐसे में बॉडी एनर्जेटिक रहने लगती है क्योंकि दिन भर में सुस्ती कम महसूस होती है. इसके कई फायदे हैं जिसमें हमारे मूड का बेहतर होना भी शामिल है. स्ट्रेस कम होने लगता है क्योंकि आप शांत महसूस करने लगते हैं. इस कंडीशन में बेहतर नींद तक आने लगती है.

एक महीना होने पर- वेट मैनेजमेंट में फर्क

फिलहाल, जब आप इस रूटीन को लगातार चौथे हफ्ते फॉलो करते हैं तो वेट मैनेजमेंट में भी फर्क नजर आने लगता है. जैसे हमारी बॉडी में एनर्जी स्टेबल होने लगती है, हल्कापन महसूस होने लगता है. सबसे बड़ा बेनिफिट है कि शरीर का वजन मेंटेन होने लगता है. लोग एक या दो दिन 10 हजार कदम चलकर फायदों की सोचने लगते हैं. एक्सपर्ट कहते हैं कि 10 हजार कदम चलने से रातों रात फर्क नहीं दिखता. इसके लिए रूटीन को फॉलो करना जरूरी है.

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